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केले की फसल से आत्मनिर्भर होकर मुनाफा कमा रहे शैलेश अटामी

 केले की फसल से आत्मनिर्भर होकर मुनाफा कमा रहे शैलेश अटामी

 दंतेवाड़ा में विकासखंड गीदम के अंतर्गत ग्राम कासोली के निवासी  शैलेश अटामी एक प्रगतिशील कृषक के रूप में उभर रहा है उन्होंने कहा कि केले के पत्तियों को भी नहीं फेंकते किसान वहां केले की सूखी पत्तियों को फेंका नहीं जाता, वे वहीं गिरकर खाद बन जाते हैं। इसमें खेत को मदद करने वाले कल्चर उपजते हैं। प्रारंभ में वह पारंपरिक रीति से सिर्फ धान का फसल लगाता था। 

दो वर्ष पूर्व उद्यानिकी मैदानी अमले की सलाह से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत 1 हेक्टेयर क्षेत्र में टिशु कल्चर केला पौधे का रोपण किया 10-11 माह के पश्चात केले की फसल से 50-60 हजार की आमदनी अर्जित की केले की फसल से आमदनी को देखते हुए एक हेक्टेयर रकबा और बढ़ाया अब उसके पास कुल 2 हेक्टेयर क्षेत्र में केला का फसल लगाया है केले की फसल से अच्छी आमदनी को देखते हुए 

3 एकड़ में और केला का रोपण करने का निर्णय लिया हम सभी किसानों को  प्रतिमाह केवल केले से लगभग 10से 15 हजार की मासिक आमदनी प्राप्त हो रही है अब तक केले के फसल से 1 लाख 40 हजार रूपये की आमदनी अर्जित कर चुके है। केले के साथ-साथ 3 सौ नारियल के पेड़ भी लगाएं हैं शैलेश अटामी कासोली ग्राम का एक आदर्श किसान है। जिसे देखकर अन्य किसानों का उद्यानिकी खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। शैलेश अपने खेत में पांच छः लोगों को काम में लगा कर साल भर रोजगार मुहैया कराते हैं। जिले में केले की मांग अधिक होने के कारण अन्य बाहरी जिलों में बेचने के लिए जाना नहीं पड़ता है। इसलिए पैदावार को अकेला 35 से 40 रुपए दर्जन के भाव से बिक्री किया इसके अलावा अन्य फूटकर विक्रेता उनके घर से ही केला फल खरीदने आते है।