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कोरोना : अस्पताल का फरमान, 'आक्सीजन सिर्फ 3 घण्टे की बची है इसलिए परिजन अपने मरीज को किसी दूसरे अस्पताल ले जाएं..हाईकोर्ट का आदेश, 'सरकार एयरलिफट करके पहुंचाए आक्सीजन'

कोरोना : अस्पताल का फरमान, 'आक्सीजन सिर्फ 3 घण्टे की बची है इसलिए परिजन अपने मरीज को किसी दूसरे अस्पताल ले जाएं..हाईकोर्ट का आदेश, 'सरकार एयरलिफट करके पहुंचाए आक्सीजन'

नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र को निर्देश दिया कि कोविड-19 के गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे दिल्ली के उन अस्पतालों को फौरन किसी भी तरीके से ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए जो इस गैस की कमी से जूझ रहे हैं.

दरअसल, ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे मैक्स अस्पताल ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामले की अर्जेंट सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अस्पताल ने कोर्ट को बताया कि उनके सेंटर पर केवल 2 से 3 घंटे का ऑक्सीजन ही बचा है. इसपर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है. आज मैक्स अस्पताल आया है कल और लोग आएंगे.

हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से कहा कि अगर इंडस्ट्री को ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है तो तुरंत रोक दिया जाए. इसपर केंद्र सरकार ने कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली तमाम कंपनियां 100 फीसदी ऑक्सीजन की सप्लाई कर रही हैं. केंद्र सरकार 24 घंटे ऑक्सीजन की सप्लाई पर नजर बनाए हुए है.

कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि कल हमने ऑक्सीजन के मामले को लेकर विस्तृत आदेश परित किया था, उसका क्या हुआ? कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए परिवहन के तरीकों और साधनों पर विचार करना चाहिए ताकि आपूर्ति लाइनें प्रभावित न हों, चाहे एयर लिफ्टिंग से ही क्यों न आपूर्ति पूरी की जाए?

कोर्ट ने कहा, 'फिलहाल हो रही ऑक्सीजन की सप्लाई दिल्ली की मांग के लिहाज से पर्याप्त नहीं है. कोविड मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध हो, ये केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है. जैसे भी हो केंद्र सरकार ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करे.'

दिल्ली हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस तरह केंद्र सरकार को ऑक्सीजन की सप्लाई पर काम करना चाहिए वह काम नहीं कर रही है. कोर्ट ने कहा था कि तमाम इंडस्ट्री को ऑक्सीजन की सप्लाई ना की जाए, बावजूद इसके सरकार हमारे आदेश को लेकर गंभीर नहीं है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि मैक्स हॉस्पिटल को तत्काल ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए. दरअसल, 6 मैक्स अस्पतालों में 1400 मरीज ऑक्सीजन पर निर्भर हैं.