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राजनीतिक स्टंट के बीच बंगाल फतह के लिए ‘स्वामीजी’ और ‘नेताजी’ भाजपा के चुनावी शस्त्र

राजनीतिक स्टंट के बीच बंगाल फतह के लिए ‘स्वामीजी’ और ‘नेताजी’ भाजपा के चुनावी शस्त्र

नयी दिल्ली।  पश्चिम बंगाल में कुछ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दिन-प्रतिदिन के राजनीतिक स्टंट के बीच राज्य में भगवा लहर फैलाने को आतुर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे ‘बंगाल ऑइकान’ को दोहरे चुनावी शस्त्र के रूप में इस्तेमाल करने के लिए संकल्पित नजर आ रही है।

पश्चिम बंगाल और केरल में कांग्रेस के साथ वामदलों के वैचारिक विरोधाभाषों के बावजूद दोनों दलों के बीच हाल में हुआ चुनावी गठबंधन एक दिन पहले शुक्रवार को राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय था , वहीं एक दिन बाद शनिवार काे स्वामीजी और नेताजी जैसी हस्तियों पर भाजपा के अस्वाभाविक महत्व पर ध्यान केंद्रित हो गया।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक बंगाल चुनाव के परिप्रेक्ष्य में पार्टी स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती की विशाल एवं भव्य आयोजन की योजना बना रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 12 जनवरी को स्वामीजी की जयंती के मौके पर राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर जायेंगे। इसके अलावा 23 जनवरी को नेताजी की 125वीं जयंती समारोह के लिए  शाह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति भी गठित की गयी है। यह समिति नेताजी की स्मृति में साल भर चलने वाले समाराहों की रूपरेखा तैयार करेगी।

सूत्रों के मुताबिक नेताजी की जयंती समारोहों के आयोजन को लेकर गठित उच्चस्तरीय समिति में विशेषज्ञ, इतिहासकार, लेखक, नेताजी के परिवार के सदस्य और साथ ही आजाद हिंद फौज से जुड़े ख्यातिलब्ध हस्तियां शामिल होंगी।

सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी के पहले सप्ताह में पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा था,“नेताजी सुभाष चंद्र बोस अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं। एक विद्वान, सैनिक और राजनेता के सम्मान में हम शीघ्र ही उनकी 125 वीं जयन्ती समारोह शुरू करने जा रहे हैं। इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। आइए , हम इस खास मौके को भव्य रूप दें।”

इस बीच राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वाममोर्चा-कांग्रेस गठबंधन ने स्वामीजी और नेताजी की जयंती के मौके पर भाजपा के आयोजनों को चुनावी हथकंडा करार दिया है।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दो टूक लहजे में कहा, “स्वामीजी और नेताजी हमारे खून में हैं। उनके विज्ञापन की कोई दरकार नहीं है।”

वहीं वाममोर्चा-कांग्रेस गठबंधन ने इसे महज ‘इलेक्शन स्टंट’ निरुपित किया है।