breaking news New

ध्रुव शुक्ल की कविताः प्रिया की याद आती है

ध्रुव शुक्ल की कविताः प्रिया की याद आती है


शब्द के पास रहो
उसे अकेला मत छोड़ो
कोई हर लेगा

आक्रमण करते हैं शत्रु
स्वरों पर टूटते हैं
व्यञ्जनों को लूटते हैं

बहुरूपिए
उठा ले जाते हैं उसे
आकाश मार्ग से
न जाने किस दिशा में

रोते-बिलखते रह जाते हैं हम
कुछ कह नहीं पाते
पता पूछते फिरते हैं ...
वृक्षों से लताओं से
वन पाखियों से
पर्वतों से सरिताओं से

रास्तों पर बिखरे पड़े हैं
हमारे ही पहनाये हुए गहने
हम उन्हें उठाते हैं

घने वन में प्रिया की याद आती है

शब्द आँखों से झाँकता है



शब्द आँखों से झाँकता है

आँखों में झाँककर देखती है प्रिया
अपनी अंधी संतानें
मूर्खता भूख युद्ध

अंधे नहीं देख पाते
शब्द में फैला
उज्ज्वल आकाश