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डीएमएफ की करोड़ों राशि वसूल करने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों का विकास नहीं हो पा रहा

डीएमएफ की करोड़ों राशि वसूल करने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों का विकास नहीं हो पा रहा


समस्याओं को लेकर आये दिन ग्रामीणों द्वारा विरोध व शासन के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा

भानुप्रतापपुर/कांकेर, 25 दिसंबर। कांकेर जिले में मुख्य चार खदान चल रही है  और पूर्णत: सभी आदिवासी बहुल क्षेत्र मे स्थित है । तमाम लौह अयस्क खदानों के द्वारा सिर्फ  डीएमएफ (खनिज न्यास निधि) मे अब तक करीब 200 करोड़ रुपये शासन में जमा किया हुआ है । खनिज क्षेत्रों के प्रभावित गांव का ना तो विकास हुआ और ना ही मुख्य मार्ग से खदानों तक प्रभावित गांवों से होकर सडकों का सही निर्माण हुआ। शासन प्रशासन  का खदान क्षेत्रों के प्रति  नकारात्मक रवैये से स्थानीय नागरिकों जो कि आदिवासी (schedule 5) घोषित क्षेत्र में रहवासी हैँ  को काफी  ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड रहा है और  स्थानीय नागरिकों के द्वारा  माइंस प्रबंधन को ही हमेशा जिम्मेदार ठहराया जाता है पर क्या ये शासन प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती जिन खदानों से रायल्टी और डीएमएफ की राशि वसूल करने के बाद उस प्रभावित क्षेत्रों में विकासः के साथ साथ मजबूत चौड़ी सड़कों का निर्माण करें । 


सूत्रों से पता चला है कि इन खदानों से सरकारी खाते मे कई सौ करोड़ की रायल्टी जमा किया गया है । इसके बावजूद आए दिन ग्रामीणों के द्वारा सड़कों को लेकर बंद करना और उसमें चलने वाले परिवहन कर्ता जो कर्ज में लेकर गाड़ी चला रहे हैं उनके द्वारा भी रोड टैक्स से लेकर तमाम टैक्स प्रशासन के द्वारा वसूले जाते हैं पर उन्हें भी कोई सुविधाएं नहीं देना ।


यदि रायल्टी और डीएमएफ का अंश मात्र भी इस क्षेत्र मे लगाया गया होता तो आज ये नौबत नहीं आती। शासन प्रशासन को चाहिए रायल्टी और डीएमएफ की वसूल की गई  राशि से सड़कों के अलावा अन्य सुविधाएं खदान  प्रभावित क्षेत्रों में मुहैया कराया जाये जिससे प्रभावित क्षेत्रों के आदिवासियों नागरिकों को परेशानियों का सामना करना ना पड़े और उनके साथ न्याय हो सके।