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7-8 किलोमीटर दूर पत्थरीले मार्ग तय कर ग्रामीण पंचायत में राशन लेने जाने को मजबूर

7-8 किलोमीटर दूर पत्थरीले मार्ग तय कर ग्रामीण पंचायत में राशन लेने जाने को मजबूर


साहब सुबह निकलते है तो शाम को घर पहुँचते है, कई दिन रात हो जाता है - ग्रामीण

सुरजपुर, 7 जनवरी। प्रदेश की सरकार अपने 2 वर्ष पूर्ण होने पर जश्न मना रही है। प्रदेश भर के तमाम जिलों में प्रेस वार्ता करके अपनी उपलब्धियां गिना रही है। तो वहीं जिले के कई ग्राम ऐसे है। जहां सड़क, बिजली, पानी, राशन जैसे बुनियादी सुविधाओं से ग्रामीण वंचित है। बल्कि पीडीएस राशन के लिए 7- 8 किलोमीटर दूर पत्थरीले मार्ग से ग्रामीण लेने जाने को मजबूर है। यहां तक कि राशन दुकान दार ग्रामीणों के हकों को भी मारने में कोई परहेज नहीं कर रहे है। बल्कि केरोसिन ग्रामीणों को देना तक ऊचीत नहीं समझ रहे है। 

गौरतलब है कि हमारी टीम बीते दिनों प्रेमनगर जनपद क्षेत्र के ग्राम हरियपुर का दौरा किया ग्राम पंचायत से 7-8 किलोमीटर दूर रीझना बहरा में बड़ी संख्या में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पंडो बस्ती गए। यहां में ग्रामीण तिहत्तर आत्मज राम सुंदर जो कि गोड़ जाति के है। राम रतन आत्मज रीझन राम सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सितम्बर माह का राशन लेने हरियरपुर पंचायत भवन में लेने गए थे। यहां के पीडियस संचालक द्वारा केरोसिन नही दिया गया है। इनका कहना है कि उचित मूल्य के दुकान दार का कहना है कि इस माह मिट्टी तेल नहीं आया है।  हम सुबह के 9 बजे सायकल से लेने गए थे तो वहीं ऐसे कई ग्रामीण भी है जो पैदल कावर में राशन लेने जाते है। जिनको राशन लेकर आते तक रात हो जाती है। कई दफा रात्रि में ग्रुप बनाकर आना जाना पड़ता है। ताकि जंगली जानवरों से  मुलाकात ना हो जाये।

 ग्रामीण बताते हैं कि राशन लेने शुबह निकलते ही तो दोपहर, कई दफा रात्रि में घर पहुँचते है। जबकि प्रशासन द्वारा राशन पहुँचाया जा सकता है। किंतु ग्रामीणों की परवाह किसे है। जब मिट्टी तेल वितरण नहीं होना को लेकर हमने फूड इंस्पेक्टर श्वेता अग्रवाल से बात की तो उन्होंने बताती हूं कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया और मीडिया से दूरी बना ली। जब इस सम्बंध में जिले के फूड विभाग के अधिकारी संदीप भगत से जानकारी जानने की कोशिश की गई। किंतु फूड अफसर द्वारा मीडिया से बात करना ही उचित नहीं समझा ना तो फोन उठाए और ना ही मैसेज का जवाब दिए। जबकि ये क्षेत्र वनांचल के बीच में है। इन क्षेत्रों में आज तक किसी नेता,मंत्री,  प्रशासनिक अधिकारी तक जाना उचित नहीं समझते हैं।