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हितों की अनदेखी,पड़ सकती है भारी..स्वतंत्र जिला की मांग में आ रही गर्मी

हितों की अनदेखी,पड़ सकती है भारी..स्वतंत्र जिला की मांग में आ रही गर्मी


राजकुमार मल

भाटापारा- आने वाले विधानसभा चुनाव के पहले भाटापारा विधानसभा क्षेत्र, बदलाव की संभावना खोज रहा है। यह संभावना न केवल सत्ता पक्ष के लिए चुनौती  हो सकता है बल्कि उस विपक्ष के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, जिसका प्रतिनिधित्व 15 साल से मजबूती से जमा हुआ है। स्वतंत्र जिला का मुद्दा, हर विधानसभा चुनाव के दौरान उठता रहा है लेकिन इस दफा इसकी अनदेखी सत्ता और विपक्ष दोनों को भारी पड़ सकती है।

प्रदेश में जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनेगी, भाटापारा को स्वतंत्र जिले का दर्जा मिलेगा। 9 वर्ष पूर्व दिग्गज कांग्रेसी नेता नंद कुमार पटेल की यह घोषणा, शायद पार्टी भूल चुकी है, तभी तो 3 नए जिले और बन गए लेकिन पहली दावेदारी भूला दी गई। अब इस दावेदारी की अनदेखी भारी पड़ने की संभावना बनती नजर आती है क्योंकि हर मामले में की जा रही उपेक्षा से उपजी नाराजगी निचले स्तर तक पहुंच चुकी है।

इनसे पूछेंगे सवाल

साल था 2018। मौका था आदिवासी सम्मेलन का। उपस्थिति थी प्रदेश  प्रभारी पी एल पुनिया, डा. चरण दास महंत, डा. शिवकुमार डहरिया और राजकमल सिंघानिया की। वर्तमान में मुखिया की जिम्मेदारी संभाल रहे भूपेश बघेल ने कहा था कि  जैसे ही कांग्रेस की सरकार प्रदेश में आएगी वैसे ही भाटापारा को स्वतंत्र जिले का दर्जा मिलेगा ।तीन साल बीत चुके हैं, शायद मुख्यमंत्री भूल गए कि जो घोषणा भाटापारा को लेकर उन्होंने की थी उसे लेकर सवाल पूछने की तैयारी  चालू हो चुकी है।

गुस्सा इनसे



15 साल तक बिना बाधा के प्रदेश में सरकार चलाने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से भी शहर  बेतरह नाराज है। नाराजगी के बावजूद उसके प्रत्याशी को जीत दिला कर भरोसा जताया। अब यह भरोसा और विश्वास पूरी तरह टूट चुका है क्योंकि जैसी उपेक्षा भाजपा ने अपने शासनकाल में भाटापारा विधानसभा क्षेत्र में की, उसकी मिसाल शायद ही प्रदेश में मिले। हकदार था अपना शहर, स्वतंत्र जिले का, लेकिन वोट की राजनीति हमेशा भारी पड़ती रही। सो गुस्सा इनसे भी है।

पात्र, फिर भी अपात्र

  पात्रता की लगभग सभी शर्त पूरी करने वाला भाटापारा,जिले का सबसे बड़ा शहर, छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी नगर पालिका और महत्वपूर्ण शहर है। भौगोलिक स्थितियां जहां पात्रता की शर्त पूरा करती है तो आसान आवाजाही के बेहतर संसाधन इसे विस्तार देते हैं। लघु एवं मध्यम दर्जे के स्थापित उद्योग विकास को गति दे रहे हैं। इसके अलावा कृषि के क्षेत्र में  भी शहर विशिष्ट पहचान रखता है। इसके बावजूद सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए यह मात्र सामान्य सा विधानसभा क्षेत्र है। जहां अपना कब्जा ही एकमात्र उद्देश्य रहता आया है।