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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से तांडव को लेकर तांडव

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से तांडव को लेकर तांडव

-सुभाष मिश्र
हमारे यहां बात का बखेड़ा करना आम है और यदि वह बात धार्मिक आस्थाओं, किसी समाज की भावनाओं से जुड़ी हो तो फिर बवाल जरूरी है। अमेजन प्राईम पर एक वेब सीरीज आई है ताडंव। इस वेब सीरीज को लेकर भाजपा के कुछ नेता और बसपा की सुप्रीमो ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे हटाने, सेंसरशीप लागू करने की बात कही है। अमेजन प्राईम ने इस संबंध में बढ़ते विरोध को देखते हुए माफी मांगी है। उनका कहना है कि यह फिक्सन पर आधारित है। यदि इसमें किसी की भावना को ठेस पहुंची हो तो हम माफी मांगते हैं।  

भाजपा के मुम्बई से सांसद मनोज कोटक ने ट्विट करके तांडव को हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान बताते हुए प्रतिबंधित करने की मांग की। इसी तरह की मांग भाजपा के विधायक रामकदम तथा नेता कपिल मिश्र ने की। लखनऊ, मुम्बई सहित कुछ स्थानों पर इस वेब सीरीज के बनाने वालों के खिलाफ एफआईआर तक कर दी गई है। उत्तरप्रदेश की पुलिस कार्यवाही करने मुम्बई रवाना भी हो गई है। बहुत सारे लोगों ने इस वेब सीरीज को बिना देखे ही इसे देश और धर्म का विरोधी बताते हुए बहुसंख्यकों का अपमान, दलितों का अपमान, पुलिस अधिकारियों का अपमान, हिंसा फैलाने वाला, शंाति, सौहाद्र्र, भाईचारा के वातावरण को खराब करने वाला बताया है। चंूकि, इस फिल्म के निर्देशक अली अब्बास जफर हैं और फिल्म में सैफ अली खान, जीशान खान जैसे मुस्लिम लोगों का नाम है, इसलिए कुछ लोगों को लगता है कि यह जानबूझकर हिन्दुओं के देवी-देवताओं का अपमान करने बनाई गई है। इस वेब सीरीज के लेखक गौरव सोलंकी हैं जिन्होंने आर्टिकल 15 जैसी बेहतरीन फिल्म लिखी। गौरव सोलंकी एक संवेदनशील कवि, लेखक हंै। बहुत सारे लोग जो पहले भी ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रतिबंध, सेंसर की बात कह चुके हैं, उन्हें तांडव के बहाने फिर से इस मांग को तेज करने का अवसर मिल गया। गौरव सोलंकी लिखित यह सीरिज औसत दर्जे की है जिससे भारतीय राजनीति, छात्र राजनीति में घटी हालिया घटनाओं का कोलाज कर एक कहानी के रूप में तैयार किया गया है। अपनी बनावट में यह कोलाज थोड़ा ज्यादा चटक और थोड़ा बेरंगा हो गया है, यह एक औसत दर्जे की सीरिज है। जिसकी कहानी भी कमजोर है।

इस सीरिज में वह सब है, जो हमारी सेंसर बोर्ड से पास होने वाली बहुत सी फिल्मों में होता है। वेबसीरिज या ओटीटी प्लेटफार्म जिसके 20 करोड़ यूजर हैं, इन दिनो भारतीय दर्शकों का प्रिय प्लेटफार्म है। 40 ओटीटी प्लेटफार्म पर लोगों ने लॉगडाउन के  समय बहुत सी फिल्में, वेबसीरीज और बहुत से उम्दा कार्यक्रम देखे। जो घटिया फिल्म कार्यक्रम थे उन्हें लोगों ने खारिज कर दिया। ओटीटी प्लेटफार्म पर उपलब्ध चैनल या ऐप को खरीदकर या कहें सबक्राइब करके ही देखा जा सकता है। यह सबके लिए सहज उपलब्ध नहीं है। ओटीटी प्लेटफार्म पर फिल्में, प्रोग्राम देखने के लिए आपके पास स्मार्ट टी.वी, फोन, वाईफाई कनेक्शन चाहिए।

थोड़ी बात उस तांडव की जिससे लोगों की धार्मिक भावना आहत हुई है। दिल्ली छात्रसंघ चुनाव में एक लड़का जो कैम्पस में बिहारी होने के साथ-साथ थोड़ा लैपटिस्ट है, बहुत सारे षड्यंत्रों के चलते अपने संगठन से चुनाव नहीं लड़कर एक नई स्वतंत्र पार्टी बनाता है जिसका नाम है तांडव। मंच से इस दल से जुड़े लड़के शिव के ताडंव की मुद्रा बनाते हैं। एक अन्य दृश्य में कालेज की एक प्रोफेसर जिसका पति भी प्रोफेसर हंै, जो बहुत सी लड़कियों से संबंध रखता है उसकी पत्नी उसे छोड़कर दलित नेता के साथ रहने लगती है। राजनीति में बड़े पद पर काबिज एक विवाहित पुरूष जो दलित नेता हंै, के साथ लिव-इन-रिलेशनशीप में रहने वाली महिला का गर्भवती होना और नेता का उससे फौरी तौर से किनारा करना। इस बीच पति प्रोफेसर का दलितों को लेकर कुछ बातें कहना जो अक्सर लोग कहते हैं। बहन मायावती को यह दलितों की बेइज्जती लगती है। मायावती ने ट्वीट कर कहा, तांडव वेब सीरीज में धार्मिक और जातीय आदि भावना को आहत करने वाले कुछ दृश्यों को लेकर विरोध दर्ज किए जा रहे हैं, जिसके सम्बंध में जो भी आपत्तिजनक है उन्हें हटा दिया जाना उचित होगा, ताकि देश में कहीं भी शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे का वातावरण खराब न हो।

यह वेब सीरिज दरअसल जो कुछ हमारे आसपास घटा है, इसी की ऐसी तस्वीर है जिसे फिल्मकार कमर्शियल तड़का लगाकर बेचना चाहता है। फिल्म के लेखक गौरव सोलंकी कहते हैं कि यह सीरिज हाल की किसान विरोधी, सरकार विरोधी, छात्र विरोध की घटनाओं को छूती है। दरअसल भाजपा से जुड़े नेता इस मुद्दो पर तांडव करके देश के लोगों का ध्यान किसान आंदोलन से हटाना चाहते हैं। भाजपा सांसद मनोज कोटक ने कहा कि उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर ऐमजॉन प्राइम वीडियो की वेब सीरीज 'तांडव पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। तांडव वेब सीरिज में हिंदू देवी-देवताओं का उपहास किया गया है। इस वेब सीरिज में सैफ अली खान, डिंपल कपाडिय़ा, सुनील ग्रोवर, तिग्मांशु धूलिया, डिनो मोरिया, कुमुद मिश्रा, मोहम्मद जीशान अय्यूब, गौहर खान और कृतिका कामरा ने काम किया है। फिल्मकार अली अब्बास जफ़र ने हिमांशु किशन मेहरा के साथ मिलकर राजनीति पर आधारित इस फिल्म का निर्माण एवं निर्देशन किया है।

विधायक राम कदम ने शिव का मजाक उड़ाए जाने पर मोहम्मद जीशान अयूब से माफी की मांग भी की है। जीशान बहुत ही प्रतिभाशाली कलाकार हैं जिन्होंने एनएसडी से प्रशिक्षण लिया है। किसी फिल्म नाटक में कलाकार वही अभिनीत करता है, बोलता है जो उसे स्क्रिप्ट दी जाती है, डायलाग दिए जाते हैं। फिल्म या नाटक का डायरेक्टर उसे जैसा करने बोलता है वह वैसा अभिनय करता है। ऐसे में किसी एक्टर को दोषी ठहराया जाना उसके पुतले जलाना उसके खिलाफ एफआईआर करना मानसिक दिवालियापन का नमूना है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री मोहसिन रजा भी इसे फिल्म जगत के लोगों की घटिया करतूत बताकर जूते मारने की बात कह रहे हैं। फिल्म का विरोध जूते मारकर कैसे होता है, ये आंदोलनकारियों को और उनकी पार्टी के जिम्मेदार नेताओं को जो आपातकाल का विरोध करके अभिव्यक्ति की आजादी की वकालत करते हैं, यह बताना होगा।

हमारी धार्मिक और मिथक कथाओं में इस बात का उल्लेख है कि लंकापति रावण जो शिव का महान भक्त था, उसने शिव तांडव स्त्रोत के नाम से 1008 छंदों की रचना संगीत के साथ जब शिव को सुनाना शुरु किया तो शिव नृत्य करने लगे। रावण छंदों को सुनाते हुए कैलाश शिखर के उस स्थान पर पहुंचने लगा जहां केवल दो लोगों के लिए ही जगह थी। संगीत और काव्य के हर्षोन्माद में नाच रहे शिव को पार्वती ने आगत करते हुए बताया कि रावण उपर आ रहा है। तब शिव ने उसे पैर से धक्का दिया और कैलाश के दक्षिणी मुख से वह फिसलकर नीचे जा गिरा। भगवान शिव का शुभ तांडव नृत्य सबको सम्पन्नत प्रदान करने वाली मुद्रा का है। तांडव फिल्म में शिव की तांडव मुद्रा को प्रतीकात्मक तरीके से दिखाया गया है, जैसा कि पूरे देश में कहीं भी जब शिव की आराधना पूजा या कोई सांस्कृतिक आयोजन होते हैं तो बहुत से नृतक, साधक तांडव नृत्य की मुद्रा धारण कर नृत्य करते हैं।

दरअसल इस समय बहुत सी ताकतें देश के लोकतंत्र को, अभिव्यक्ति की आजादी को कमतर करने में, कुचलने में लगी है। जब से ओटीटी प्लेटफार्म आया है, कुछ लोग चाहते हैं कि यह सेंसर बोर्ड/रेग्युलेशन बोर्ड के अधीन आ जाए। एक साधारण फिल्म, वेब सीरिज को सोशल मीडिया पर कंट्रोवर्सियल बनाकर ट्रोल करके विवादास्पद करने वालों का मकसद कुछ और होता है। कई बार यह बिना पैसे की पब्लिसिटी के लिए भी किया जाता है। अभी हाल ही में ए सूटेबल ब्वाय, आश्रम और पाताल लोक जैसी वेबसीरिज को लेकर कंट्रोवर्सी खड़ी की गई। दरअसल हम फिल्म में भगवान शंकर के जिस तांडव नृत्य को लेकर भावना आहत होने की बात कही जा रही है, वहां भावना आहत नहीं हो रही है, करवाई जा रही है, यह एक राजनीतिक साजिश, प्रोपेगेंडा है। देश में सभी को अपनी बात कहने का हक है, जिसे किसी की बात बुरी लगती है तो उसके लिए कानून कायदे हैं। पर किसी फिल्मकार, लेखक, कलाकार को इस तरह धमकाना, जूते मारने की बात करना, समाज में भय पैदा करना कतई उचित नहीं है। किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह अच्छी बात नहीं है। लोगों ने आपातकाल में लगाई गई बंदिशों का किस तरह से जवाब दिया यह किसी को भूलना नहीं चाहिए।