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पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर, शहीद ललित दिवान को किया गया याद

पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर, शहीद ललित दिवान को किया गया याद


शहीद स्मारक में ऐसा क्या देखा कि परिवार वाले हुए आक्रोशत हुआ

किसन लाल विस्वकर्मा

मगरलोड, 21 अक्टूबर। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 21अक्टूबर दिन बुधवार को प्राथमिक शाला नारधा में स्थित शहीद ललित दिवान के स्मारक पर शहीद के परिवार वाले,पुलिस विभाग मगरलोड द्वारा,स्कूली छोटे-छोटे बच्चो एवं  ग्रामीणों के द्वारा शहीद ललित दिवान के प्रतिमा पर नमःआँखों से सम्मान देते हुए पुष्प हार पहना कर,चंदन पुष्प समर्पित कर, ललित दिवान अमर रहे जय घोष के साथ याद किया गया।

 विकास खण्ड मगरलोड के पैरी नदी किनारे बसे एक छोटे ग्राम नारधा में शहीद ललित दीवान का जन्म 5 सितम्बर 1979 को हुआ था।शहीद ललित दीवान 2भाई एवं दो बहन हुआ करता था।जिसमें ललित दिवान भाईयों में छोटा एवं दोनो बहनों से बड़ा था।शहीद ललित दीवान की पूरा पढ़ाई लिखाई रायपुर शहर में हुआ था। बचपन से ही वह फौजी में जाकर  अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा देखता था।आखिर वर्ष 2005-6 को जगदलपुर में फौज में भर्ती हो गया।जिसके बाद वह 10माह तक माना केम्प में फौज की ट्रेनिंग लिया और शहीद ललित दीवान की पहली पोस्टिंग कोंडागांव से लगभग 35किलोमीटर दूर मर्दापाल में हुआ था। शहीद ललित दीवान की नौकरी में लगे मात्र 1 वर्ष 6 माह हुआ था और डिवटी करते मात्र 6माह ही हुआ और मर्दापाल के खुदूर पहाड़ में सर्चिंग के दौरान नक्सलियों से लोहा लेते हुए 28मई 2007को शहादत को प्राप्त कर लिया। ललित दिवान की शहादत की जानकारी जैसे ही गाँव वालों को हुई तो एक तरफ पूरा गांव में मातम छा गयी, तो वही दूसरी तरफ गाँव बेटा को वीरगति को पाकर ग्रामीण गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।


शहीद के परिजनों की व्यथा

 शहीद ललित दिवान की माँ ने रो - रो कर बिलखते हुए कहा की मेरे बेटा शहीद ललित दीवान के स्मारक का कोई साफ-सफाई करने वाला नही है और न ही उनकी प्रतिमा की कोई देख-रेख करने वाला नही है.स्मारक में बने प्रतिमा को जब उनकी बहन राखी बांधने जाती है ,तो स्मारक की अव्यवस्था को देखते हुए रो पड़ती है,स्मारक में लगे पेंट उखड़ने लगा है,शहीद के परिवारों द्वारा इस व्यथा को कई नेताओं को बताते रहे,लेकिन किसी ने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देने वाले शहीद ललित दिवान के स्मारक को किसी ने मुड़कर नहीं देखा। 14अगस्त को जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीषा ठाकुर जब इस शहीद परिवारों से मिलने पहुँचे तो उनके द्वारा आश्वासन दिया की इस स्मारक को बहुत ही जल्द रंग- रोगन किया जायेगा लेकिन महीनों बीत जाने बाद भी पुलिस प्रशासन द्वारा बिलखती हुई शहीद परिवारों की आँसू को पोछ नहीं सका,उनके परिजनों की एक छोटी सी मांग को पूरा करने में प्रशासन  कमजोर दिख रहा है।

शहीद दिवस पर भी प्रशासन द्वारा शहीद ललित दीवान  के स्मारक की रंग-रोगन नहीं किया जाने की बात सामने आयी है। शहीद दिवस मनाने के कुछ ही समय पहले ही स्मारक को पानी से सिर्फ धो दिया गया। शहीद दिवस के मौके पर शहीद की माता,उनकी बहन-दमाद,उनका भांजा-भांजी, बहुत से ग्रामीण एवं मगरलोड थाना से पुलिस वाले रहे।