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विकास शुल्क के नाम पर नागरिकों से भारी-भरकम वसूली की तैयारी

विकास शुल्क के नाम पर नागरिकों से भारी-भरकम वसूली की तैयारी

संजय जैन

धमतरी, 30 जुलाई। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चुनाव के पूर्व कांग्रेस के घोषणा पत्र में किसानों का कर्ज माफ, बिजली बिल आधा एवं निगम क्षेत्र के अंतर्गत लिये जाने वाले संपत्ति कर को आधा किये जाने की घोषणा की है जिसका पालन समूचे प्रदेश में हो रहा है परंतु नगर पालिक निगम द्वारा एमआईसी की बैठक में 1 जुलाई को पारित अतिरिक्त प्रस्ताव क्रमांक 3 के तहत घनी आबादी, पुराना घनी बस्ती क्षेत्र एवं विकसित क्षेत्र जहां रोड, नाली निर्मित है, में 20 रूपये वर्गफुट भूमि के हिसाब से क्षेत्रफल का विकास शुल्क देना होगा। इस आदेश से अब गरीब, मध्यम वर्ग के लोगों को अपनी जमीन का 20 रूपये फुट के हिसाब से विकास शुल्क देकर ही निर्माण कार्य कराया जाना प्रस्तावित किया गया है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि शहर की जनता ने पहली बार निगम में कांग्रेस को शहरी सत्ता सौंपी है, इसका प्रमुख कारण यह था कि निगम में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त एवं विकास की नई गाथा लिखी जायेगी। लेकिन प्रस्तावित विकास शुल्क के नाम पर लगने वाले भारी-भरकम राशि से नागरिकों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इनका यह भी कहना है कि निगम क्षेत्र के लोग अनेक प्रकार के टेक्स पूर्व में देते रहे हैं लेकिन आज भी नागरिकों को उनकी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पाई है। वहीं अब विकास शुल्क के नाम पर नागरिकों से भारी-भरकम शुल्क वसूली पूरी तरह गलत है।

निगम की एमआईसी बैठक में अतिरिक्त प्रस्ताव क्रमांक 3 के तहत महापौर की अनुमति एवं एमआईसी सदस्यों की सहमति के तहत निगम क्षेत्रांतर्गत विकसित, अविकसित एवं एनएच स्थानों पर विकास शुल्क के संबंध में प्रकरण एमआईसी के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया गया जिसकी संक्षेपिका नगर निगम द्वारा जो घोषित किया गया है उसमें विकास शुल्क लिया जाना प्रस्तावित किया गया है जो निम्रानुसार है-घनी आबादी, पुराना घनी बस्ती क्षेत्र एवं विकसित क्षेत्र जहां रोड, नाली निर्मित है में 20 रूपये प्रति वर्गफुट के हिसाब से निर्माणकर्ता को देना होगा। इस प्रस्तावित आदेश के चलते मान लो यदि किसी का एक मंजिला मकान है और यदि वह मकान मालिक दूसरी मंजिल का निर्माण करता है तो उसके लिये भी उसे उपरोक्त दर पर ही भुगतान करना होगा। संक्षेपिका अविकसित क्षेत्र जहां रोड अथवा नाली या दोनों ही निर्मित नहीं है, उसके लिये 30 रूपये प्रति वर्गफुट भूमि के हिसाब से समूची भूमि का भुगतान प्रस्तावित किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग, अंबेडकर चौक से कलेक्टोरेट, सिहावा चौक से नहर नाका होते हुए शांतिघाट, विंध्यवासिनी मंदिर एवं ब्रम्ह चौक से होते हुए लक्ष्मीनिवास, रत्नाबांधा चौक से हाऊसिंग बोर्ड कालोनी के आगे तक की सीमाएं आयेंगी। यदि किसी व्यक्ति द्वारा विकास शुल्क की राशि जमा की गई है तथा अनुज्ञप्त भवन में विस्तार, अतिरिक्त निर्माण हेतु आवेदन प्राप्त होता है तो वर्तमान में विकास शुल्क की अंतर राशि लिया जाना भी प्रस्तावित है। बाऊंड्री वॉल हेतु प्रथम किश्त के तौर पर 5 रूपये प्रति वर्गफुट के हिसाब से भूमि कुल क्षेत्र का भुगतान प्रस्तावित है। यह आदेश भवन अधिकारी नगर पालिक निगम द्वारा निकाला गया है।

विकास शुल्क के नाम पर जो सीमाएं और निर्धारण प्रस्तावित किया गया है, उससे कांग्रेस के घोषणा पत्र में दर्शित रियायत शब्द का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन होता है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में कहा गया था कि कांग्रेस की सरकार प्रदेश में स्थापित होने के बाद किसानों का कर्ज माफ, बिजली बिल आधा तथा निगम, पालिका, पंचायत क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को संपत्ति कर आधा दिया जाना होगा। इस घोषणा पत्र पर शत प्रतिशत अमल करवाते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रभार संभालते ही अल्प समय में किसानों का कर्ज माफ, बिजली बिल आधा, संपत्ति कर आधा को सख्ती के साथ अमल में लाने का निर्देश दिया जिसके तहत प्रदेश के हजारों किसान, नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। लेकिन नगर निगम के उपरोक्त प्रस्ताव क्रमांक 3 जिसे भवन अधिकारी निगम द्वारा एमआईसी में पास होना बताकर उसकी जानकारी सार्वजनिक की गई है, इसे लेकर नागरिकों में काफी निराशा देखी जा रही है। एक ओर कहा जा रहा है कि प्रदेश के मुखिया, प्रदेवासियों के निगम में आने वाले क्षेत्रों का संपत्ति कर आधा किये जाने की घोषणा किये हैं वहीं दूसरी ओर निगम द्वारा 20 रूपये प्रति वर्गफुट एवं नाली, आदि नहीं है वहां के लिये 30 रूपये निर्धारित किया जाना प्रस्तावित है। यहां यह बताना लाजिमी है कि निगम क्षेत्र के अंतर्गत जब विकास शुल्क का कोई मापदंड न रखते हुए मनमाने स्तर पर निगम द्वारा विकास शुल्क लिया जा रहा था तो जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा को विश्राम गृह में कतिपय पत्रकारों ने नागरिकों के साथ निगम की ज्यादती को उजागर करते हुए विकास शुल्क को अत्यधिक बढ़ाये जाने की शिकायत की थी जिसे लेकर मंत्री श्री लखमा ने तत्कालीन आयुक्त को विश्राम गृह बुलाकर उन्हें नियमानुसार शुल्क लिये जाने की चेतावनी दी थी और उनका तबादला भी हो गया।

भवन निर्माण अधिकारी नगर पालिक निगम के द्वारा उपरोक्त घोषणा जो महापौर और एमआईसी सदस्यों की सहमति से 1 जुलाई 2020 को प्रस्तावित किया गया है उसकी जानकारी जब निगम के गलियारों से निकलकर चौक-चौराहों तक पहुंची तो लोगों में उपरोक्त प्रस्तावित कर को लेकर घोर निराशा देखी गई। उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर इस प्रस्ताव का जबरदस्त विरोध होने की चेतावनी देते हुए कहा कि यह प्रस्तावित योजना को नागरिकगण पूरी तरह से विरोध कर इसे रद्द करायेंगे क्योंकि निगम द्वारा 20 रूपये फुट के हिसाब से जितना भी भवन निर्माण कराया जायेगा उसके कुल क्षेत्रफल का भुगतान करना पड़ेगा जो हजारों रूपये में आयेगा। साधारण एवं मध्यम श्रेणी के लोग मान लो 500 वर्गफुट पर मकान बनाते हैं तो उन्हें प्रस्तावित दर के हिसाब से 1 हजार रूपये शुल्क देना होगा। इसी तरह एक मंजिल वाला मकान के ऊपर भी यदि कोई मकान बनायेगा तो उसे भी 20 रूपये वर्गफुट के हिसाब से कुल क्षेत्रफल का भुगतान करना होगा। जिसका मकान 10 हजार वर्गफुट में बना हुआ है, उस पर यदि वह निर्माण करता है तो उसे 20 हजार रूपये की राशि विकास शुल्क के रूप में निगम को देनी होगी। इस प्रकार मकान बनाने वालों को काफी कठिनाईयों के दौर से गुजरना होगा। इसे देखते हुए जागरूक नागरिकों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री से इस पर संज्ञान लेकर जनहित की दृष्टि से निगम के उक्त प्रस्ताव को रद्द कराने की मांग की गई है।