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व्यंग्य: हम पेट्रोल ले चुके सनम - अखतर अली

व्यंग्य:  हम पेट्रोल ले चुके सनम - अखतर अली


पेट्रोल इन दिनों अपनी भरपूर जवानी में है , हर आदमी उसे घूर रहा है उसे बुरी नज़र से देख रहा है | इसने भी दिलो में आग लगा दी है | अब नौजवानों के ख्वाब में परियां नहीं आती बल्कि गाड़ी में पेट्रोल भरती लडकियां आती है | पेट्रोल जिसकी शुरुआत ही पे से होती है जिसने अपने आरंभिक अक्षर में ही आदेश जारी कर दिया है कि बस पे करते जाओ पे करते जाओ |

अब ताजमहल , लालकिला और कुतुबमीनार से भी अधिक लोकप्रिय अपने देश में पेट्रोल हो गया है | पेट्रोल की कीमत के आगे तो कुतुबमीनार की उंचाई भी कम लगने लगी है | अगर शाहजहाँ आज होते तो मुमताज़ की याद में ताजमहल नहीं बल्कि पेट्रोल पम्प बनवाते | हम अपनी सरकार की जितनी प्रशंसा करे कम है , आज तेल के उत्पादक देश भी हमारी ओर आश्चर्य की दृष्टि से देख रहे है | गाड़ी में पेट्रोल भरा कर मध्य और निम्न आय वर्ग का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है इसके लिये सरकार की भूरी भूरी प्रशंसा की जानी चाहिये | पेट्रोल के कारण आज कल वातावरण इतना सुहाना हो गया है कि हर घर में उत्सव जैसा माहौल नज़र आता है | पति अपनी स्कूटर में एक लीटर पेट्रोल भरवाता है तो पत्नी दस लोगो को फ़ोन कर के यह शुभ समाचार देती है कि आज तो इन्होने एक लीटर पेट्रोल लिया है ऐसा कहते हुए पत्नी की आंखे चौड़ी और गाल गुलाबी हो जाते है | बच्चे पापा की पेट्रोल भराते समय की फ़ोटो खीच कर शेयर करते है तो धड़ाधड़ बधाई के मैसेज आना शुरू हो जाते है |

पेट्रोल ने इन दिनों इतनी तरक्की की है कि पहले पेट्रोल डाल का आग लगाईं जाती थी आज कल बस पेट्रोल बोल भर दो तो दिलो में आग लग जाती है | पेट्रोल क्या था और सरकार ने उसे क्या बना दिया इसके लिये तो पेट्रोल को सरकार के पाँव धो धो कर बचा हुआ पानी पीना चाहिये | सरकार ने तो पहले ही कह दिया था कि देश में अच्छे दिन आयेगे , कम अक्लो ने समझ लिया कि सिर्फ़ इंसानों के अच्छे दिन आयेगे | दरअसल यहां के लोगो कि सोच बहुत संकुचित है ये लोग उस विस्तार को समझ ही नहीं पा रहे है जो सरकार के ज़हन में है | सरकार इस देश के चप्पे चप्पे के दिन बदल देना चाहती है सरकार के टारगेट में सिर्फ़ इंसान ही नहीं वस्तुए भी है और शुरुआत वस्तुओ से ही हुई है | पहले प्रदूषण के अच्छे दिन आये , फिर सोना और चांदी के अच्छे दिन आये , उसके बाद शेयर बाज़ार के अच्छे दिन आये और अब पेट्रोल के अच्छे दिन आ गये है | अच्छे दिनों की शुरुआत वस्तुओ से हुई है , आदमी को भी वस्तु बनाने की प्रक्रिया चल रही है जैसे ही यह प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी आदमियों के भी अच्छे दिन आ जायेगे |

पेट्रोल में आग लगा कर सरकार ने जिस दूरदृष्टि का परिचय दिया है उसे यहां के लोग समझ नहीं पा रहे है | यह सरकार का दुर्भाग्य है कि उसे समझदार जनता नहीं मिली | देशद्रोही है वो लोग जो सरकार की नियत पर शक करते है | आपने क्या महसूस नहीं किया कि सड़क दुर्घटना की संख्या में कितनी कमी आई है ? यातायात नियम , यातायात सप्ताह , सीमित गति की अपील भी जो काम नहीं कर सके वह काम चुटकी में पेट्रोल के दाम बढ़ाने से हो गया | अब पेट्रोल न भरा पाने के कारण सड़क पर वाहन चल ही नहीं रहे है तो दुर्घटना होगी कैसे ? एक बात और नोट की जानी चाहिये कि जब से पेट्रोल के दाम में मनमानी वृद्धि की गई है बहू को जलाने के मामले भी कम हो गये है इतना महंगा पेट्रोल डाल कर बहू को जलाना अब हर किसी के बस की बात नहीं है , इस बात पर सरकार की पीठ थपथपाना चाहिये कि उसने कितनी बड़ी हिंसा को खत्म कर दिया | अब गाडियों की चोरी भी खत्म हो गई है अब चोरो की नज़र पेट्रोल पर है |

अगर फिल्म दीवार इन अच्छे दिनों की फ़िल्म होती तो उसका संवाद इस प्रकार होता –

मेरे पास आज कौन सी गाड़ी नहीं है , स्कार्पियो , डस्टर , मर्सिडीज़ जैसी गाड़ियां है तुम्हारे पास क्या है ?

भाई मेरे पास पेट्रोल है |

पेट्रोल की कीमत में बढती बेतहाशा वृद्धि ने रोजगार के अवसर भी निर्मित किये है , खुशियों के लम्हे भी पैदा हुए है | अब हर गाड़ी के साथ एक सुरक्षाकर्मी रखा जाने लगा है ताकि कोई पेट्रोल न चुरा ले | अब बाजे और डी.जे. वालो को भी काम मिल रहा है क्योकि अब झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बाजे गाजे के साथ नाचते गाते पेट्रोल भरवाने जाने लगे है , जगह जगह इन उत्साही युवको का स्वागत किया जाता है , उन पर फूलो की वर्षा की जाती है | बेटा पेट्रोल भरा के सीधा मां के पास आकर आशिर्वाद लेता है , मां उसकी बलाएं लेकर कहती है – आज तेरे पिता जीवित होते तो कितना खुश होते , फिर पति की फ़ोटो के सामने खड़े होकर कहती – देखो आज मुन्ना इस लायक हो गया कि अपनी गाड़ी में दो लीटर पेट्रोल भी भरवा लेता है |

आज मेरे को एक निमंत्रण पत्र मिला जिसमें लिखा था –

मान्यवर , भगवान की असीम कृपा एवं बुजुर्गों के आशिर्वाद से हमको पांच लीटर पेट्रोल खरीदने का अवसर प्राप्त हुआ है , इस शुभ अवसर पर पधार कर गाड़ी के मालक और चालक को अपना आशिर्वाद दे | पेट्रोल भराने हेतु जुलूस ठीक पांच बजे हमारे निवास स्थान से पेट्रोल पंप के लिये निकलेगा | पेट्रोल भरवाई के बाद स्वल्पाहार की व्यवस्था है जिसका समय संध्या सात बजे से आपके आगमन तक है | अंत में गोलू और मोनू का निवेदन था –

मेले चाचू की गाली में पेट्लोल भलाने दलूल द्लूल आना |

यह सरकार की ज़बरदस्त सफलता है कि कल तक जो पेट्रोल वाहन भर चलाने के काम आता था अब उसकी उपयोगिता में ज़बरदस्त उछाल पैदा हो गया है , आश्चर्य नहीं होना चाहिये जो अगर सुनने को मिले कि – रिटर्न गिफ्ट में मेहमानों को एक एक लीटर पेट्रोल दिया गया , खेल प्रतियोगिता के इनाम इस प्रकार रखे गये – प्रथम पुरस्कार पांच लीटर पेट्रोल , द्धितीय पुरस्कार तीन लीटर पेट्रोल , तृतीय पुरस्कार दो लीटर पेट्रोल एवं सांत्वना पुरस्कार एक लीटर पेट्रोल | अब बर्थडे गिफ्ट और दुल्हन की मुंह दिखाई के लिये पेट्रोल से अच्छा कोई गिफ्ट नहीं माना जायेगा | अब शौकीन लोग कपड़े पर इत्र नहीं बल्कि पेट्रोल लगायेगे , स्व. पिता की पुण्य तिथी पर गरीबो को एक एक लीटर पेट्रोल का वितरण किया जायेगा |