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थधड़ी' पर्व पर सिंधी समाज के घर-घर होगी शीतला माता की पूजा, 27 अगस्त को भोजन बनेगा और 28 को लगाएंगे भोग, घरों में नहीं जलेगा चूल्हे

थधड़ी' पर्व पर सिंधी समाज के घर-घर होगी शीतला माता की पूजा, 27 अगस्त को भोजन बनेगा और 28 को लगाएंगे भोग, घरों में नहीं जलेगा चूल्हे

जगदलपुर- सिंधी समाज त्यौहार थधड़ी में शीतलामाता की पूजा करके पूरे परिवार के लोग उस दिन ठंडा भोजन ही ग्रहण करेंगे। पूजा वाले दिन किसी घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। सिंधी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष लीलाराम नागवानी ने बताया 'थधड़ी' का अर्थ ठंडा और शीतलता होता है। सिंधी समाज सदस्यों द्वारा परिवार की सुख, शांति और निरोगी काया की मन्नत मांगते हुए माता शीतला की पूजा की जाती है।

समाज के सचिव मनीष मूलचंदानी ने बताया थधड़ी पर्व रक्षाबंधन के आठवें दिन सिंधी समुदाय हर्षोल्लास से मनाता है, थधड़ी पूजा में घर के छोटे बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया जाता है ..और मां का स्तुति गान कर उनके लिए दुआ मांगी जाती है ..कि वे शीतल रहें व माता के प्रकोप से बचे रहें.. इस दौरान ये पंक्तियां गाई जाती हैं  ..

ठार माता ठार पहिंजे बचिणन खे ठार..

माता अगे॒ भी ठारियो थई हाणे भी ठार...


सिंधी पंचायत के पूर्व सचिव सुरेश पोटानी ने जानकारी दी थधड़ी के लिये भोजन बनता है यह शीतला माता को अर्पित किए जाने वाले व्यंजनों में आटा, बेसन की मीठी और नमकीन रोटी, धुली मूंग दाल की रोटी, पूड़ी, सब्जियों में करेला, भाटा, भिंडी, परवल, दही बड़ा, दही रायता, प्याज का रसदार अचार, मीठा आदि व्यंजन बनाए जाते है

शनिवार को सुबह से रात तक विविध व्यंजन बनाने के बाद रविवार को सुबह महिलाएं तालाब, कुआं के किनारे शीतला मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। पूजा करके अपने साथ जल लाएंगी और घर में छिड़काव करके सभी की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करेंगी। जल को रसोई घर समेत पूरे में शीतला माता का जाप करते हुए 'ठार माता ठार पंहिजें बचिणन खे ठार' कहते हुए प्रार्थना करेंगी। इसका अर्थ होता है कि हे मातारानी, हमारे पूरे परिवार पर कृपा बनाए रखना। ऐसी मान्यता है कि थधड़ी के दिन चूल्हा, सिलेंडर को नहीं जलाया जाता। अग्निदेव और शीतला माता के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।