कोरोना समय में पोइला बोइसाख

कोरोना समय में पोइला बोइसाख

आज से बांग्ला नववर्ष की शुरुआत

सुजाता साहा

आज जब पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के कारण सारे तीज त्यौहार की रौनक सुनी है , मंदिर, मस्जिद , गिरजाघर सुने हैं ऐसे में आज से बंगाली नववर्ष ‘पोइला बोइसाख’ की शुरूआत हो रही है, लोग शुभो नबबर्ष के साथ दिन की शुरुवात कर रहे हैं। वैशाख महीने की शुरुआत के साथ ही बंगाल, बांग्लादेश,पूर्व में असम, त्रिपुरा और उड़ीसा के अलावा भारत और दुनिया भर में बसे बंगाली समुदाय के लोग इस दिन नए साल का त्यौहार धूमधाम से मनाते हैं। वहीं पंजाब, तमिलनाडु और केरल में भी अपने-अपने समाज के हिसाब से नववर्ष शुरू हुआ है. इस दिन प्रत्येक बांग्ला भाषी के घर में मीठे पकवान बनाए जाते हैं खुद भी खाते हैं और पड़ोसियों, रिश्तेदारों को भी खिलाते हैं। इस दिन व्यापारी अपने नए खाते की शुरुआत करते हैं।

बंगाली भाषियों का त्यौहार तीन दिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। साल के अंत के दिनों में सभी घरों में करेला, नीम पत्ती का रस पीकर स्वास्थ्य कामना की जाती है। रोग दोष नाश के लिए इसका सेवन किया जाता है। साल के अंतिम दिन कच्चे आम का प्रयोग किया जाता है। मतलब इस दिन के बाद से आम खाया जा सकता है। वहीं पोइला बोइसाख के दिन सुबह से ही घरों में शंख, घंटी, कांसी की आवाज आती है। पूजा पाठ के बाद  लोग अपने-अपने रिश्तेदारों के घर जाकर या संचार माध्यम से शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

बंगाली नव वर्ष या पोइला बोइसाख ज्यादातर अप्रैल के महीने में, यानी 14 अप्रैल या 15 अप्रैल को पड़ता है और बंगाली समाज इस दिन एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए सुबो नोबोर्शो मतलब नए साल की बधाई देते हैं, जिसमें सुबो का अर्थ है शुभ या अच्छा और नबो का अर्थ है नया और बोर्शो का अर्थ है वर्ष से होता है।

इस दिन बच्चे और युवा पीढ़ी नए कपड़े पहनकर बुजुर्गों के पैर छूते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं और साथ ही अपने रिश्तेदारों को मिठाई और अन्य उपहार भेंट करते हैं। मिष्टि दोई के बिना तो त्योहार अधूरा है. रसगुल्ला के अलावा अन्य मिठाईयां तो होती ही हैं साथ में पायस भी होना जरूरी है।