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विद्युत विभाग के अफसरों की मनमानी चरम पर, चहेते ठेकेदार को दे रहे लाखो के कार्य

विद्युत विभाग के अफसरों की मनमानी चरम पर, चहेते ठेकेदार को दे रहे लाखो के कार्य

 - सेटिंग कर अनाप-शनाप कमाई में है मस्त काम की गुणवत्ता की हो जांच,उच्च स्तर पर की गई है शिकायत
सूरजपुर । विद्युत विभाग में नियमों को दरकिनार कर अधिकारी ठेकेदारों के साथ सांठगांठ करते हुए टेंडरों के माध्यम से जमकर बंदरबांट कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि विद्युत विभाग के कार्यपालन यंत्री की संलिप्तता है जो अपने चहेते ठेकेदारों को काम दिलवाकर उनसे कमाई में मस्त हैं।

इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी महज औपचारिकता बनकर रह गई है काम तो सिर्फ अधिकारी जिसे चाहे उसे ही मिल रहा है ऐसे में घटिया स्तर के काम कर शासन को चुना तो लगाया ही जा रहा है साथ ही अधिकारी भी मालामाल हो रहे हैं। विद्युत विभाग के ऐसे कारनामों की शिकायत कुछ ठेकेदारों ने उच्च स्तर पर करते हुए अधिकारी की मनमानी से अवगत कराया है और कार्रवाई की मांग की है।बताया गया है कि विद्युत विभाग के कार्यपालन यंत्री वर्षों से यहां जमे हुए हैं और मनमानी पर उतारू है।

पिछले दिनों विद्युत लाइन के सप्लाई के लिए निकाले गए लाखों के टेंडर में नियमों को ताक में रख कर प्रक्रिया का पालन नही करते हुए चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने व टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने आये विद्युत ठेकेदारों को बैरंग वापस लौटना पड़ा इसकी शिकायत कौशलेन्द्र यादव सहित कुछ ठेकेदारों ने की है।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित सूरजपुर द्वारा 9 फरवरी को ऑनलाइन के जरिये 5 कार्यों के लिए निविदा निकाली गई थी। जिसका अंतिम तारिख 24 फरवरी के दोपहर 1: 30 था। निविदा में विश्रामपुर क्षेत्र के लिए सभी कार्य थे। जिसमें से 33 केवी का दो टेंडर और एक 11:00 केवी का था। जो कि पहला निविदा दो लाख 87 हजार 526 एलटी लाइन के लिए, 33 केवी जिसकी लागत दो लाख 86 हजार कुछ रुपये, 33 केवी तीन लाख 35 हजार, 11 केवी का तीन लाख 53 हजार का है। एलटी लाईन तीन लाख 76 हजार का टेंडर निकाला गया था।

प्रक्रिया के अनुसार ठेकेदारों ने 1:30 बजे तक अपना टेंडर डाला मगर भटगांव का एक ठेकेदार नियमों के विपरीत समय सीमा समाप्त होने के बाद सीलबंद बक्से को हार का टेंडर का लिफाफा डाला जिसका अन्य ठेकेदारों ने विरोध भी किया मगर अधिकारी इसको अनदेखा कर दिए कायदे से नियम विपरीत इस टेंडर को रद्द कर देना चाहिए था मगर अधिकारियों ने ऐसा न करते हुए कमीशन के चक्कर मैं अपने चहेते लोगों को काम बांट दिया जिसकी शिकायत की गई है।

 इस बीच कुछ ठेकेदार ने विरोध दर्ज कराई तो उन्हें अगले दफा काम देने की बात कही गई। विद्युत विभाग में अधिकारी खुद ठेकेदारों सेटिंग कर काम बांटने में महारत हासिल कर चुके हैं यही कारण है कि पिछले दिनों निविदा निकालने के पूर्व ठेकेदारों को अधिकारी काम बांट दिए सूत्र बताते हैं कि विद्युत विभाग के अफसरों द्वारा अपने चहेते 2 ठेकेदार को टेंडर के नाम जारी कर दिया गया। जिसमें से एक को 2 कार्य तो दूसरे को 3 कार्य देकर बाकी ठेकेदारो को अगले टेंडर में उन्हें देने की बात कह कर समझौता करा दिया गया। वर्षों से जमे विद्युत विभाग के अफसर व उनके कर्मचारी ऐसे खेल खेल कर कमाई में मस्त है।शिकायत कर्ता ठेकेदार ने ये भी बताया कि जब टेंडर में भाग लेने जाते हैं विद्युत विभाग के ऑफिस में तो अधिकारियों के द्वारा बोल दिया जाता है कि यह टेंडर हमने इनको दे दिया है।

अगला टेंडर आप लोग को दिया जाएगा यह भरोसा दिला कर वापस कर दिया जाता है और अगला टेंडर बगैर निविदा निकाले अपने चहेते ठेकेदार को ही गुप्त तरीके से दे दिया जाता है। 24 फरवरी को 1 ठेकेदार द्वारा निविदा डाला गया एवं कुछ ठेकेदार को कार्यालय के कार्यपालन यंत्री एवं बाबुओं द्वारा टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से यह कहकर रोका गया कि उक्त कार्य हमारे द्वारा कुछ ठेकेदारों को बांट दिया गया है। नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी भय के विद्युत आला अधिकारी ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

जिस पर लगाम कसा जाना आवश्यक हो गया है।टेंडर नंबर 134 के बाद कोई निविदा नेट में नही डाली गई ठेकेदारों ने विद्युत विभाग के टेंडर व विद्युत शिफ्टिंग के कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।

इस संबंध में कार्यपालन यंत्री का पक्ष लिया गया जिसमें उन्होंने कहा कि टेंडर नियमों के अनुरूप ही हुए हैं। बहरहाल विद्युत विभाग के अधिकारियों की मनमानी की शिकायत उच्च स्तर पर ठेकेदारों ने करते हुए जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।