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अवैध डामर प्लांट क्षेत्र में जगह-जगह स्थापित, खनिज अधिकारी के कार्यप्रणाली संदेहास्पद

अवैध डामर प्लांट क्षेत्र में जगह-जगह स्थापित, खनिज अधिकारी के कार्यप्रणाली संदेहास्पद

भानुप्रतापपुर, 13 जनवरी।  इन दिनों भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ एवं दुर्गुकोंदल ब्लाक के सैकड़ो गांवो में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। वृहद मात्रा में सड़क निर्माण कार्य के चलते क्षेत्र में ठेकेदारों  द्वारा जगह-जगह उडामर प्लांट भी स्थापित की गई है। जिस पर जिला खनिज अधिकारी कांकेर के संरक्षण में डामर प्लांट स्थापित है ऐसा प्रतीत हो रहा है क्योंकि अधिकांश डामर प्लांट अवैध रूप से संचालित हो रही है जिस पर कोई कार्यवाही नहीं किये जाने समझ से परे है।

विदित हो कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क एवं लोक निर्माण विभाग के द्वारा गांवों को शहरों से जोड़ने व पुरानी जर्जर सड़कों का पुनः निर्माण किया जा रहा है। सड़क निर्माण का काम कई ठेकेदारों के द्वारा किया जा रहा है। चुकि सड़क निर्माण कार्य में गिट्टी , डामर के उपयोग के चलते गांव एवं जंगलों के बीच डामर प्लांट स्थापित किया गया है। डामर प्लांट के प्रदूषण से ग्रामीणों को परेशानी हो रहे है, वही जंगल व वन्यप्राणी के लिए भी खतरा बना हुआ है।


 पर्यावरण दृष्टिकोण से घातक 

डामर प्लांट के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। डामर प्लांट से निकलने वाले धुँए के कारण आसपास के क्षेत्र में रहने वाले के घरों में जैसे अंधेरा छा जाता है, जहरीले धुएं का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। इसकी चपेट में आने से बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एक तरफ जिला प्रशासन लगातार सुपोषण अभियान चलाकर बच्चों को पोटीन पोषण आहार देकर, महिलाओं और बच्चों को सुपोषित कर रही है, वही डामर प्लांट से निकलने वाले धुएं के कारण कई तरह की बीमारियों के साथ ही कुपोषण भी फैल सकता है।

पक्षियों पर बुरा असर

डामर प्लांट का असर पक्षियों पर ज्यादा देखा जा सकता है, ग्रामीणों की माने तो जिन स्थानों पर प्लांट लगाए गए हैं उनके आसपास स्थानीय पक्षियों की संख्या नगण्य हो चुकी है प्लांट लगने के बाद पक्षियों की गूंज सुनाई नहीं देती प्लांट के आसपास पशु और पक्षी नजर ही नहीं आते।

क्या कहते है पंचायत सचिव 

ग्राम पंचायत मुंगवाल के सचिव सरस्वती निर्मकर से रत्ना खनिज उद्योग के द्वारा डामर प्लांट स्थापित किये जाने के संबंध में  पूछा गया तो इस बारे में ठेकेदार के द्वारा कोई भी चर्चा ग्राम पंचायत से  नही की गई है और न ही डामर प्लांट स्थापित के लिए ठेकेदार के द्वारा एनओसी लिये ली गई है।

खनिज अधिकारी का कार्य संदेहास्पद

बता दे कि यदि जिले में कही भी डामर प्लांट स्थापित की जाती है, तो प्लांट के समय- समय मॉनीटिरिंग की जवाबदेही जिला खनिज अधिकारी की होती है लेकिन खनिज अधिकारी द्वारा न ही कभी स्थल का निरीक्षण किया जाता है और न ही शिकायत किये जाने पर जानकारी देना उचित समझा जाता है।