breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से कौनो ठगवा नगरिया लूटल हो

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से कौनो ठगवा नगरिया लूटल हो

-सुभाष मिश्र
कबीर का यह भजन गहरे अर्थ में जीवन मरण की सच्चाई को लेकर है। हम यहां बात कर रहे हैं नगर, गांव और समाज के सीधे-साधे लोगों को अधिक लाभ, जि़ंदगी के साथ भी जि़ंदगी के बाद भी जैसी बातों का सब्जबाग दिखाकर लूटने वालों की, बेवकूफ बनाकर धन संपदा और सपनों में सेंध लगाने वालों की।
भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटक अंघेर नगरी में एक दोहा है- लोभ पाप को मूल है, लोभ मिटावत मान, लोभ कभी नहिं कीजिए यामै नरक निदान।

आज पूरी दुनिया में मनुष्य के लोभ लालच और भविष्य की ख़ुशहाली की उम्मीद जगाकर लूटने वालों की भरमार है। अब वे रावण की तरह साधु का वेश धरकर नहीं बल्कि आप जैसे ही बनकर आपके आसपास के लोगों के साथ आते हैं। हमारे आपके बीच के बहुत से बेरोजग़ार युवक-युवती को कमिशन पर एजेंट बनाकर या नौकरी का झांसा देकर उनके ज़रिए से ये अपने लूट की योजना को अंजाम देते हैं। छत्तीसगढ़ में इन दिनों चिटफ़ंड कंपनी से लूटे लोगों का मेला सा लग रहा है, अपने पैसों की वापसी के लिए। छत्तीसगढ़ की सरकार ने चिटफंड कंपनियों की धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों को पैसा वापस दिलाने का अभियान चलाया हुआ है। धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों की संपत्ति नीलाम की जा रही है। रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, महासमुंद, बलौदाबाजार, चांपा, जांजगीर जैसे जि़लों में यह कार्यवाही कलेक्टरों के ज़रिए की जा रही है। पांच साल पहले बिलासपुर हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई इस कार्रवाई के चलते बड़े पैमाने पर निवेशक जिनका पैसा चिटफ़ंड कंपनियों में डूबा है, आवेदन करने आ रहे हैं। सरकार ने पीडि़तों की भीड़ देखते हुए आवेदन की तारीख़ 20 अगस्त तक बढ़ा दी है। अकेले छत्तीसगढ़ में कऱीब 187 चिटफंड कंपनियों ने रक़म दुगुनी करने का झांसा देकर लोगों से 60 हज़ार करोड़ वसूल कर लिए। सर्वाधिक लूट और ठगी का शिकार रायपुर जि़ले के लोग हुए हैं जिनकी संख्या डेढ़ लाख के आसपास होगी।

पश्चिम बंगाल में शारदा केस के बाद छत्तीसगढ़ का यह प्रकरण भी राजनीतिक एजेंडे में शमिल रहा। कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के अपने घोषणा-पत्र में चिटफंड  कंपनी से हुई लूट और स्थानीय मासूम एजेंटों के खिलाफ हुई कार्रवाई से न्याय दिलाने की मांग को शमिल किया था। छत्तीसगढ़ देश का संभवत: पहला ऐसा राज्य होगा जो अपने नागरिकों को चिटफंड कंपनियों द्वारा की गई लूट की रक़म वापस दिला रहा है।

हम आये दिन लूट के नये-नये तरीक़ों के बारे में पढ़ते-सुनते देखते हैं, लूट के आधुनिक तरीक़ों में साइबर क्राइम यानी इंटरनेट के ज़रिये ऑनलाईन ठगी के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जहां ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ा  दिए हैं वहीं लूट की घटनाएं भी बढ़ी है। बैंकों के साथ मिलकर देश की अकूत संपदा को लूटने वाले नीरव मोदी, माल चौकसी, विजय माल्याओं से देश भरा पड़ा है। छोटे -छोटे हितग्राहियों से कुर्की, नीलामी और तरह-तरह के दबावों के ज़रिए पैसे वसूलने वाले बैंकर बड़े रसूखदार लोगों के मामले में बहुत लचीले साबित होते हैं। सहारा ने कितनों को बेसहारा किया आज तक इसके आंकड़े ही इकट्ठे किये जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शीर्ष अधिकारियों को चिटफंड कंपनियों द्वारा ठगे गए निवेशकों के पैसे की शीघ्र वसूली सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की एक समिति गठित करने तथा चिटफंड कंपनियों के खिलाफ साप्ताहिक समयबद्ध बैठक कर कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में चिटफंड कंपनी का मुद्दा भी काफी गहराया हुआ है।  छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे पूर्व सांसद अभिषेक सिंह पर कथित चिटफंड घोटाले के सिलसिले में मामला दर्ज किया जा चुका है। इसके अलावा भाजपा के पूर्व सांसद मधुसूदन यादव सहित 19 अन्य के खिलाफ राज्य के सरगुजा जिले में एक कथित चिटफंड घोटाले के सिलसिले में धोखाधड़ी के आरोप में अदालत के निर्देश पर सभी 20 आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करना) और 34 (सामान्य इरादा) और छत्तीसगढ़ जमाकर्ता ब्याज संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत मामला दर्ज किया गया था।  आईजी ने कहा कि सभी मामलों की एक विशेष टीम द्वारा केंद्रीकृत तरीके से जांच की जाएगी।  अभिषेक का कहना है कि मेरा कंपनी के साथ कभी कोई संबंध नहीं था। मामला अदालत में खड़ा नहीं होगा। सपनों के सौदागर अलग-अलग घोड़ों पर सवार होकर जब लूटने निकलते हैं तो वे अपने साथ उन चेहरों को जरुर रखते हैं जिन्हें स्थानीय जन चिन्हते हैं। स्थानीय लोगों की साख और भरोसे को भुनाने के इस खेल में कब कौन इस्तेमाल हो जाता है, पता नहीं नहीं चलता। इधर के सालों में बहुत से छोटे-छोटे बैंक, पैसा जमा कराकर उन्हें दुगुना करने वाली कंपनियों ने लाखों लोगों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है।

गीतंजलि जेम्स और भारत में दूसरे मशहूर हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इस घटना के कुछ दिन बाद ही चोकसी देश से फरार हो गया था। मामले की जांच के बाद चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी के कथित मिलीभगत की बात सामने आई थी। इसके बाद से ही सीबीआई मामले की जांच कर उसे वापस भारत लाने की कोशिश कर रही है। एक ओर जहा बड़े-बड़े उद्योगपति, रईसजादे, बैंकों से मिलकर करोड़ों रुपए का चूना लगाने में तूले हुए हैं वहीं पिछले 25 वर्षों में हमारे देश में 2,00,000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। ऋणग्रस्तता या दिवालियापन किसानों की आत्महत्या का सबसे बड़ा घटक कारक (लगभग 40 प्रतिशत) है। इस 40 प्रतिशत में से लगभग 80 प्रतिशत ने बैंकों और सूक्ष्म-वित्त संस्थानों सहित ऋण के संस्थागत स्रोतों से अपने ऋण का लाभ उठाया।

वित्तीय संस्थान किसानों को व्यक्तिगत ऋण और कृषि ऋण के रूप में ऋण देते हैं। ऋण पर चूक एक नागरिक अपराध है। इसलिए, ऋणदाता केवल अपने बकाये की वसूली के लिए नागरिक प्रवर्तन तंत्र का उपयोग कर सकते हैं। भारतीय कानून के तहत, इन तंत्रों में देनदारों की संपत्ति की कुर्की या देनदार की नागरिक गिरफ्तारी प्राप्त करना शामिल है। 
फसल की विफलता, पारिवारिक आपात स्थिति या उपज की बिक्री से पर्याप्त राजस्व की वसूली न होने जैसी घटनाओं से एक किसान का ऋण चूक होता है। अकेले इन परिस्थितियों में समुदाय के भरण-पोषण के लिए खतरा पैदा करने की क्षमता है। जब इन कारणों से बैंकों की वसूली प्रथाओं से उत्पन्न प्रतिबंधों को जोड़ा जाता है, तो वे किसानों को किनारे कर देते हैं। दीवालियापन के कारण राष्ट्रीय आत्महत्या दर लगभग 3 प्रतिशत है, लेकिन किसानों के मामले में यह 40 प्रतिशत के करीब है। किसान देश के सबसे अनुशासित कर्जदारों में से एक हैं। उनकी डिफ़ॉल्ट दर 8 प्रतिशत पर उद्योग की डिफ़ॉल्ट दर से काफी कम है जो कि 21 प्रतिशत है। देश में अलग-अलग तरीकों से लूट का कारोबार जारी है। किसी कवि की रचना है कि- ये मेरे देश का कैरेक्टर है जो जितनी सफाई से मांगे वह उतना बड़ा एक्टर है। चिट फंड कंपनियां हो या चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता सबके पास भविष्य के सपने होते हैं।
बहरहाल, छत्तीसगढ़ के लूटे हुए लोगों के मन में उम्मीद जगी है कि उन्हें उनका पैसा वापस मिल जायेगा। कबीरदास कहते हैं कि माया महा ठगनी हम जानी। खैर मन में कबीर जैसा भाव रखकर यही सोचकर लोग खामोश हैं कि-
कौन ठगवा नगरिया लूटल हो
चन्दन काठ के बनल खटोला,
ता पर दुलहिन सूतल हो,
उठो सखी री मांग संवारो,
दूल्हा मोसे रूठल हो,
आये जमराजा पलंग चढ़ी बैठा,
नैनन अंसुआ छूटल हो,
चार जने मिल खाट उठायी,
चहुँ दिस भम उठल हो,
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
जग से नाता छूटल हो,
कौन ठगवा नगरिया लूटल हो। ।