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सारकेगुड़ा की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों पर किया जावे कार्रवाई

 सारकेगुड़ा की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों पर किया जावे  कार्रवाई

हमेशा की तरह इन सभाओं में कांग्रेस-भाजपा के नेता शामिल नही होते हैं
बीजापुर ।  सारकेगुड़ा गोलीकांड के 09 वर्ष पूरे होने पर यहां आदिवासियों द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में आदिवासी एवं अन्य नेताओं का कहना है कि सुकमा जिले के सिलगेर में गोलीबारी की घटना की दण्डाधिकारी जांच को नाकाफी बताया है। उनका कहना है कि न्यायिक जांच के आदेश भले ही ना दिए गए हों, लेकिन दण्डाधिकारी जांच की एक तय समय सीमा होनी चाहिए और इसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक होनी चाहिए। आदिवासी नेताओं ने कहा कि सारकेगुड़ा की रिपोर्ट सार्वजनिक किया जावे और दोषीयों पर कार्रवाई की मांग की गई है। इस मौके पर पूर्व केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री अरविंद नेताम, सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया, प्रियंका शुक्ला, वामपंथी नेता संजय पराते, किसान संघ राजनांदगांव के सुदेश टिकम, छग मुक्ति मोर्चा के रमाकांत बंजारे एवं अन्य नेता मौजूद थे। ज्ञात हो कि हमेशा की तरह इन सभाओं में कांग्रेस-भाजपा के नेता शामिल नही होते हैं। उक्त नेताओं का कहना है कि सिलगेर से कैम्प हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों पर 17 मई को गोलीबारी में चार जानें चली गईं। इधर 28 जून 2012 को सारकेगुड़ा में ऐसी ही गोलीबारी में 17 लोगों की जान चली गई थी। इसके 09 वर्ष पूरे होने पर यहां आदिवासियों द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और इसमें ऐसे हादसों को रोकने पर वक्ताओं ने अपनी राय रखी। वक्ताओं ने कहा कि सिलगेर में चार आदिवासियों के मारे जाने के मामले की न्यायिक जांच की मांग की गई, लेकिन इसकी दण्डाधिकारी जांच की जा रही है। वक्ताओं ने मांग की कि एक तय मियाद में इसकी जांच होनी चाहिए और इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। जहां तक सारकेगुड़ा की बात है, इसकी न्यायिक जांच हुई और इसमें फोर्स को दोषी पाया गया है। लेकिन खेद की विषय है कि अब तक इस मसले में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।