breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -शंका-आशंका के बीच वन नेशन-वन राशन कार्ड

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -शंका-आशंका के बीच वन नेशन-वन राशन कार्ड

-सुभाष मिश्र
कहावत है दाने-दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम, पर यह कहावत पते के बिना अधूरी है। यदि दाने-दाने पर खाने वाले के नाम के साथ सही-सही पता भी लिखा होता तो यह दाना उस गरीब को मिल जाता जिसका नाम और हक इस दाने पर है। उचित मूल्य की दुकान का यह अनाज किसी सेठ की गोदाम में पड़ा रहकर कालाबाजारी के काम नहीं आता। जिस तरह बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनाने वाले कारीगर, मजदूर झुग्गी-झोपड़ी में रहने के लिए अभिशप्त हैं, उसी तरह अनाज उगाने वाला गरीब भूखों मरने, गरीबी में जीवन गुजारने के लिए। सरकार जब कोई चमकदार योजना गरीब तबके के लिए लाती है तो उसे सुनकर बेहद सुखद अनुभूति लगती है। अनायास लगने लगता है अच्छे दिन आ गये। जब कोविड-19 जैसी महामारी आती है तो स्वास्थ्य संबंधी उपचार की गारंटी देने वाली आयुष्मान योजना एक तरफ धरी की धरी रह जाती है और अस्पताल, डाक्टर सबको नगद पैसा चाहिए।
सरकार की योजनाएं सबके साथ-सबका विकास स्लोगन के साथ शाईनिंग इंडिया की तरह चमकदार दिखाई देती है किन्तु जमीनी सतह तक आते-आते वह बहुत बदरंग हो जाती है।
प्रसंगवश यहां बाबा नागार्जुन की 1958 में लिखी कविता याद आती है :-
दो हज़ार मन गेहूँ आया दस गाँवों के नाम, राधे चक्कर लगा काटने, सुबह हो गई शाम
सौदा पटा बड़ी मुश्किल से, पिघले नेताराम, पूजा पाकर साध गये चुप्पी हाकिम-हुक्काम
भारत-सेवक जी को था अपनी सेवा से काम, खुला चोर-बाज़ार, बढ़ा चोकर-चूनी का दाम
भीतर झुरा गई ठठरी, बाहर झुलसी चाम, भूखी जनता की ख़ातिर आज़ादी हुई हराम
नया तरीका अपनाया है राधे ने इस साल, बैलों वाले पोस्टर साटे, चमक उठी दीवाल
नीचे से लेकर ऊपर तक समझ गया सब हाल, सरकारी गल्ला चुपके से भेज रहा नेपाल
अन्दर टंगे पडे हैं गांधी-तिलक-जवाहरलाल, चिकना तन, चिकना पहनावा, चिकने-चिकने गाल
चिकनी किस्मत, चिकना पेशा, मार रहा है माल, नया तरीका अपनाया है राधे ने इस साल

देश में बहुत कुछ बदला किन्तु यदि नहीं बदला तो हमारा सिस्टम। जिस तरह हमारे देश के बहुत से मामले सरकार नहीं सुप्रीम कोर्ट तय करती है, उसी तरह अब वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना को भी 31 जुलाई 2021 तक पूरे देश में लागू करने के फरमान सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया हैं। सबके पास एक सा पहचान पत्र, एक सा आधार कार्ड, एक सा मतदाता पहचान पत्र, एक आईडी नंबर, एक राशन कार्ड, एक आयुष्मान कार्ड, स्मार्ट कार्ड, वैक्सीनेशन का एक सा सर्टिफिकेट और जरुरी सुविधाओं व एक्सेस के लिए एक सा कार्ड हो। यह सोच बहुत अच्छी है किन्तु जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन बहुत कठिन है। भारत सरकार ने प्रवासी मजदूरों को बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ अपने मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग देश में करके कहीं भी अपनी पसंद की किसी भी उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए यह योजना बनाई है। जैसा कि अमूमन सरकारी योजनाओं के साथ होता है, वैसा ही कुछ वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना के बाद भी हुआ। पायलट प्रोजेक्ट के रुप में वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना पहले आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र गुजरात में शुरु की गई थी। जनवरी 2020 से 12 राज्यों में को ONORC के तहत क्लस्टर के रुप में एकीकृत किया गया। इसके बाद 2020 में तत्कालीन खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री स्व. रामविलास पासवान ने वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना घोषित की। योजना के अंतर्गत 23 राज्यों के 67 करोड़ लोगों को लाभ होगा। ऐसा बताया गया जो देश की आबादी का 83 फीसदी होगा। यह भी कहा गया है कि मार्च 2021 तक इस योजना से 100 फीसदी हितग्राही जुड़ जाएंगे। मार्च आकर चला गया अब जुलाई की बारी है। इस बार सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। संभव है कि वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना जमीनी स्तर पर क्रियान्वित हो जाये।
योजना के बारे में कहा गया है कि इसका संचालन देश के 32 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा। इसके पहले स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आयुष्मान भारत योजना आई थी। जिसे लेकर कहा गया था यह योजना दुनिया भर के देशों के लिए मिसाल बन जायेगी। लेकिन बहुत से राज्यों ने इसे अपने यहां लागू होने नहीं दिया। तेलंगाना, ओडिशा, दिल्ली, केरल और पंजाब ने इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना से बाहर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वे इस कार्यक्रम को तब तक लागू नहीं करेंगे तब तक कि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, क्योंकि उनके पास बेहतर स्वास्थ्य आश्वासन योजनाएं हैं।
एक देश-एक राशन कार्ड के लिए एक मोबाइल एप लॉन्च किया गया है जिसका नाम मेरा राशन ऐप है। यह मोबाइल ऐप प्रवासी मजदूरों की मदद करने के लिए लॉन्च किया गया है। इस मोबाइल ऐप के माध्यम से देश का कोई भी व्यक्ति किसी भी राशन दुकान से राशन प्राप्त कर सकता है। वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना के उद्देश्यों के बारे में कहा गया है कि देश में फर्जी राशन कार्ड को रोकने में मदद मिलेगी और देश में चल रहे भ्रष्टाचार को रोका जा सकेगा। योजना के लागू होने के बाद यदि कोई व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है तो उसे राशन लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। इस एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड स्कीम का फायदा प्रवासी मजदूरों को अधिक होगा। इन लोगों को पूरी खाद्य सुरक्षा मिलेगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के मुताबिक देश के 81 करोड़ लोग जन वितरण प्रणाली के जरिए राशन की दुकान से 3 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चावल और दो रुपए प्रति किलो की दर से गेहूं और एक रुपए प्रति किलोग्राम की दर से मोटा अनाज खरीद सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को 31 जुलाई तक एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना को लागू करने के लिए कहा, वहीं प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण में अक्षम्य देरी पर केन्द्र की खिंचाई की।
वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना प्रवासी श्रमिकों को उनके काम के स्थान पर अन्य राज्यों में भी राशन प्राप्त करने की अनुमति देती है, जहां उनके राशन कार्ड पंजीकृत नहीं हैं।  
राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पंजीकृत करने के लिए साफ्टवेयर के विकास में देरी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) की मदद से 31 जुलाई तक प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उम्मीद है वन नेशन-वन राशन कार्ड के जरिए सबके हिस्सेे का राशन सबके पास उसी तरह पहुंचेगा जैसी इसकी कल्पना है।