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भाजपा सरकार ने जनसंपर्क पर 350 करोड़ फूंके थे तब पार्टी के नेताओं को जनसंपर्क का दुरूपयोग नजर नही आया, कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने उठाया बड़ा सवाल

भाजपा सरकार ने जनसंपर्क पर 350 करोड़ फूंके थे तब पार्टी के नेताओं को जनसंपर्क का दुरूपयोग नजर नही आया, कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने उठाया बड़ा सवाल

रायपुर. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं सचिव विकास तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी के द्वारा लगाए गए जनसंपर्क विभाग के दुरुपयोग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं की मति मारी गई है जो अनर्गल और निराधार आरोप लगा लगा रहे हैं. प्रवक्ता विकास तिवारी ने प्रदेश भाजपा से पूछा है कि उन्हें यह बताना चाहिए कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के अंतिम बजट में जनसंपर्क विभाग को साढ़े तीन सौ करोड़ से अधिक का बजट का प्रावधान किया गया था जबकि उस समय कोई महामारी नहीं फैली थी तो जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किसके लिये किया.

जानते चलें कि विधानसभा में भाजपा विधायकों धरम लाल कौशिक और शिवरतन शर्मा द्वारा लगाए गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी सामने आई है कि भूपेश बधेल सरकार ने एक साल में 172 करोड़ से ज्यादा की राशि प्रचार—प्रसार में खर्च की. उसके बाद सरकार और जनसंपर्क विभाग विपक्ष के निशाने पर आ गया है. श्री तिवारी ने कहा कि इसमें से 72 करोड़ रूपये तो वह राशि है जो रमन सरकार ने मीडिया हाउसों को बांटी थी और जिसका भुगतान रूका पड़ा था अत: सहदयी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस राशि को कोरोनाकाल में मीडिया हाउसों को भुगतान कराया ताकि मीडियाकर्मियों को मदद हो सके. अभी भी रमन सरकार के समय का 100 करोड़ से अधिक पुरानी राशि का भुगतान बाक़ी है.

जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने रात दिन मेहनत करके मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बातों को और कोरोना महामारी से बचाव के विश्व स्वास्थ संगठन के गाइड लाइन को घर-घर तक पहुंचाने का काम कर रहे थे. यह एक कठिन चुनौती थी और उसे बखूबी निभाया गया. यह बात भाजपा के कमीशनबाज नेताओं को नागवार गुजरी और उनके द्वारा झूठा आरोप विभाग पर लगाया गया.

प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में इस सरकार की बड़ी राशि पुराना क़र्ज़ चुकाने में जा रही है और इसलिए व्यय की राशि अधिक दिख रही है. कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह जिनके अधीन जनसंपर्क विभाग था, उनके समय जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया जाता था.