breaking news New

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला मरने से पूर्व दो बयान हों तो मेरिट आधार पर मूल्यांकन करें

 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा  फैसला मरने से पूर्व दो बयान हों तो मेरिट आधार पर मूल्यांकन करें

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कहा, अगर पीडि़ता ने मरने से पूर्व दो बयान दिए हों तो प्रत्येक बयान का स्वतंत्र रूप से मेरिट के आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए। किसी एक बयान के आधार पर दूसरे बयान के तथ्यों को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पीडि़ता द्वारा मरने वाले दिन दिए दूसरे बयान के आधार पर अपीलकर्ता नागभूषण को पत्नी की हत्या में मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।

दहेज न मिलने से नाराज नागभूषण ने पत्नी को जलाकर मार डाला था। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने नागभूषण को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को पलट दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता के वकील संजय नूली के उस दावे को खारिज कर दिया कि मरने से पूर्व दिए पहले बयान में पत्नी ने आग लगने की घटना को हादसा बताया था।

पीठ ने कहा, पीडि़ता ने मरने से पहले दिए अपने दूसरे बयान में बताया था कि पति ने बच्चों को मारने की धमकी दी थी इसलिए उसने दुर्घटना का मामला बताया था। पीडि़ता ने यह भी कहा था कि माता-पिता के आने के बाद उसे सच बताने की हिम्मत मिली।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा, पीडि़ता ने जब मरने से पूर्व कई बार बयान दिए हों तो प्रत्येक का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाना चाहिए। अदालत को गुण के आधार पर प्रत्येक बयान को सही परिप्रेक्ष्य में विचार करना चाहिए और आकलन कर खुद को संतुष्ट करना चाहिए कि उनमें से कौन सा बयान सही स्थिति को दर्शाता है।