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मिस्र के अल गूना फिल्म फेस्टिवल में विशेष मेहमान होंगे वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजित राय , 2012 में ईरान के शाही महल में भी हो चुका है उनका सम्मान

मिस्र के अल गूना फिल्म फेस्टिवल में विशेष मेहमान होंगे वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजित राय ,  2012 में ईरान के शाही महल में भी हो चुका है उनका सम्मान

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर। बिहार के बक्सर जिले के कसियां गांव में जन्मे हिंदी के जाने-माने वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजित राय ने दुनिया भर के फिल्म समारोहों में शिरकत की है और सब जगह हिंदी पत्रकारिता को ही आगे बढ़ाया है। 

 अजित राय मिस्र ( इजिप्ट) के सबसे प्रतिष्ठित अल गूना अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में विशेष मेहमान होंगे। यह समारोह 23-31 अक्टूबर को मिस्र के अल गूना शहर में आयोजित किया जा रहा है। इस साल फरवरी-मार्च से ही दुनिया भर में जारी कोरोनावायरस के संकट के बीच यह पहला फिल्म फेस्टिवल है। फेस्टिवल डायरेक्टर इंतिशाल अल तिमिमि ने अजित राय को लिखे अपने पत्र में कहा है कि " आपको आमंत्रित करते हुए हम गौरव का अनुभव कर रहे हैं। विश्व सिनेमा खासकर अरब सिनेमा के प्रति आपकी निष्ठा और समर्पण का हम सम्मान करते हैं।" यह गौरव पाने वाले अजित राय हिंदी के पहले पत्रकार हैं।

अजित राय देश के जाने-माने फिल्म पत्रकार हैं जिन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कान फिल्म फेस्टिवल में विश्व के सबसे महत्वपूर्ण फिल्म समीक्षकों में शामिल किया जा चुका है। उन्होंने 2018 के 71 वें कान फिल्म फेस्टिवल में 75 आलेख लिखकर इस क्षेत्र में एक विश्व रिकॉर्ड बनाया था। दुनिया में आजतक किसी एक समारोह पर किसी एक पत्रकार की 75 रिपोर्ट नहीं प्रकाशित हुई हैं।

 अजित राय को  2012 में ईरान के राष्ट्रपति ने अपने शाही महल में आमंत्रित कर सम्मानित किया था। वे ओस्लो नार्वे के बालीवुड फेस्टिवल के सलाहकार है। उन्होंने 2012 में ही बर्लिन जर्मनी , मास्को रूस और उपसाला, स्वीडन  में इंडियन फिल्म फेस्टिवल शुरू किया। 

 अजित राय ने कहा है कि भारत और अरब देशों के बीच पिछले पांच हजार सालों की सांस्कृतिक साझेदारी है। हमें सिनेमा के माध्यम से इसे मजबूत बनाना है। कान बर्लिन वेनिस मास्को लंदन ओस्लो आदि फिल्म समारोहों में शिरकत कर चुके अजित राय दूरदर्शन की पत्रिका " दृश्यांतर" और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पत्रिका " रंग प्रसंग " के संपादक रह चुके हैं। वे लंबे समय तक आज की जनधारा के लिए विश्व सिनेमा और कान फिल्म फेस्टिवल पर  नियमित रूप से  लिखते रहे है। वे तीन बार भारत के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह गोवा की चयन समिति में जूरी रह चुके हैं।