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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -केंद्र-राज्य संबंधों की पड़ताल

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -केंद्र-राज्य संबंधों की पड़ताल

सुभाष मिश्र
राष्ट्रव्यापी कोरोना संक्रमण के बीच एक बार फिर से केंद्र राज्य संबंधों की पड़ताल जरूरी हो गई है। बहुत सारी राज्य सरकारे कोरोना वैक्सीन के लिए केंद्र को दोषी ठहरा रही है और अदालतों का दरवाजा खटखटा रही है। वहीं केंद्र द्वारा बनाए गये कोरोना टीकाकरण के एप पर पंजीयन के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता पर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ ने अपना नया पोर्टल  बनाकर पब्लिक कर दिया है वहीं महाराष्ट्र भी अपना टीकाकरण पोर्टल बनाने जा रहा है। देश की अलग-अलग पार्टियों के 12 नेताओं ने केंद्र सरकार को 9 बिन्दुओं पर सुझाव देते हुए कहा है कि देश-विदेश से वैक्सीन खरीदी जाए। यूनिवर्सल वैक्सीनेशन किया जाये। पीएम केयर्स फंड का पैसा बाहर लाया जाये। बेरोजगारों को 6 हजार महीना भत्ता दिया जाए। सेंट्रल विस्टा प्रोग्राम रद्द किया जाये। कृषि कानून वापस हो आदि। केन्द्र इन मांगो से सहमत नजर नहीं आता। यह पहली बार नहीं है जब केंद्र और विपक्षी पार्टियों की किसी मुद्दे पर टकराहट हो रही हो। हाल के सालो में यह देखा गया है की केन्द्र द्वारा जारी आदेशों को राज्यों ने अपने यहां मानने से इंकार किया है। हाल ही में किसान आंदोलन के बीच केंद्र द्वारा लाये गये तीन कृषि कानून में हुए संशोधन की व्यवस्था को भी राज्यों ने खारिज किया। इसके पहले एनआरसी /नेशनल जनगणना रजिस्ट्रर को लेकर भी केंद्र व राज्य आमने-सामने हुए। पश्चिम बंगाल की हालिया घटना में भी केंद्र-राज्य आमने सामने है। यहां के राज्यपाल जगदीश धनखड़ ममता बैनर्जी को दरकिनार कर हिंसा पीडि़तों से मिलने पहुंचे। देश में बहुत से राज्यपाल स्वतंत्र और निष्पक्ष आचरण करने के बजाय केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करके राज्य सरकारो के लिए बाधा खड़ी करते रहते हैं। दिल्ली में भी लंबे समय से केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी बनी हुई है और उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार पर नकेल कसना चाहती है।

कोरोना महामारी के समय आक्सीजन, वैक्सीनेशन के लिए जुझ रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि कोरोना काल में राज्यों को ग्लोबल मार्केट में एक दूसरे से लड़ाई करने के लिए छोड़ दिया गया है। उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र से लड़ रहा है, महाराष्ट्र ओडिशा से लड़ रहा है, ओडिशा दिल्ली से लड़ रहा है। भारत कहा हैं? ये भारत की बहुत खराब स्थिति दर्शाता है। भारत को एक देश के रूप में सभी राज्यों की ओर से टीके खरीदने चाहिए। उनका कहना है कि जब हम वैक्सीन निमार्ताओं से अलग-अलग राज्यों के बजाय एक देश के रूप में बात करते हैं तो बारगेनिंग की गुंजाइश काफी ज्यादा होती है। आक्सीमीटर और टीके के लिए महाराष्ट्र व हरियाणा ग्लोबल टेंडर बुला रहा है। मुम्बई की मेयर किशोरी पेडनेकर का कहना है कि हमारी महानगर पालिका दुनिया में पहली है, जो वैक्सीनेशन के लिए विदेशी कंपनी को ग्लोबल टेंडर करके बुला रही है।

हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा-कोरोना के खिलाफ जो सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, वह है सभी को वैक्सीन देना। सभी को वैक्सीन मिल जाएं, इसके लिए हम ग्लोबल टेंडर जारी करने जा रहे हैं। दुनिया में हमें अगर कहीं से भी वैक्सीन मिल जाती है, तो हम हरियाणा के सभी लोगों को वैक्सीन लगा देंगे। यहां बहुत से नेताओ का आरोप है की केन्द्र सरकार की लेट लतीफी और स्पष्ट पॉलिसी नहीं होने के कारण आज ये हालात पैदा हुए हैं। केन्द्र अपनी नाकामी का ठिकरा राज्यो पर फोडऩा चाहता है। टीके की कमी से जुझ रहे भाजपा शसित राज्य मजबूरी में खामोश हैं वरना वहां भी उसी तरह का जन आक्रोश है, जैसा देश के अन्य राज्यो में।

इसके पहले देश भर में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफत करते हुए 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के कार्यान्वयन के खिलाफ रैली निकाल कर इस तरह के पंजीयन का विरोध किया। 11 राज्यों में भारत के कुल भू-भाग का 54 प्रतिशत हिस्सा है, और इसकी कुल आबादी का 56 प्रतिशत है।

केंद्र सरकार द्वारा लगाये गये तीनों किसान बिल का कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने विरोध किया है। पंजाब और छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसान बिलक ो संघीय ढांचे पर घातक हमला कहा है। पंजाब विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें अध्यादेशों और उसके बाद के विधेयकों को खारिज कर दिया गया। अभी हाल में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री के फोनकॉल को लेकर कहा था की वे केवल मन की बात करते हैं, अच्छा होता वे काम की बात करते। राज्यो में सीबीआई जांच को लेकर भी केन्द्र-राज्य के बीच विवाद रहता है। इधर जीएसटी और अन्य करो को लेकर भी बहुत से राज्य अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। कोरोना संक्रमण जैसी राष्ट्रीय आपदा के समय भी इस तरह की टकराहट अंतत: जनसामान्य का ही नुकसान करेगी।
केन्द्र से असहयोग के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिप्स के सहयोग से तैयार वेबपोर्टल ने आनलाईन पंजीयन के लिए बिना मोबाईलधारी व्यक्ति भी जिला प्रशासन द्वारा पंचायतों, नगरीय निकायो तथा नगर निगमों सहित अन्य स्थानों पर स्थापित हेल्प डेस्क के सहयोग से अपना पंजीयन करवाकर टीका लगा सकता है। राज्य में 48 प्रतिशत लोग ऐसे है जिनके पास मोबाईल फोन नहीं है। बहुत सारे लोगों के पास अपने आधार कार्ड नहीं है। ऐसे सभी लोग केंद्र के वेब पोर्टल पर पंजीयन नहीं करा सकते थे, अब वे पंजीयन कराकर टीका लगवा सकते हैं। छत्तीसगढ़ को 18 से 44 वर्ग के आयु समूह में अभी तक 4 लाख टीके मिले है जिनमें से 4 लाख लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने टीकाकरण के लिए नये सिरे से टीकाकरण के लिए विभिन्न श्रेणियां बनाकर टीको के आवंटन का अनुपात तय किया है। केंद्र सरकार के टीकाकरण बेवपोर्टल के लिए आरोग्य सेतु या को-विन पर पंजीयन कराना होगा। पोर्टल पर अपना स्लाट बुक करने के लिए आधार कार्ड, ड्राइविंग लायसेंस, पेनकार्ड, पासपोर्ट, पेंशन पासबुक या एनपीआर स्मार्ट कार्ड जरुरी है। केंद्र सरकार का दावा है कि देश में अधिकांश वयस्कों के पास आधार कार्ड है और उन्हें भरोसा है कि उनका डेटा सुरक्षित है। देश के 125 करोड़ निवासियों के पास 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है। यह सही है कि देश में एक बड़े वर्ग के पास आधार कार्ड है किन्तु अभी भी 15 से 20 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके पास आधार कार्ड नहीं है। उनके पास ऐसा कोई पहचान पत्र नहीं है जिससे वे टीकाकरण के लिए पंजीयन करा सके। टीकाकरण अभियान की शत-प्रतिशत सफलता इसी बात में निहित है कि देश के प्रत्येक नागरिक को टीका लगे और वह खुद सुरक्षित होकर दूसरो को भी सुरक्षित करें।