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मुख्यमंत्री को पता ही नहीं चला कि कब सुहागन हुए और कब विधवा भी हो गये

मुख्यमंत्री को पता ही नहीं चला कि कब सुहागन हुए और कब विधवा भी हो गये

नैनीताल . कांग्रेस नेता हरीश रावत ने रविवार को राज्य में तीन मुख्यमंत्री बदलने जाने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोला और कहा कि उनके एक मुख्यमंत्री को पता ही नहीं चला कि वह कब सुहागन हुए और कब विधवा भी हो गये। उनका इशारा पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की ओर था।

 रावत ने सोशल मीडिया पर पहली बार जनता को संबोधित करते हुए भाजपा पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि तीन -तीन मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद भाजपा नेतृत्व में परिपक्वता, अनुभव और सोच की कमी है। उन्होंने इस दौरान मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी जोरदार हमला बोला और कहा कि उत्तराखंड के 21 साल के दशक में यह कालखंड सबसे अधिक भ्रष्टाचार के रूप में जाना जायेगा। उन्होंने कहा कि श्री धामी के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रदेश की नदियों तथा गाड़-गेधेरों में सबसे अधिक खनन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में खनन में प्रति कुंतल पांच रूपये की हिस्सेदारी मुख्यमंत्री की थी।

उन्होंने कहा कि कुंभ घोटाले के कारण देश को बदनामी झेलनी पड़ी है। स्थानांतरण तथा पोस्टिंग में भ्रष्टाचार की बू आती रही है। प्रदेश सचिवालय भी भ्रष्टाचार से अछूता नहीं रहा और उससे भी भ्रष्टाचार की बदबू आती रही है। नौकरी देने के नाम पर पैसा वसूला गया है। उन्होंने कहा कि वह आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि सत्यता बता रहे हैं।

उन्होंने लोगों से कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में परिपक्वता है। एक ओर जहां हरीश रावत, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, गणेश गोदियाल, प्रदीप टमटा तथा किशोर उपाध्याय जैसे अनुभवी नेता हैं। वहीं भाजपा में अपरिपक्वता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासनकाल में बेरोजगारी तथा महंगाई बेतहाशा बढ़ी है, तो प्रति व्यक्ति औसत आय तथा राजस्व वृद्धि दर घटी है। भाजपा शासन काल में कांग्रेसनीत योजनाओं को बंद कर दिया गया।

उन्होंने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया और कहा कि महंगाई के चलते चूल्हे में आग लग गयी। गैस सिलंेडर 1000 के पार चला गया व सरसों का तेल का भाव देश में 200 रूपये पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह सब पैसा मोदी जी के करीबी अंबानी तथा अडानी के जेब में गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब भाजपा को लगा कि सत्ता हाथ से निकल रही हैं तो प्रदेश में मुख्यमंत्री बदलने का खेल खेला गया। जनता पर तीन-तीन मुख्यमंत्री थोपे गये। भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने विवादित बोल भी बोले और कहा कि दूसरे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को तो पता ही नहीं चला कि वह कब सुहागन हुए और कब विधवा भी हो गये।

उन्होंने कहा कि केदारनाथ आपदा के बाद उन्होंने प्रदेश में तेजी से काम किया और चारधाम के पर्यटन को पटरी पर लाये। यही कारण है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था डगमगायी नहीं लेकिन भाजपा शासन में विकास के मामले में त्रासदी देखने को मिली। डबल इंजन के नाम पर प्रदेश की जनता को छला गया है। उन्होंने जनता से अपील की कि उत्तराखंड व उत्तराखंडियत को बचाना है तो कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाना होगा।