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आठ दिसंबर को भारत बंद : कृषि सुधार कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच पांचवें दौर की बातचीत शुरू

आठ दिसंबर को भारत बंद : कृषि सुधार कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच पांचवें दौर की बातचीत शुरू

नयी दिल्ली।  कृषि सुधार कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच शनिवार को पांचवे दौर की बातचीत शुरू हो गयी। इस बीच, प्रदर्शन कर रहे हजाराें किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों ने कहा है कि तीनों नये कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया गया तो आठ दिसंबर को भारत बंद किया जाएगा।

इससे पहले आज सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर किसान आंदोलन के कारण पैदा हुई स्थिति को लेकर चर्चा की।

सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों ने किसान आंदोलन के कारण पैदा हुई स्थिति से प्रधानमंत्री को अवगत कराया। यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली। इस बैठक के बाद श्री मोदी और श्री शाह के बीच एक घंटे तक एक अन्य बैठक भी हुई।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि किसान संगठनों को आंदोलन का रास्ता छोड़ कर बातचीत से समस्या का समाधान करना चाहिए । उन्होंने कहा कि भारत बंद भी किया जाता है तो बातचीत से ही रास्ता निकल सकता है।

पिछले दस दिन से राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे इस आंदोलन की सफलता को देखते हुए अन्य राज्यों में भी आन्दोलन शुरू हो गया है या राज्यों की ओर से किसानों का समर्थन किया गया है ।

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ने आज से धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की है । भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) ने भी किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन करने का ऐलान किया है ।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन को कल किसानों से मिलने भेजा था और वह करीब चार घंटे तक किसानों के साथ रहे। इस दौरान सुश्री बनर्जी ने टेलीफोन पर कई किसान नेताओं से बातचीत की और उन्हें हर तरह का समर्थन देने का आश्वासन दिया ।

दिल्ली की सीमा पर किसानों का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है और वे राष्ट्रीय राजधानी के सभी रास्तों को बंद करने की धमकी भी दे रहे हैं ।

इस बीच हरियाणा ,पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा कई अन्य राज्यों से आंदोलनकारी किसानों को खाने पीने की वस्तुओं की भरपूर मदद की जा रही है। इस आंदोलन को ट्रेड यूनियन संगठनों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों तथा कुछ अन्य लोगों का भी समर्थन मिल रहा है।