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अंगदान महादान, विश्व अंगदान दिवस 13 को

अंगदान महादान, विश्व अंगदान दिवस 13 को

छत्तीसगढ़ में लिवर सिरोसिस बाइलिएरी आट्रेसिया एवं विल्सन डिजीज के मामले सर्वाधिक 

रायपुर । पुराणों में एवं धर्मशास्त्रों में दानों में महादान अंगदान को माना गया है। मृत्यु के द्वार में जाते मरीज को बचाना सबसे महत्वपूर्ण होता है ऐसी स्थिति में शरीर में अंग प्रत्यारोपण के समय करीबी परिजनों द्वारा अंगदान किया जाना अतिमहत्वपूर्ण है। उक्ताशय की जानकारी एक निजी होटल में आयोजित पत्रकारवार्ता में फोर्टिस हॉस्पिटल मुंबई के सलाहकार लीवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी सर्जन डॉ. स्वप्रिल शर्मा ने दी। शर्मा ने पत्रकारवार्ता में बताया कि 13 अगस्त को प्रतिवर्ष विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। भारत में अंगदान की दिशा में प्रगति हुई है। कोविड-19 वायरस कोरोना के कारण बीच के समय में अंग प्रत्यारोपण का कार्य बाधित हुआ। 

छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी रायपुर निवासी डॉ. शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वयस्कों में अल्कोहल और एनएचए से संबंधित लीवर सिरोसिस बच्चों में बाइलिएरी आट्रेसिया एवं विल्सन डिजीज के मामले सर्वाधिक हैं। स्थितियों का प्रारंभिक चरण में पता नहीं लगता है तो लीवर ट्रांसप्लाट जिंदा रहने के आवश्यक हो जाता है। 

डॉ. शर्मा ने बताया कि ट्रांसप्लांट दो तरह का होता है, एक तो सीधा मरीज का परिजन लाईव डोनेट करता है दूसरा कैडवेरिक प्रणाली से अंगदान किया जाता है।  आईसीसीयू में भर्ती ऐसे मरीज जो ब्रेनडेड होते हैं। उनके अच्छे स्वच्छ आर्गन यथा किडनी, लीवर, हार्ट एवं शरीर के अन्य अंगों का उक्त प्रणाली से प्रत्यारोपण किया जाता है। डॉ. शर्मा ने पत्रकारवार्ता में बताया कि ऐसे बच्चे जिनके लीवर ट्रांसप्लांट से उन्हें नया जीवन मिला है उन मरीजों में पीयूष कुन्डू, तन्मय देवांगन, सिद्धार्थ यादव के डोनर क्रमश: पूजा कुन्डू, पूर्णिमा यादव एवं तरूण देवांगन का प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। 

डॉ. शर्मा ने बताया कि प्राय: यह सवाल पूछा जाता है कि डोनर कौन हो सकता है। डोनर मरीज का रिश्तेदार होना अनिवार्य है। डोनर की आयु 18 से 55 वर्ष होनी चाहिए। घर का सदस्य ही अंगदान करे तो बेहत्तर है। डॉ. शर्मा के अनुसार उनके मरीजों की आर्थिक दशा ठीक नहीं थी इसके बावजूद भी जनअपील एवं स्वयंसेवी संगठनों तथा फोर्टिस हॉस्पिटल  प्रबंधन मुंबई के सहयोग से बच्चों का ट्रांसप्लांट करने में उन्हें सफलता मिली । विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर वे जन जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि पीडि़त मरीज को उनके परिजनों द्वारा अधिक से अधिक अंगदान कर जीवन बचाने में सफलता मिले।