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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-डराने की नहीं समझाने की जरुरत है

 प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-डराने की नहीं समझाने की जरुरत है

-सुभाष मिश्र

देश के कोरोना प्रभावित राज्यों में जहां लोगों की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हो रही है या जो कोरोना पॉजिटिव होकर क्वारेंटीन हैं, उनके उदाहरण देकर, उनके फोटो, वीडियो, स्टोरी वायरल करके लोगों को डराने की नहीं ,समझाने की जरुरत है। अभी सोशल मीडिया पर कोरोना की बहुत ही दारुण खबरें आ रही हैं, जो लोगों में दहशत पैदा कर रही है। अब जगह-जगह से इस तरह की खबरें आ रही है कि अस्पतालों में बेड नहीं है। निजी अस्पताल मरीजों को आक्सीजन सिलेंडर, रैमडे सिविर इंजेक्शन के नाम पर लूट रहे हैं। अस्पताल के बड़े डॉक्टरों और मरीजों के बीच किसी प्रकार का कोई संवाद नहीं है। केवल औपचारिकताओं के नाम पर आईसोलेशन वार्ड में किसी एक जूनियर डॉक्टर, नर्स को भेज दिया जाता है। वॉरियर के नाम से पुकारे जाने वाले डॉक्टर कोरोना मरीजों से मिलने में कतराते हैं। कोरोना से मरने वालों के परिवारजन की आवश्यक सुरक्षा अपनाने के बावजूद उनके अंतिम संस्कार से पल्ला झाड़ रहे हैं। अस्पताल, डॉक्टर, मरीज और उनकी देखभाल करने वालों के बीच जो विश्वास का आधार होना चाहिए, वह नदारद है। जो लोग अस्पताल में भर्ती नहीं होकर होम क्वारेंटाइन हैं, वे भी अपनी बीमारी छिपाकर तब तक यहां-वहां खुलेआम घूम रहे हैं जब तक कि उनकी जान पर नहीं बन जाती। संकट की इस घड़ी में सभी को एक दूसरे के मॉरल सपोर्ट की जरुरत है, जिसकी कमी इस बार कुछ ज्यादा ही दिखाई दे रही है। लोग ओवर स्मार्टनेस दिखाकर यहां-वहां बिना मास्क, बिना दूरी और सैनेटाइज हुए घूम रहे हैं। बहुत सारे लोगों को लगता है कि हमें कुछ नहीं होगा। ऐसे लगने के पीछे मीडिया में आ रही वेतस्वीरें भी हैं, जहां बड़े-बड़े नेता हजारों की भीड़ को रैली को संबोधित कर रहे हैं। भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय कहता है कि संक्रमण की दृष्टि से आगामी 30 दिन बहुत ही क्रिटिकल है, वहीं नेताओं की चुनावी सभाओं, रैलियों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए लगता है कि यदि देश में 30 अप्रैल तक चुनावी रैली, सभाएं, हरिद्वार का कुंभ मेला, आईपीएल क्रिकेट और लॉकडाउन के नाम पर लोगों का घूमना-फिरना, नाईट कफ्र्यू में लोगों का बाहर निकलना, बिना मास्क लगाए, बिना ऐहतियात बरते घूमना-फिरना जारी रहा तो क्या कोरोना संक्रमण इस देश से इतनी जल्दी चला जाएगा। अभी तो कुछ राज्य कोरोना संक्रमण की सुनामी झेल रहे हैं। ऐसा ही रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पूरा देश एक बार फिर से कोरोना की चपेट में आयेगा। तब शायद देश के प्रधानमंत्री ने बच्चों को परीक्षा में आत्मविश्वास बढ़ाने के नुस्खे बताने की बजाय मन की बात के जरिये सोशल डिस्टेसिंग का पाठ पढ़ाए। अभी तो ओ दीदी, ओ दीदी का नारा बुलंद है।
कोरोना संक्रमण के कारण जगह-जगह लगने वाले लॉकडाउन से सबसे ज्यादा मुसीबत इस देश के मेहनतकश, दिहाड़ी मजदूर, गरीब आदमी की है। संक्रमण  जिस रफ्तार से बढ़ रहा है और गांवों की ओर फैल रहा है, ऐसे में आने वाले दिन और खराब गुजरेंगे। कोरोना संक्रमण के इस दौर में आप स्प्राइड पीकर ये नहीं कह सकते कि डर के आगे जीत है। यहां आपको कहना होगा सुरक्षा अपनाने से ही जिंदा रहोगे। जीवन बेशकीमती है। बिना मास्क कोरोना संक्रमित व्यक्ति किसी जैविक हथियार सा खतरनाक है। कोरोना की नहीं पहुंचेगी आप तक आंच जब तक रहेंगे ये पांच, मास्क, सामाजिक दूरी, स्वच्छता, नियमित जांच और टीके का साथ।

यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन में हर्षोल्लास, खुशियां, दोस्तों का साथ, आपका घूमना-फिरना, बाजार की रौनक और लोगों के जीवन में खुशहाली रहे तो आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है, केवल संयमित और सुरक्षित रहकर कोरोना संक्रमण से खुद को और पूरी कम्युनिटी को बचाना है। आपकी आवारगी, लापरवाही किसी के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना नियंत्रण को लेकर विभिन्न मदों से 853 करोड़ रुपये से अधिक राशिका आबंटन किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रशासनिक अमले से कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पीडि़त मानवता की सेवा करें। कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की वर्चुअल बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण की वर्तमान स्थिति तथा इसकी रोकथाम और बचाव के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी हैस और केन्द्र सरकार से इसकी सतत उपलब्धता बनाए रखने के लिए कहा है। छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण की रोकथाम और बचाव के लिए टेस्टिंग और वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कोरोना की दूसरी लहर ने गांवों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। बड़ी संख्या में गांवों में कंटेनमेंट जोन बने है। अब सरकार बाहर से गांव आने वाले लोगों को सीधे घर जाने से रोकने की तैयारी में है। इसके लिये गांव से बाहर क्वारेंटीन सेंटर बनाने का आदेश दिया गया है। अगले कुछ दिनों में प्रत्येक गांव में क्वारेंटीन सेंटर की व्यवस्था कर ली जाएगी। कोरोना संक्रमण के भयावह होते चले जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी हो गई है। ऐसे में परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण विभाग ने प्रदेश भर में 4143 विभिन्न पदों पर संविदा भर्ती की मंजूरी दी है।

कोरोना के इस दौर में नकारात्मक सूचनाओं, खबरों और वीडियो की बजाय जो सकारात्मक हो रहा है, जरा उसकी बातें भी साझा की जाए तो वह लोगों के गिरते मनोबल को बढ़ाने वाला साबित होगा। ऐसी ही सूचना रायपुर के संतोषी नगर से आई। रायपुर के संतोषी नगर चौक की वो सड़क जो बोरिया से जुड़ती है, उसे सील कर दिया गया है। मठपुरैना का रहने वाला मुन्ना चौरे इसी सड़क पर घर जाने के लिए आया, मगर उसका सिर अचानक भारी हो गया, वो बेहोश होने ही वाला था कि पुलिस जवान एस के भारती ने उसे संभाला और ब्रिज के नीचे छांव में बैठने को कहा। पुलिस वाले को करीब आता देखकर मुन्ना ने जिम्मेदारी और चिंता का भाव लिए कहा-सर रुकिए, कोविड से संक्रमित परिवार वाला हूं, मेरे घर के तीन लोग पॅाजिटिव हैं, उनके लिए दवा और सैनिटाइजर लेने निकला था। यह सुनकर पुलिस जवान ने भी सावधानी बरती। जोखिम के बाद भी मुन्ना को पानी कै पैकेट दिया। कुछ देर बाद जब मुन्ना की स्थिति सामान्य हुई तो उसे घर पर ही रहने की हिदायत देकर जाने दिया।

कोरोना की परवाह किये बगैर कुछ लोग माहौल देखने बेवजह सड़क पर निकल रहे हैं। ऐसे लोगों की खोज खबर लेने शहर के हर चौराहे पर पुलिस मुस्तैदी से जांच कर रही है। लोगों से बाहर निकलने की वजह पूछी जा रही है। दस्तावेज जांचने के बाद उन्हें आगे भेजा जा रहा है। गोलमोल जवाब देने वालों को पुलिस घर भेज रही है। कोविड, जांच टीकाकरण के लिए निकले लोगों को डॉक्टर की प्रिस्क्रिपशन या आधार कार्ड दिखाने पर जाने दिया जा रहा है।

अलग-अलग समाज से बहुत से लोग मदद के लिए सामने आ रहे हैं। अग्रवाल समाज ने आक्सीजन सिलेण्डर के साथ अस्पताल की पहल की है। अलग-अलग रहवासी समितियो में लोग अस्पतालो के नंबर साझा कर रहे हैं। गरीबों को पूर्व की भांति निशुल्क खाना खिलाने की पहल प्रांरभ हुई है। बस और रेल्वे स्टेशनो पर गांव लौटने वालों की भीड़ ना हो, लोग पहले की तरह दहशत में ना आये ये भी देखना होगा। पिछली बार से इस बार के बीच सबसे बड़ा अंतर और ताकत यह है की हमारे पास कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध है और अब सौ लोगो के कार्यस्थल पर भी टीकाकरण की शुरूआत हो गई है। जगह-जगह टीकाकरण तेजी से जारी है। बस हमें लोगों से यही कहना है -
तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर।