breaking news New

एस पदमजाः बैडमिंटन खिलाड़ी से आवाज की दुनिया का बेहतरीन सफर

एस पदमजाः बैडमिंटन खिलाड़ी से आवाज की दुनिया का बेहतरीन सफर

 आकाशवाणी में  आज भी शुद्धता का ध्यान रखा जा रहा है

पदमा कुलदीप

आकाशवाणी में 36 साल सेवा देने वाली एस . पदमजा  30 मई को सेवानिवृत्त हो गई।  बैडमिंटन खिलाड़ी से आवाज की दुनिया का बेहतरीन सफर तय करने वाली पद्मजा नायडू के पास अपने बहुत सारे खट्टे मीठे अनुभव है।  आकाशवाणी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में नूपुर क्रंदन और कत्थक नृत्य की रायगढ़ शैली पर प्रसारित रेडियो रूपक के पुरस्कृत होने को वह अपनी इस यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानती हैं। 

तेजी से बदलती जा रही टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन के बहुत से माध्यमों के बावजूद आज भी आकाशवाणी दूरदर्शन की अपनी पहचान अपनी साख है। यह वह माध्यम है जिसने हमारे देश के किसान, मजदूर , युवा से लेकर कला साहित्य, संस्कृति, संगीत की ना जाने कितनी प्रतिभाओं को मंच दिया ।

जनधारा 24 के विशेष कार्यक्रम वीमेंस वेडनेसडे  में एस पद्मजा ने अपने विचार  साझा किये । अपने बारे में वे बताती हैं कि ऐसे  तो काफी लम्बा वक्त गुजर गया लेकिन इसकी जो नींव पड़ी थी या बीज जो पड़ा था ये सबसे पहले पड़ा था जब हम छोटे थे हम सब भाई बहन सुबह की न्यूज़ सुनकर  ही उठा करते थे उस वक्त जो समय संचार के माध्यम इतने नहीं थे और रेडियो का बहुत अधिक महत्व था।  तो रेडियो की न्यूज़ बहुत अधिक महत्व था आज भी है। लेकिन हम जो उठा करते थे सुबह की न्यूज़ सुनकर ही उठा करते थे और बचपन से ही मेरे दिमाग में था की मुझे रेडियो में ही काम करना है और इत्तेफाक से ऐसा मौका भी मुझे मिल गया  और मेरी नौकरी रेडियों में ही लग गई और तब से लेकर आज तक सन 1985 से लेकर आज तक मुझे पुरे 36 वर्ष हो चुके है आकाशवाणी में कार्य करते हुएऔर  इसके पहले भी जब मैं स्नातक डिग्री ले चुकी थी  और अपने रूचि के कारण नैमत्तिक जिसे अंग्रेजी में  कैज़ुअल  कहा जाता है  एक कैज़ुअल के रूप में  भी कार्य करती थी और में कार्यक्रम किया करती थी। 


एस पदमजा कहती हैं कि काम में तो बहुत ज्यादा अंतर है।  हमको बाहर से जो दिखाई देता है , जो कुछ सुनाई देता है ,  लेकिन जब वास्तव में उस जगह जाकर हम काम करते है तो समझ में आता है की ये सब इतना आसान नहीं है। एक तो ये है की आकाशवाणी में एक एक सेकंड  का महत्व होता है आपको ध्यान रखना होता है. दूसरा ये ध्यान रखना होता है की लाखों आपके श्रोता  है एक  जो अंतिम व्यक्ति है उस तक आपका  कार्यक्रम पहुँच रहा है तो आपकी भाषा  शुद्ध होनी चाहिए और जो भषा आप बोल रहे  है शुद्धता का मतलब ये नहीं है  की आपको अपना पांडित्य दिखाना है। मतलब  ये है की एक पढ़े लिखे व्यक्ति के साथ ही साथ जो व्यक्ति  अनपढ़ है होटल में कप प्लेट धो रहा है हमारा श्रोता तो वो भी है उसको आपका कार्यक्रम पसंद आना चाहिए। उसको भी आपकी बात पूरी तरह समझ में आणि चाहिए। उस रूप में जिस रूप में आप समझाना चाहते है। और दूसरी सबसे बड़ी बात है ये एक ऐसे जगह होती है अब तो संचार के बहुत सारे माध्यम आ गए है और कॉम्पिटिशन  भी है सभी अच्छा ही करना चाहते है  तो इस बात का बहुत ध्यान देना पड़ता था की मुझे बहुत अच्छा करना है.  और वो बहुत स्वस्थ्य प्रतियोगिता होती थी  और  वो जो कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहा है वो लोगों को पसंद आये बहुत उसको सराहये इस तरह की बाटे हुआ करती थी।  


उन्होंने कहा कि जहाँ तक समस्यों की  बात है ये समस्या बहुत छोटी होती है।  समस्या तब आती है जब आपने कुछ ऐसा वाक्य कह दिया जिसके अर्थ दो तरह से  निकल सकते है.  श्रोता उसका क्या अर्थ ग्रहण कर रहा है। इस बात को आपको बहुत ध्यान रखना पड़ता है। काफी चेलेंज होता है यहाँ पर  दूसरी  कई आपात स्थिति होती है कई बार  किसी  बड़े सम्मानीय व्यक्ति का निधन हो गया  आपको इस बात का बिलकुल ध्यान रखना पड़ता है की आपका प्रसारण कैसा होगा।  इसके अलावा  बहुत सारी  तिथियां होती है बहुत सारे पर्व होते है राखी  का दिन है और आपने दिया जलाओं गाना बजा दिया अगर तो किसको अच्छा लगेगा समसामियाकता का भी इतना ध्यान रखना पड़ता है और समस्याओं का सवाल है तो समस्याएं तो आएँगी ही और इसका जो स्वरुप है वो बदला हुआ सा होता है।  

 आकाशवाणी  में हर वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम  किये जाते है जैसे एक कार्यक्रम है युववाणी।  हिंदी और उर्दू अंग्रेजी भाषा का मिलीजुली शब्द  लोग प्रयोग करके प्रोग्राम करते है।  लेकिन आज भी आकाशवाणी में  आज भी शुद्धता का ध्यान रखा जा रहा है।  आयु के अनुसार उस वर्ग की जरुरत के अनुसार  भाषा में सरलता के साथ प्रोग्राम प्रस्तुत करते है।