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लिपिकों ने वेतन विसंगति की अपनी जायज मांग को लेकर हर तरह का प्रयास करने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन करने का संकल्प लिया

लिपिकों ने वेतन विसंगति की अपनी जायज मांग को लेकर हर तरह का प्रयास करने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन करने का संकल्प लिया

खरसिया। पिछले चार दशकों से वेतन विसंगति की पीड़ा झेल रहे लिपिक वर्ग के कर्मचारी अब अपने इस मांग को पूरा कराने के लिए पुनः सक्रिय हो गए हैं और लिपिकों ने अब इसके लिए आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अपनी इस जायज मांग के लिए लिपिक साथी संगठित होने लगे हैं और इसका एक नज़ारा 9 अगस्त को खरसिया में आयोजित छत्तीसगढ़ लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के जिला स्तरीय सम्मेलन में देखने को मिला जहां संघ के जिला अध्यक्ष, प्रदेश व जिला पदाधिकारियों की उपस्थिति में तहसील शाखा खरसिया, पुसौर सहित जिला मुख्यालय के 150 से भी अधिक साथियों ने भाग लेकर वेतन विसंगति दूर कराने के लिए पूरी ताकत के साथ संघर्ष करने का संकल्प लिया। विशेष बात यह रही कि यहाँ महिलाओं की उपस्थिति भी बहुत अधिक संख्या में रही।


गौरतलब है कि लिपिक वर्ग के कर्मचारी वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर पिछले काफी समय से प्रयासरत हैं। 4 दशक पूर्व लिपिकों और शिक्षक संवर्ग का वेतनमान समान था परंतु समय समय पर गठित होने वाले विभिन्न वेतनमान आयोगों के द्वारा लिपिकों के साथ अन्याय करते हुए दूसरे संवर्ग का वेतन तो बढ़ाया पर लिपिक संवर्ग के वेतन में इजाफा नहीं किया गया जिससे उनका वेतन लगातार कम होता गया। आज स्थिति यह है कि लिपिक संवर्ग और शिक्षक संवर्ग के वेतन में काफी अंतर आ गया है। यहां तक कि नव सृजित पड़ डाटा एंट्री ऑपरेटर का वेतन भी सहायक ग्रेड 3 से अधिक है। इस स्थिति में लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। समय समय पर वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर लिपिक संगठनों द्वारा आंदोलन किया गया है परंतु अब तक उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है जिससे अल्प वेतन में गुजारा कर रहे लिपिकों में भारी रोष देखा जा रहा है।


अपने इसी एक सूत्रीय मांग को लेकर छत्तीसगढ़ लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ पंजीयन क्रमांक 79/2000 द्वारा एक बार फिर आंदोलन करने का मन बनाया गया है। इसी के तहत पहली कड़ी में 11 अगस्त को प्रदेश के सभी तहसील और जिला मुख्यालयों में भोजनावकाश के दौरान संघ के पदाधिकारी और सदस्यगण प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौपेंगे जिसमें वेतन विसंगति दूर करने की मांग प्रमुखता से की गई है। इसी को सफल बनाने के लिए रायगढ़ जिला इकाई द्वारा पूरे जिले के लिपिकों को संगठित करने के उद्देश्य से अलग अलग तहसीलों में बैठक सह सम्मेलन आयोजित कर लिपिकों को एकता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में घरघोड़ा में तमनार, लैलूंगा, घरघोड़ा के साथियों की, सारंगढ़ में बरमकेला और सारंगढ़ के साथियों की बैठक के बाद 9 अगस्त को खरसिया में जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें तहसील शाखा खरसिया और पुसौर सहित जिला मुख्यालय के लिपिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।


छत्तीसगढ़ लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष मनोज पाण्डेय के मुख्य आतिथ्य, प्रदेश पदाधिकारी डॉ माधुरी त्रिपाठी की अध्यक्षता और राजस्व विभाग के जुझारू साथी गोविंद प्रधान, जिला कार्यालय के अधीक्षक मेहर जी, वरिष्ठ लिपिक सुरेंद्र पंडा, श्रीमती जानकी यादव, श्रीमती श्रीवास्तव मैडम, अक्षय पटेल आदि की विशेष उपस्थिति में आयोजित उक्त सम्मेलन का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित कर किया गया। अतिथियों के स्वागत उपरांत सर्वप्रथम तहसील शाखा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम दर्शन ने स्वागत भाषण दिया। इसके पश्चात रामखिलावन महिपाल, श्रीमती जागेश्वरी रात्रे, रवि यादव (पुसौर), राजा राजपूत, डीकाराम शेष, श्रीमती जानकी यादव ने अपने विचार रखे। 


इसी क्रम में सुश्री माधुरी त्रिपाठी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए खरसिया के साथियों के उत्साह की तारीफ करते हुए उन्हें अपनी एकता हमेशा इसी तरह बनाये रखने की बात कही। इसी तरह सम्मेलन को युवा, जुझारू कर्मचारी नेता, राजस्व विभाग के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद प्रधान ने अपने ओजस्वी अंदाज में सम्बोधित करते हुए कहा कि आज खरसिया के साथियों ने एक नया इतिहास रचा है। तहसील स्तर की बैठक में इतनी अधिक संख्याबल कभी देखने को नहीं मिला था पर आज आप लोग जिस उत्साह के साथ यहाँ उपस्थित हुए हैं इससे साथ होता है कि अब लिपिक अपने अधिकारों के लिए जागरूक हो गए हैं और अब इस चट्टानी एकता के समक्ष सरकार को झुकना ही पड़ेगा। उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखते हुए विशेषकर नये लिपिक साथियों में ऊर्जा का संचार किया। अंत में जिला शाखा के संघर्षशील अध्यक्ष मनोज पाण्डेय ने लिपिकों को सम्बोधित करते हुए वेतन विसंगति के बारे में और उसको लेकर अब तक अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किये गए आंदोलनों के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसी भी आंदोलन से हमें कोई आर्थिक लाभ नहीं हो पाया और पिछले आंदोलन में भी हमें कम्प्यूटर प्रोत्साहन भत्ता का झुनझुना थमा दिया गया। इसमें भी शासन ने दोहरा मापदंड अपनाया है क्योंकि शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों को उनके संघर्ष के दम पर मिलने वाले गतिरोध भत्ता के लिए उन्हें कोई परीक्षा पास नहीं करना पड़ता मगर कम्प्यूटर प्रोत्साहन भत्ता के रूप में हर माह 500 रुपये उसी लिपिक को मिलेगा जो कौशल परीक्षा पास करना जरूरी होता है। इस तरह हमेशा से लिपिकों के साथ भेदभाव किया जाता है जबकि सबसे अधिक काम हम लोगों से ही लिया जाता है। उन्होंने भी खरसिया के साथियों की एकता पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए आने वाले समय में भी इसी तरह एकजुट रहने की बात कही।आभार प्रदर्शन तहसील शाखा के संरक्षक श्यामलाल यादव ने किया और कार्यक्रम का सफल संचालन लिपिक प्रवीण चतुर्वेदी ने किया।


अंत में सभी उपस्थित लिपिकों ने वेतन विसंगति की अपनी जायज मांग को लेकर हर तरह का प्रयास करने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन तक करने का संकल्प लिया।

इस दौरान जिला शाखा से सुरेश लक्ष्मे, श्री जायसवाल जी, श्री अनिल जी, नीतीश पुरसेठ, अमित श्रीवास्तव, रोशनलाल बिंद, बालकृष्ण यादव सहित महिला कर्मचारियों का पूरा जत्था, खरसिया से संघ के पदाधिकारी रुद्र कुमार पटेल, रामखिलावन राठौर, शिवशंकर कुशवाह, कीर्तनलाल सागर, राजेन्द्र राठौर, श्याम सुंदर पटेल, प्रहलाद सिंह सिदार, खिलावन बंजारे, गनपत डनसेना, उपेंद्र पटेल, कु बबिता देवांगन, सहोद्रा जायसवाल, सरिता आर्मो, सरस्वती वर्मा, दिगम्बर पटेल, ठाकुर रामपटेल, नंदलाल डनसेना, भागवत सिदार, मधुसुदन पटेल, चंद्रभान पटैल, रथराम राठिया, गौरीशंकर पटेल, लहरे, विष्णु यादव, राम कुमार डनसेना, गुरुचरण जायसवाल, श्री साहू तिउर, ओम प्रकाश नवरत्न, महावीर राठिया, परखित डनसेना, विक्रम बघेल सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 150 लिपिक साथी उपस्थित थे।

*मातृशक्तियों ने दिखाया दम*

खरसिया में आयोजित जिला स्तरीय सम्मेलन की सबसे खास बात यह रही है इसमें तहसील शाखा खरसिया सहित जिला कार्यालय में कार्यरत महिला लिपिकों ने उत्साह और उमंग के साथ बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। वे जनपद के सभा कक्ष में आयोजित सम्मेलन के दौरान बिजली बंद हो जाने और बारिश होने के कारण उमस भरे माहौल में भी लगातार घण्टों बैठे रहे। उनकी उपस्थिति से लिपिक साथियों को काफी बल मिला और इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि इस बार वेतन विसंगति दूर कराने के लिए मातृशक्तियों ने भी कमर कस लिया है और उनके मार्गदर्शन में इस बार लिपिकों को सफलता जरूर मिलेगी।