नहीं चाहिए नई पेंशन भविष्य की आस में, पुरानी पेंशन के लिए रहेंगे हम उपवास में

नहीं चाहिए नई पेंशन भविष्य की आस में, पुरानी पेंशन के लिए रहेंगे हम उपवास में

 उपवास रहकर पुरानी पेंशन की मांग

 जब नेताओं को पुरानी पेंशन का लाभ तो कर्मचारियों को नवीन पेंशन की टेंशन देकर भेदभाव क्यों

दंतेवाड़ा, 14 सितंबर। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा दंतेवाड़ा के जिला संयोजक उदयप्रकाश शुक्ला प्रदेश, महामंत्री शैलेश सिंह, प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह चौहान, जिला सचिव नोहर सिंह साहू, खोमेन्द्र देवांगन, सुभाष कोडोपी,शंकर चौधरी, केशव स्वर्ण ने कहा कि 13 सितंबर को छत्तीसगढ़ के एन.पी.एस. कर्मचारियों व शिक्षकों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को व नई पेंशन योजना की जगह पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत जिले के शिक्षकों व कर्मचारियों ने सपरिवार उपवास रहकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री तक ट्विटर अभियान चलाकर अपना मांग पंहुचाया।

 इस अभियान के तहत हमारा मिशन पुरानी पेंशन को लेकर समस्त विभाग के कर्मचारी, शिक्षक, लिपिक, स्वास्थ्य कर्मचारी, अधिकारी, रेलवे कर्मी, बैंक कर्मी, पुलिस कर्मी, पैरा मिलिट्री के जवानों के बुढ़ापे का सहारा पुरानी पेंशन बहाल किए जाने की मांग रखा गया जिले में लगभग दो हजार से अधिक कर्मचारी व शिक्षक हैं, जिन्हें एन.पी.एस. दिया जा रहा है, जो बाजार आधारित पेंशन व्यवस्था है, जिसमें बुढापा के समय नियमित पेंशन राशि नहीं मिलती है।  इस प्रकार पूरा सेवाकाल शून्य चला जाता है।सन 2004 में यह योजना केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया, जिसे अनेक राज्य सरकारों ने भी अपने कर्मचारियों के लिए लागू किया है. इस योजना की विसंगति व नुकसान कर्मचारियों को भोगना पड़ रहा है, जिसके कारण एन. पी. एस. का विरोध करते हुए पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ के साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षक व कर्मचारी पुरानी पेंशन की मांग कर रहे हैं. मोर्चा ने पुरानी पेंशन व्यवस्था की पुरजोर वकालत करते हुए इसे कर्मचारी हितैषी करार दिया है. साथ ही शेयर मार्केट आधारित नई पेंशन व्यवस्था को पूरी तरह कर्मचारी विरोधी बताया है। नई पेंशन योजना में कई खामियां है, पहले शेयर मार्केट में पेंशन फण्ड का पैसा नहीं लगाया जाता था, अब नई व्यवस्था में अंशदायी पेंशन योजना को शेयर मार्केट के साथ छोड़ दिया गया है। इसमें शेयर मार्केट में अगर गिरावट आई तो कर्मचारियों का नुकसान हो जाएगा। इसके अलावा सुरक्षा का भी कोई प्रावधान नहीं है. साथ ही फण्ड मैनेजर की नियुक्ति सहित अन्य खर्चे भी कर्मचारियों के हिस्से से ही जाएगी पुरानी पेंशन सरकार देती है, जबकि नई पेंशन बीमा कम्पनी देगी. यदि कोई समस्या आती है तो हमें सरकार से नहीं बल्कि बीमा कम्पनी से लड़ना पड़ेगा. पुरानी पेंशन पाने वालों को वेतन आयोग के वेतन का लाभ तथा प्रत्येक छःमाही में मंहगाई भत्ते का लाभ मिलता है, जबकि नए पेंशन में एक बार फिक्स किया गया पेंशन ही मिलेगा अर्थात इसमें किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होगा।


पुरानी पेंशन बहाली को लेकर दंतेवाड़ा जिला से दिनेश गवेल,परमानंद ध्रुव,योगेश पटेल,नरेश साहू,भरत दुबे,शिव नेताम,श्रीकुमार परचाकी,मीरा साहू,माधुरी सिन्हा,मल्लिका श्रीरांगे,नारायण साहू,संजीव पैकरा,उषा देवांगन,आनंद साहू,रविन्द्र पटेल,अमित देवनाथ,निर्मला ध्रुव,प्रेम सिंह ठाकुर,आशा किरण सिन्हा,शंकर मरकाम विनीता ठाकुर,जार्ज मारियानुस एक्का,गुलाब सिंह ठाकुर,डूमन लाल मरकाम,केशव स्वर्ण, प्रमोद भदौरिया,सुरेखा बंजारे रॉयल निषाद चरण निषाद अजय सिदार,महेंद्र यादव,जितेंद्र चौहान,अंकित गुप्ता ,दीपक गर्ग,ज्ञानेंद्र चतुर्वेदी,योगेश सोनी दीपमाला वेक, वेदिका नाग माधुरी उइके,आशुतोष शिवहरे,टीकम दास साहू,टांके लाल मरकाम,भवानी प्रसाद कौशिक,पोरस कुमार बिंझेकर व अन्य शिक्षकों ने उपवास रहकर इस कार्यक्रम को सफल बनाया।