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रासायनिक खाद की किल्लत से प्रदेश के किसान परेशान -रामगोपाल अग्रवाल

रासायनिक खाद की किल्लत से प्रदेश के किसान परेशान -रामगोपाल अग्रवाल

 मोदी एंड कम्पनी की कारगुजारियों से छग में गहराया खाद संकट _चौधरी
धमतरी । केन्द्र की मोदी सरकार की कारगुजारियों और भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ में रासायनिक खाद का संकट गहराने लगा है। यह बात नान के चेयरमेन और केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त रामगोपाल अग्रवाल ने कही है।   

अग्रवाल ने जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अरूण चौधरी के हवाले से बयान जारी कर कहा है कि मोदी सरकार किसानों, गरीबों और मजदूरों की नहीं, बल्कि पूंजीपतियों और कार्पोरेट घरानों की हितैषी है। इसका सबसे बड़ा सबूत है किसानों को कार्पोरेट घरानों और पूंजीपतियों का गुलाम बनाने के लिए  तीन नए कृषि कानून बनाना। तीनों कृषि कानून कार्पोरेट घरानों और पूंजीपतियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। इसके चलते न सिर्फ जमाखोरी, मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिला है, बल्कि इसे कानूनी संरक्षण भी मिल रहा है।

नए कृषि कानूनों के माध्यम से कॉन्टेक्ट फार्मिंग का प्रावधान करके मोदी सरकार किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की तैयारी कर चुकी है। इसका विरोध पूरे देश के किसान कर रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर इलाकों में किसान कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केन्द्र सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। केन्द्र सरकार देश के अन्नदाता किसान भाईयों के दुख-दर्द और उनकी पीड़ा को समझने के बजाय उनके विरोध को कुचलने का लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का यह कृत्य इस बात को प्रमाणित करता है कि किसान, गरीब, मजदूर उसके लिए कोई मायने नहीं रखते। वह पूंजीपतियों और कार्पोरेट घरानों की मदद से सत्ता में बने रहना चाहती है।

श्री अग्रवाल ने आगे कहा  कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। खरीफ की खेती छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। राज्य के अधिकांश किसानों के जीवन यापन का आधार खरीफ की पैदावार ही है। केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। किसानों के हित में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों में अडंगा लगाना केन्द्र सरकार की आदत बन गया है। चाहे वह धान खरीदी का मामला हो या रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति का। केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ लगातार भेदभाव कर रही है। 

खरीफ सीजन 2021 के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को 11 लाख 75 हजार मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की जरूरत है। केन्द्र सरकार से उक्त मात्रा में रासायनिक की आपूर्ति की डिमांड छत्तीसगढ़ की ओर से की गई थी, परंतु 13 जुलाई 2021 की स्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को मात्र 6 लाख एक हजार मीट्रिक टन रासायनिक खाद दी गई है, जो मांग का मात्र 51 प्रतिशत है। 13 जुलाई की स्थिति खरीफ सीजन 2018 में मांग के विरूद्ध 55 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2019 में केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को मांग के विरूद्ध 61 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2020 में 64 प्रतिशत खाद की आपूर्ति की गई थी, जबकि चालू खरीफ सीजन में मात्र 51 प्रतिशत की आपूर्ति की गई है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ राज्य में रासायनिक उर्वरकों को लेकर किल्लत हो रही है।

छत्तीसगढ़ राज्य को मांग के अनुरूप रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति में कमी के चलते राज्य में खेती-किसानी को लेकर संकट पैदा हो गया है। खरीफ फसलों की बुआई के समय में खाद की जरूरत किसानों को ज्यादा होती है। वर्तमान समय में खरीफ फसलों की बुआई की जा रही है। ऐसी स्थिति में राज्य की मांग के अनुरूप रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति में कमी करना, केन्द्र सरकार के भेदभाव को दर्शाता है। खरीफ 2021 सीजन के लिए केन्द्र सरकार को 11.75 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति की डिमांड भेजी गई थी, जिसमें यूरिया की मात्रा 5.50 लाख टन, डीएपी 3.20 लाख टन, एनपीके 80 हजार मीट्रिक टन, एमओपी 75 हजार मीट्रिक टन, सिंगल सुपरफॉस्फेट 1.50 लाख मीट्रिक टन शामिल है।

13 जुलाई 2021 की स्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य को 5.50 लाख टन यूरिया की मांग के विरूद्ध 2.67 लाख मेट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई है, जो मात्र 49 प्रतिशत है। इसी तरह डीएपी खाद की 3.20 लाख मीट्रिक टन मांग के विरूद्ध अब तक 1.55 लाख टन खाद प्रदाय की गई है, जो कि मांग की  मात्र 48 प्रतिशत है। एनपीके उर्वरक की 80 हजार मीट्रिक टन की मांग के बदले अब तक छत्तीसगढ़ राज्य को मात्र 52 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति हुई है, जो कि मांग का मात्र 65 प्रतिशत है। 

छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा एमओपी उर्वरक 75 हजार मीट्रिक टन की मांग के विरूद्ध अब तक 74  हजार मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई है, जो कि मांग का 73 प्रतिशत सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक की छत्तीसगढ़ राज्य को 1.50 लाख मीट्रिक टन की जरूरत है। 13 जुलाई 2021 की स्थिति में मात्र 72 हजार मीट्रिक टन उर्वरक प्राप्त हुई है, जो मांग का मात्र 48 प्रतिशत है। इस प्रकार देखा जाए तो छत्तीसगढ़ राज्य को 13 जुलाई की स्थिति में मात्र 6 लाख एक हजार टन सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति हुई है, जो  कुल मांग का मात्र 51 प्रतिशत है।

रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति में कमी के चलते राज्य में खाद का संकट बना हुआ है। इस साल खरीफ सीजन के लिए राज्य को अब तक प्राप्त रासायनिक उर्वरकों की मात्रा बीते 6 सालों में मिले रासायनिक उर्वरकों की मात्रा की तुलना में लगभग आधी है।  

अरूण चौधरी प्रवक्ता जिला कांग्रेस कमेटी धमतरी