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उम्मीदों की वैक्सीन जनजीवन में आशा का संचार

उम्मीदों की वैक्सीन  जनजीवन में आशा का संचार

उम्मीदों की वैक्सीन  जनजीवन में आशा का संचार

लगता है कोरोना वैक्सीन का लंबा इंतजार अब खत्म होने को है। सबसे पहले खुशी की खबर ब्रिटेन से आई है, जो फाइजर और बायोएनटेक की आपातकालीन मंजूरी देने वाला दुनिया का प्रथम देश बन गया है। ऐसे दौर में जब पूरी दुनिया में साढ़े छह करोड़ के करीब लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, यह खबर उत्साहित करने वाली है। ब्रिटेन में यह वैक्सीन आगामी सप्ताह में उपलब्ध होगी। यानी संक्रमण थामने में ट्रायल में 95 फीसदी सफल बतायी जा रही वैक्सीन का लाभ लोगों को मिलने लगेगा। हालांकि, आम लोगों का इंतजार अभी कुछ?बढ़ सकता है क्योंकि वैक्सीन पहले जोखिम वाले कार्य क्षेत्रों व चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को ही दी जायेगी। एक व्यक्ति को इसकी दो खुराक देने की संस्तुति की गई है।?हालांकि, भारत जैसे देश में इसकी कीमत तथा माइनस सत्तर के तापमान संग्रहण की अनिवार्यता बाधा बन सकती है।?निस्संदेह यह मानवता के लिये सुखद संकेत है जो कोरोना की विश्वव्यापी महामारी से आक्रांत हैं। हमें वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं का ऋणी होना पड़ेगा, जिन्होंने अब तक के रिकॉर्ड समय में यह वैक्सीन मानवता को कष्टों से मुक्त करने के लिये उपलब्ध कराई है। हालांकि, अभी वैक्सीन को कारगर बनाने और उसके प्रभावों का अध्ययन जारी रहेगा ताकि इसे तमाम आशंकाओं से निरापद बनाया जा सके। जब अन्य वैक्सीनें उपयोग में लाये जाने लगेंगी तो तुलनात्मक अध्ययन से इन्हें ज्यादा कारगर व उपयोगी बनाया जा सकेगा। शायद तब लोगों के पास बेहतर विकल्प चुनने का मौका उपलब्ध हो सकेगा। बहरहाल, ये खबरें निराशा के गर्त में डूबी दुनिया में आशा का संचार करने वाली हैं कि देर-सवेर आम आदमी को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध हो पायेगी। जहां इसकी उपयोगिता कसौटी पर होगी, वहीं गरीब मुल्कों के लिये इसकी कीमत मायने रखेगी। बहरहाल, फिर भी संक्रमण की अंधी सुरंग में रोशनी की किरण तो नजर आई है।?उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे जीवन सामान्य होने की ओर बढ़ेगा।

भारत में कोरोना के मोर्चे पर अच्छी खबर आई है। भारत के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने विश्वास जताया है कि दिसंबर के अंत या जनवरी की शुरुआत में कोरोना वैक्सीन के उपयोग को इमरजेंसी अनुमति मिल सकती है। देश में परीक्षण के अंतिम चरण तक पहुंची किसी भी वैक्सीन को ड्रग रेगुलेटर से आपातकालीन अनुमति मिल जायेगी। उसके बाद टीकाकरण की प्रक्रिया गति पकड़ेगी। उल्लेखनीय है कि इस समय देश में छह वैक्सीनों मेें से भारत बायोटेक तथा ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का ट्रायल अंतिम चरण में चल चल रहा है।?बाकी चार वैक्सीनें मार्च के बाद आएंगी। इसमें ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के अंतिम चरण के परीक्षण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आ चुके हैं। अच्छी बात यह है कि भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया भी कह चुकी है कि वे जल्दी ही वैक्सीन की इमरजेंसी अप्रूवल के लिये प्रयास कर रहे हैं। डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि अब तक जो डेटा मिला है, उसके मद्देनजर माना जा सकता है कि वैक्सीन कारगर व सुरक्षित है। हम सुरक्षा व उपादेयता से कोई समझौता नहीं करेंगे। जिन करीब सत्तर-अस्सी हजार लोगों पर वैक्सीन लगायी गई है, उनमें किसी तरह के नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखे हैं, जो हमारी उम्मीदों का आधार हैं। इसके आधार पर वैक्सीन की अल्पकालिक उपयोगिता निर्विवाद है। ?सीरम इंस्टिट्यूट ने कोल्ड स्टोरेज में भारत के लिये दस करोड़ वैक्सीन की डोज तैयार कर दी हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि जांच व मरीजों के उपचार में लगे स्वास्थ्यकर्मियों और सफाई कर्मियों तथा कोरोना वॉरियर्स समेत पचास साल से अधिक ?उम्र के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन उपलब्ध करायी जाये। सरकार वैक्सीन वितरण नीति को अंतिम रूप देने में लगी है। संभव है आम लोगों को वैक्सीन के लिये थोड़ा अधिक इंतजार करना पड़े। सरकार का लक्ष्य पहले तीस करोड़ लोगों को वैक्सीन उपलब्ध कराना है।?वहीं राज्यों को अपनी प्राथमिकता वाले समूहों की पहचान करके वैक्सीन देने की छूट होगी।?केंद्र सस्ती दरों पर वैक्सीन उपलब्ध करायेगा।