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व्यंग्य - शादी की न्यूनतम आयु से उपजे विचार

व्यंग्य - शादी की न्यूनतम आयु से उपजे विचार

-अखतर अली

सरकार ने शादी की न्यूनतम आयु निर्धारित कर दी है | इसमें महत्वपूर्ण शादी है न आयु  महत्वपूर्ण है न्यूनतम | यह शादी करने की आयु है शादी की आयु नहीं | जिनकी शादी बस होने ही वाली थी और अब नहीं हो पायेगी वो सब इस निर्णय का विरोध कर रहे है और जिनकी हो गई वो राहत की सांस ले रहे है कि अपन तो निपट गये | अपनी भाषा में कुछ शब्द ऐसे है कि एक शब्द बोलो तो दूसरा शब्द स्वतः ही मुंह से निकल जाता है जैसे कुल्लू बोलो तो मनाली जड़ी बोलो तो बूटी , होम्योपैथिक बोलो तो आयुर्वेदिक मुंह से निकल ही जाता है वैसे ही न्यूनतम की बात करो तो अधिकतम का ज़िक्र होता ही होता है |

जब से शादी की न्यूनतम आयु निर्धारित हुई है लोगो का कहना है अधिकतम आयु भी निर्धारित कर देनी चाहिए | दूल्हा दुल्हन की आयु का न्यूनतम अंतर भी निर्धारित कर देना चाहिए | शादी की आयु निर्धारित हो रही है तो तलाक की भी निर्धारित कर देनी चाहिए कि शादी के बाद कम से कम इतने दिन तो साथ रहना ही पड़ेगा और अधिकतम इतने दिन साथ रह लिए तो तलाक नहीं हो सकती | क्यों न शादी की व्यवस्था में आमिर खान होने की संभवनाओ को ध्वस्त कर दिया जाए |
बात शादी की आयु की निकली तो आयु से लोगो का ध्यान आय पर भी गया | यह मांग भी उठने लगी है कि जब तक न्यूनतम आय तक युवक न पहुचे उसे शादी करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए | इससे आलसी और निकम्मे लड़को में सुधर होगा | जीवन स्तर सुधरेगा , अपराध कम होगे | व्यक्ति संपन्न होगा तो राष्ट्र भी संपन्न होगा |

जब शादी की आयु सीमा निर्धारित हो ही रही है तो लगे हाथ स्वास्थ की न्यूनतम सीमा निर्धारित हो जानी चाहिए | शराबी , गंजेड़ी और चरसी लोगो को शादी का अधिकार पूर्णतया खत्म कर देना चाहिए | स्वस्थ शरीर वाले शादी करेगे तभी तेज़ दिमाग वाले बच्चे पैदा होगे | मज़दूर बहुत हो गए अब कुछ आईस्टीन भी पैदा हो जाए |

माई बाप जब शादी की न्यूनतम आयु निर्धारित हो रही है तो लगे हाथ पत्नी की शापिंग की अधिकतम सीमा और न्यूनतम अवधि भी निर्धारित कर दो | लड़ने की न्यूनतम अवधि , फरमाईश की अधिकतम सीमा , शक की औसत  सीमा का भी निर्धारण कर दो बाबा | आदमी गुटका खाता है तो उसके थूकने की अधिकतम सीमा के निर्धारण के बिना तो विवाह सफ़ल हो ही नहीं सकता | ससुराल में गुटका खाने वाले दामाद के थूकने की अलग से साफ़ सुथरी आकर्षक व्यवस्था का भी प्रावधान होना निहायत ज़रूरी है वरना रिश्ते में बदबू आ जाएगी |

विवाह इक्कीस में हो या इकतीस में मन मुटाव तो होगा ही न भय्या , तो उस समय भाषा , वाणी और आवेग का औसत प्रयोग निर्धारित कर देना परम आवश्यक है | कमरे में लड़े तो आंगन को भी पता नहीं चलना चाहिए | अपशब्द मुंह से निकले भी तो उसी के कान तक पहुचे जिस चेहरे के लिए रवाना किये गये है | सरकार जी आप निर्धारित करेगे तभी जनता को समझ आयेगा क्योकि जनता आपका अंदाज़ समझ चुकी है | जो आपके निर्णय का पालन नहीं करेगा आप उसका नाम बदल देना | लगे हाथ आदमी के रात को घर पहुचने की समय सीमा , दोस्तों को घर लाने की सीमा भी माई बाप आप ही तय कर दो |

अब अगर कुंवारी सरकार शादी पर इतना गंभीर चिंतन कर ही रही है तो एक एक दूल्हा सरकार के राड़ार पर होना चाहिए | राज्य , शहर , बस्ती में ऐसा माहौल न निर्मित होने पाये कि एक पति दूसरे पति को ऐसे देखे जैसे एक बीमार दूसरे बीमार को और एक कैदी दूसरे कैदी को देखता है | इस बात का भी निर्देश हो कि जब गली से बारात गुज़रे तो बाजे की आवाज़ न्यूनतम इतनी तो हो कि किसी की सिसकिया किसी को भी सुनाई न दे | विवाह के रिश्ते में आपसी सहमति , प्रेम और विश्वास ज़िन्दगी के मंच पर से उम्दा जादूगरी का प्रदर्शन करते है जैसे प्रेम है तो सुविधाओं की खाली बोतल भी भरी हुई नज़र आती है और प्रेम नहीं है तो रख रखाव का भरा ग्लास भी खाली लगता है | प्रेम की पतवार हो तो भयंकर आंधी तूफ़ान में भी गृहस्थी की नाव डूबती नहीं है और दिमाग में शक और नफ़रत हो तो डूबना किनारे पर भी संभव हो जाता है |

हालांकि यह बात प्रत्येक दंपत्ति पर लागू नहीं होती लेकिन सरकार की यही कोशिश होती है कि हर योजना और निर्णय का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुचे तो हुज़ूर उपहास और उपेक्षा की भी सीमा निर्धारित कर देना चाहिए | पूछता है भारत कि चिडचिडी औरत से पुरुष की और गुस्सैल आदमी से महिला की सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त होना चाहिए कि नहीं ?

शादी एक प्रकार का श्रम है अतः कारखानों में श्रमिको के लिए जो सुरक्षा नियम होते है वह सभी श्रेणियों के पति को भी मिलने चाहिये | अब चूकि सरकार ने विवाह की ओखली में सर दे दे ही दिया है तो उसे और दो कदम आगे बढ़ कर एक ऐप भी लाँच करना चाहिए जो आम नागरिक को विवाह के खतरों की जानकारी देता रहे | समय समय पर ऐप सूचित करता रहे कि कृपया इस मार्ग पर न जाए आगे विवाह है |

विवाह से उत्पन्न होने वाली दिक्कत और प्राप्त होने वाले आनंद को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिये | इसके बिना रोजगार प्रदान करने वाली शिक्षा अधूरी  है | विवाह करने वाले समस्त युवक और युवती को खतरे के खिलाड़ी घोषित किया जाए |

मै तो कहता हूं अब सरकार को अपना सारा ध्यान शादी पर पूर्णतया केन्द्रित कर देना चाहिए | मंत्रिमंडल में एक विवाहित विवाह मंत्री भी हो | सरकार का शादी विभाग अनुकूल विवाह को प्रोत्साहन और प्रतिकूल विवाह की असफ़ल रोकथाम करेगा | निकाहनामा आधार से लिंक होना चाहिए | बारात में नागिन डांस पर प्रतिबंध जैसे कठोर फ़ैसले भी विभाग को लेना होगा | दहेज के एक एक सामान पर दहेज देना समाज के स्वास्थ के लिए हानिकारक है ऐसा स्टीकर लगाना अनिवार्य होना चाहिए अन्यथा दहेज जप्त का प्रावधान हो | लगे हाथ विभाग यह भी प्रचार कर सकता है कि इक्कीस वर्ष की जो शादी के लिए आयु निर्धारित की गई है इससे ओमिक्रान का ख़तरा टल जाता है | शादी विभाग के फ़ैसले को अन्य विभाग के मंत्री सरकार का ऐतिहासिक फ़ैसला बतायेगे |

अंत में मै एक पुरुष और पति की हैसियत से यही कहूगा कि पत्नी वह चमत्कारी रत्न कि तरह है जिसके पास होने से घर में ग्रहों का अशुभ प्रभाव खत्म होता है | पत्नी हरे रंग का जेड स्टोन है इसके होने से व्यापार में बरकत होती है | पत्नी नीलम होती है इसके ही उत्साह से पुरुष परिश्रमी बनता है | संयमित , सम्मानजनक , संतोषी जीवन जीना है तो शादी करिये क्योकि शादी साधारण से असाधारण की यात्रा है |