आरक्षक ने सब इंस्पेक्टर को पीटा, एसटीएससी के तहत जुर्म दर्ज, मामला पुलिस दूरसंचार केन्द्र नारायणपुर का, बड़े अधिकारियों ने चुप्पी साधी

आरक्षक ने सब इंस्पेक्टर को पीटा, एसटीएससी के तहत जुर्म दर्ज, मामला पुलिस दूरसंचार केन्द्र नारायणपुर का, बड़े अधिकारियों ने चुप्पी साधी

जनधारा समाचार
रायपुर. पुलिस दूरसंचार केन्द्र नारायणपुर में पदस्थ एक आरक्षक ने अपने साहब यानि उप निरीक्षक और उनके सहयोगी की पिटाई कर दी जिसके बाद अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के तहत पीड़ित ने धारा 294,332,506,353,186 के तहत एफआईआर दर्ज कराई है. विवाद में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है. मामला अवैध टीए बिल को पास करने से जुड़ा बताया जाता है. मामले की सूचना विशेष न्यायाधीश एट्रोसिटी कोण्डागांव को दे दी गई है.


दूसरी ओर इस विभागीय घमासान के बीच सीनियर पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है. कई लोगों से फोन पर संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने रिसीव नही किया और इसे मुददे पर बातचीत करने से बचते रहे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घटना परसों 21 सितम्बर को दोपहर 11 बजे की है. पुलिस अधीक्षक कार्यालय कंट्रोल रूम दूरसंचार शाखा की है. यहां तैनात उप निरीक्षक बलवंत सिंह वर्धन एवं सहायक उप निरीक्षक नरेन्द्र कुमार साहू से कार्यालय में ही पदस्थ आरक्षक प्रेमसागर गुप्ता से टीए बिल को लेकर विवाद हो गया. पीड़ितों का आरोप है कि हाल ही में ट्रांसफर हुए गुप्ता पेट्रोल बिल लेकर आए थे और वे इसे पास करने पर दबाव डाल रहे थे लेकिन टीए में जो राशि जोड़ी गई थी, वह संदेहास्पद थी इसलिए वर्धन ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया.

इसके बाद गुप्ता आगबबूला हो गए और जातिसूचक गाली देने लग गए. जब दोनों अधिकारियों ने उन्हें मना किया तो वे जूता उतारकर मारने दौड़े. इसी बीच अन्य पुलिस कर्मियों ने उनका बचाव करना चाहा तो उन्हें भी घसीट घसीटकर मारा. आरोपी गुप्ता छसबल की 16वीं वाहिनी में आरक्षक के तौर पर कार्यरत है. एफआईआर के अनुसार गुप्ता ने जातिसूचक गालियां दीं जिससे उन्हें मानसिक प्रताड़ना हुई है.

गृह मंत्री तक पहुंचा विवाद, कई मामले और हो चुके हैं

यह विवाद गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू और पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंचा है लेकिन कोई कार्रवाई की उम्मीद नही है. पुलिस के दूरसंचार विभाग में आए दिन विवाद होते रहे हैं हालांकि वे दबा दिए जाते हैं. चंद महीनों पहले ही एक एसपी स्तर के अफसर ने रायपुर में पदस्थ टीआई को सबके सामने बेइज्जत किया था तथा जोरदार विवाद भी हुआ था. विभाग में आये बजट को लेकर बड़े अधिकारी छोटे अधिकारियों पर गलत तरीके से खर्च करने पर दबाव डालते हैं लेकिन ईमानदार अफसर नही करना चाहते जिसे लेकर वे टारगेट में रहते आए हैं. भ्रष्ट अफसर 25—30 साल से इसी विभाग में पदस्थ हैं, उनके भी ट्रांसफर नही होते जिसके कारण भ्रष्ट अफसरों ने एक नेक्सस बना लिया है जो ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अफसरों को काम ही नही करने देते और उन्हें परेशान करते हैं.