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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - नेहरू गांधी और राजनीति

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - नेहरू गांधी और राजनीति

-सुभाष मिश्र

राजीव गांधी की जयंती कांग्रेस शसित राज्यों में बहुत ही भव्यता के साथ मनाई गई। खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलने वाली भाजपा के योगी आदित्यनाथ ने उनकी जयंती को सद्भावना दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। नेहरू परिवार की विरासत में इंदिरा गांधी के पुत्र के रूप में 20 अगस्त 1944 को जन्मे राजीव गांधी एक विजनरी नेता थे, जो साफगोई से अपनी बात कहते थे। केंद्र से भेजी जाने वाली राशि नीचे आते-आते कैसे कम हो जाती है इस सच्चाई का खुलासा जब उन्होंने ओडिशा के सूखाग्रस्त क्षेत्र के दौरे में किया था, इसे लेकर देश में बवाल मच गया। उपर से नीचे तक आंकठ भष्ट्राचार में डूबे देश के बहुत से लोग इस सच्चाई से रूबरू होते हुए भी ईमानदारी का स्वांग करते हुए इस बयान को नकारते रहे। देश को इक्किसवीं सदी में ले जाने की सोच रखने वाले राजीव गांधी सूचना तकनीक से सुशासन की बात करते थे। आज सूचना तकनीक या कहें ऑनलाइन लेन-देन से लेकर पढ़ाई-लिखाई, रोजमर्रा के कामकाज और नई-नई तकनीक और ज्ञान से हमारे देश में बहुत कुछ बदलाव है। खास करके पंचायती राज व्यवस्था के जरिए राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी कहीं न कहीं इसका श्रेय राजीव गांधी को दिया जाना चाहिए।

देश का किसान जब पिछले दस महीनो से दिल्ली की बार्डर पर आंदोलनरत है तब राजीव गांधी की यह बात भी नोट की जाने लायक है कि यदि किसान कमजोर हो जाते हैं तो देश आत्मनिर्भरता खो देता है लेकिन वे मजबूत हैं तो देश की स्वतंत्रता की मजबूत हो जाती है।

राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस शासित राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब में उनके नाम से बहुत सी योजनाएं प्रारंभ की गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि समावेशी विकास की दूरदर्शितापूर्ण सोच के साथ त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था, संचार क्रांति और युवाओं को मतदान का अधिकार जैसे निर्णय से उन्होंने 21वीं सदी के भारत की नींव रखी। देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में बागडोर संभालने वाले राजीव गांधी को भी असमय मौत के मुंह में सामना पड़ा। उनके जन्मदिन को कांग्रेस सद्भावना दिवस के रूप में मनाती है।

अभी कुछ दिनों पहले ही केंद्र सरकार ने उनके नाम का खेल रत्न पुरस्कार हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया। आजादी के पहले जो गांधी-नेहरू सांमजस्य नेतृत्व था, आजादी के बाद वह कांग्रेस के जरिये पहले जवाहर लाल नेहरू फिर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी तक पहुंचा। राजीव गांधी की हत्या के बाद इस परिवार ने देश की राजनीति को नेपथ्य में रहकर चलाना स्वीकार किया। नरसिम्हनराव, मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्री का आफिस  नेहरू-गांधी परिवार के रिमोट से ही संचालित होता रहा।

छत्तीसगढ़ की सरकार ने राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना की शुरुआत राजीव गांधी के जन्मदिन से की है। इस योजना से छत्तीसगढ़ के दस लाख भूमिहीन परिवार को 6 हजार रुपये प्रतिवर्ष दिया जायेगा। सरकार ने आज ही के दिन राजीव गांधी किसान न्याय योजना की दूसरी किश्त के रूपये में 1522 करोड़ रुपये जारी की। छत्तीसगढ़ के 20 लाख 74 हजार किसानों को 5750 करोड़ रुपये की राशि दी जानी है। पहली किश्त के रूप में 21 मई 2021 को 1526 करोड़ की राशि जारी दी जा चुकी है। इसके अलावा धान को एमएसजी पर विक्रय करने वाले किसानों को फसल बदलने या वृक्षारोपण करने पर दस हजार रुपये प्रति एकड़ की अनुदान सहायता की जा रही है। गोधन न्याय योजना के जरिये गोबर विक्रेताओं को 99 करोड़ 8 लाख रुपये की राशि, महिला स्वसहायता समूह को 18 करोड़ दस लाख रूपये की राशि और गोठान समितियों को 26.75 करोड़ रूपये की राशि जारी की गई है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने राजधानी रायपुर में दूधाधारी मठ अंतरराज्यीय बस टर्मिनल 16, एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, मल्टीलेवल पार्किंग और स्वामी आत्मनंद इंग्लिश मीडियम शहीद स्मारक स्कूल के रूप में सर्व-सुविधा युक्त शिक्षा परिषद की सौगात राजधानी वासियों को दी है।

कांग्रेस की राजनीति नेहरू-गांधी परिवार के इर्दगिर्द ही घूमती रहती है। कांग्रेस का एक धड़ा बार-बार कांग्रेस को इस परिवार से बाहर लाने की बात कहता है किन्तु कांग्रेस की मौजूदा संरचना और मानसिकता अभी ऐसी नहीं है कि वह नेहरू-गांधी परिवार से अपने को मुक्त कर सके। भाजपा के खिलाफ लामबंद्ध होता विपक्ष की इस परिवार के सम्मोहन से अपने को बाहर नहीं ला पा रहा है। यह कहती है कि कांग्रेस जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय जितनी मजबूत थी, आज उसकी स्थिति वैसी नहीं है। भाजपा-कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखती है। बार-बार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमो के जरिये गांधी-नेहरू परिवार की छवि को धूमिल करके, सोनिया गांधी को विदेशी बताकर, राहुल और प्रियंका गांधी वाडेरा को नासमझ, अपरिवक्व करार देने की कोई कसर नहीं छोड़ जाती।

छत्तीसगढ़ में देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारतरत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती सद्भावना दिवस के रूप में मनाई गई। देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में बागडोर संभालने वाले राजीव गांधी को भी असमय मौत के मुंह में सामना पड़ा। उनके जन्मदिन को कांग्रेस सद्भावना दिवस के रूप में मनाती है। राजीव गांधी के 77वें जन्मदिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आज के दिन को सद्भावना दिवस के तौर पर मनाए जाने का फैसला किया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने पिता व पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समाधि स्थल वीरभूमि पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी फेसबुक वाल पर लिखा, धर्मनिरपेक्ष भारत ही जीवित रह सकता है। सूचना क्रांति के इस दौर में राजीव गांधी के योगदान और बलिदान को देश याद रखेगा। वे इतने जल्दी लोगों के स्मृति पटल से डिलीट होने वाले नहीं हैं।