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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - नये तरह के अपराध, नये तरह की चुनौतियां

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - नये तरह के अपराध, नये तरह की चुनौतियां

-सुभाष मिश्र

नई तकनीक और सोशल मीडिया आने के बाद से समाज में नये तरह के अपराध बढ़ रहे हैं जिसमें घर के किसी कोने में बैठा सीधा-साधा सभ्य समाज का नागरिक कहलाने वाला व्यक्ति भी जानबूझकर ऐसी पोस्ट, ऐसी जानकारी वो अफवाहें फैला रहा है जिससे समाज में अनावश्यक तनाव का वातावरण निर्मित हो रहा है। समाज का पढ़ा-लिखा संपन्न तबके से जुड़े बहुत से लोग तमाम तरह की पाबंदी, रोक को दर किनार करके हुक्का बार में कानून व्यवस्था को धुँआ का छल्ले बनाकर उड़ा रहे हैं। बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते नशे के कारोबार की वारदातों के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दो दिन मैराथन बैठक कर जिलों के कलेक्टर, एसपी सहित आला अफसरों से कानून व्यवस्था के साथ ही सरकार की प्राथमिकताओं वाली योजनाओं की समीक्षा कर जरूरी हिदायतें दी। छत्तीसगढ़ में नशे की बढ़ती लत और व्यापार को सख्ती के साथ बंद कराने के लिए कठोर कार्यवाही करने को कहा। पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले गांजे की बढ़ती हुई घटना को देखते हुए उन्हें कहना पड़ा की गांजे की एक भी पत्ती छत्तीसगढ़ में नहीं आनी चाहिए। सरकार ने इसके परिवहन को रोकने के लिए छत्तीसगढ़-ओडिशा की बार्डर पर चेक पोस्ट भी तैनात करने जा रही है।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ के पुलिस अफसरों के बीच हाई लेवल मीटिंग होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए निर्देश जारी किए हैं। साथ ही सीमावर्ती चेकपोस्ट में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा गया है। गांजा तस्करी की 24 घंटे निगरानी के लिए पुलिस बल भी तैनात किए जाने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश ने प्रदेश में बढ़ रहे नशे के कारोबार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कड़े शब्दों में छत्तीसगढ़ के सभी आईजी और एसपी से कहा कि प्रदेश में नशे के कारोबार को पनपने न दिया जाए। पुलिस अधीक्षक कड़ी कार्यवाही करें। वहीं दूसरे राज्यों से आ रहे नशीले पदार्थ को प्रदेश में प्रवेश से रोकने सारे उपाय किये जाये।
ओडिशा से छत्तीसगढ़ के बस्तर व महासमुंद जिले के रास्ते दूसरे प्रदेशों में गांजा की तस्करी होती है। सबसे ज्यादा तस्कर इसी रास्ते में पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। धमतरी और बस्तर जिले में लाखों का गांजा पकड़ा गया है। पखवाड़े भर पहले ही महासमुंद जिले की पुलिस ने दो बड़ी गांजा तस्करी का खुलासा किया।

छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों की होटलों रेस्टोरेंट और ढाबे से संचालित हुक्का बारों को बंद करने के साथ ही साथ लंबे समय से एक ही थाने में जमें पुलिस वालों को हटाने के लिए भी कहा। ऐसे पुलिसजन जिनके कार्यकलापों से जनता परेशान है उन्हें भी हटाने की बात कही गई। छत्तीसगढ़ में चिटफंड कंपनियों के संचालकों को गिरफ्तार कर लोगों का पैसा वापस दिलाने के अभियान में तेजी लाने को कहा गया। शांति का टापू कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के कवर्धा, जशपुर और कोंडागांव जिले में हाल ही में हुई घटनाओं पर चिंता जाहिर कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बहुत से सवाल करते हुए उसे सुधारने की बात कही गई। पिछले कुछ महीनों में गांजा तस्करी के पचास से अधिक मामले पकड़े गये, वहीं छोटे-बड़े 135 हुक्का बारों को सूचीबद्ध करके उनके खिलाफ कार्यवाही प्रारंभ की गई। ऐसा नहीं है कि रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, दुर्ग में संचालित हुक्का बारों की और वहां चल रही संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी नजदीकी पुलिस थानों या आला अफसरों को नहीं है। हुक्का बार और देर रात तक चलने वाले सारे मयखानों के बारे में सभी को सब पता है। कोरोना काल में बंद शराब दुकानों के बावजूद बड़े पैमाने पर कहां-कहां से कितने में शराब बेची गई, ये भी सभी जानते है। दरअसल आपसी सांठगांठ और कथित रूप से पहुंच वाले लोगों के कारण पुलिस कभी-कभी दिखावे के लिए कार्यवाही करती है। हमारे पूरे वर्क कल्चर में दिखावे की संस्कृति फलफूल रही है। प्रशासनिक अमला सब कुछ जानते बुझते अंजान बनने का स्वांग रचता है। दरअसल अवैध शराब और नशे के कारोबार से लाखों रुपये का मुनाफा और उसका हिस्सा बांटवारा जुड़ा हुआ है जिसे लोग जुआ, सट्टे की तरह ही छोडऩा नहीं चाहते। हुक्का बारो में भिंड, आरेंज, चाकलेट, सीसा के नाम पर जो फ्लेवर उपलब्ध कराया जाता है, उसके साथ नशा करने वालों को उनकी पसंदे का माल भी मिल जाता है। यदि शराब की बिक्री रात दस बजे के बाद बंद है तो फिर देर रात को बड़े-बड़े होटलों, ढाबो में लगने वाली कारों की भीड़ क्या बतलाती है। दरअसल बहुत सारी जगहों पर कारोबार यानी कार में बार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। पुलिस ने राजधानी में पूर्व में करीब एक दर्जन हुक्का बार के खिलाफ कार्यवाही की किन्तु उसका प्रभाव वैसा नहीं पड़ा की बाकी हुक्का बार बंद हो जाते।

बात कलेक्टर कांफ्रेस की हो या पुलिस अधिकारियों की बैठक की हो मुख्यमंत्री बार-बार ये बताने से नहीं चुके की विकास के लिए शांति, सदभाव जरूरी है। यदि जिले के कलेक्टर, एसपी आपसी समन्वय से काम करेंगे तो, यह शांति सद्भाव की व्यवस्था कायम रहेगी। कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहते हुए असमाजिक तत्वों को सिर उठाने का मौका नहीं मिलेगा। दरअसल जहां रही भी कलेक्टर-एसपी मिलकर जिले का सघन दौरा करते हैं, लोगों से मिलकर फीडबेक लेते हैं, वहां पर बहुत सारी अवांछनीय गतिविधियों रूक जाती है। यहां सवाल यह भी है की वह कौन से कारक, ताकतें हैं जो उन्हे कानून का राज कायम करने से रोकती हैं। वे कौन लोग हैं जिनके संरक्षण में सभी तरह की अवैध गतिविधियां संचालित होती है। अवैध प्लाटिंग, अवैध उत्खनन, अवैध वन कटाई, अवैध उगाई जैसे बहुत सारे अवैध कार्यो में कौन लोग लिप्त हैं। ऐसे लोगो को चिन्हित कर नामजद करने की जरूरत है। सिस्टम में फैल रही संडाध को रोकने के लिए समूचे तालाब का पानी बदलने की जरूरत है।
दुष्यंत कुमार की गजल के  शेर है -

कैसे मंजऱ सामने आने लगे हैं,
गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।
अब तो इस तालाब का पानी बदल दो,
ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं।
वो सलीबों के कऱीब आए तो हमको,
क़ायदे-क़ानून समझाने लगे हैं।।


इस समय छत्तीसगढ़ हो या देश की बाकी राज्य सभी जगहों पर सोशल मीडिया के जरिये फैलाई जाने वाली अफवाहों, षड्यंत्रों का बाजार गर्म है। यही वजह है कि छोटी से छोटी घटना को भी कुछ लोग अलग रंग देने की कोशिश करते है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपने अधिकारियों से साफ-साफ कहना पड़ा कि सोशल मीडिया अफवाह फैलाने का सबसे बड़ा साधन बन गया है। सोशल मीडिया में भी एक सुदृढ़ सूचना तंत्र विकसित करना जरूरी है। इससे निपटने के लिए प्रशासन को हर स्तर पर थाना, अनुविभाग, जिला और रेंज लेवल पर सूचना तंत्र विकसित करना होगा। एसपी से हर जिले में सोशल मीडिया मानिटरिंग की स्पेशल टीम बनाने कहा गया है, जो सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों का चिन्हांकन कर कार्रवाही करें।

इस समय निगरानी शुदा बदमाशों और छोटे-मोटे चोरो से ज्यादा उन सफेदपोश लोगो पर नजर रखने की जरूरत है जो सिस्टम और सत्ता के नजदीक रहकर नये तरह के अपराधो में लिप्त हैं। जो जात-पात, धर्म-संस्कृति के संरक्षण के नाम पर समाज में वैमनस्यता फैला रहे हैं।