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अ.ज.जा. आयोग के सदस्य नितिन पोटाई मिले राज्यपाल अनुसुईया उइके से

अ.ज.जा. आयोग के सदस्य नितिन पोटाई मिले राज्यपाल अनुसुईया उइके से

कांकेर, 1 नवंबर। राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम अनुसुईया उईके से सौजन्य भेंट कर अनुसूचित जनजातियों के हित से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। 


राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से उपाध्यक्ष सुश्री राजकुमारी दीवान, आयोग के सचित एच.जे.सिंह उइके निज सहायक जयसिंह राज एवं संदीप कुमार नेताम ने भी आयोग से संबंधित बातें रखी। आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने राज्यपाल महोदया को आदिवासियों की हितों के लिए दिये जा रहे संरक्षण पर धन्यवाद दिया। श्री पोटाई ने बस्तर की ओर राज्यपाल महोदया का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बस्तर में आदिवासियों को नक्सली बताकर जेल में बंद किया जा रहा है फर्जी नक्सली मुटभेड़ में निरीह एवं बेबस आदिवासियों को मारा जा रहा है। बस्तर की अकुत संपदा को लूटने की होड़ मची हुई है जिससे आदिवसियों का हक मारा जा रहा है। बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के बाहर के लोगों का बस्तर में आगमन हो रहा है जिससे उनकी कला संस्कृति के साथ-साथ रोटी रोजी की भी समस्या उत्पन्न हो रही है। राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने राज्यपाल अनुसुईया उइके जी से निवेदन किया कि आदिवासियों को पद्दोन्नती में आरक्षण का लाभ दिया जाने एवं मनोज पिंगुआ कमेटी के रिपोर्ट को वास्तविक आकड़ों के आधार पर रिपोर्ट सौपे जाने के लिए राजभवन की ओर से सार्थक पहल हो। राज्यपाल महामहिम अनुसुईया उइके ने प्रतिनिधि मंडल के बातों को न सिर्फ ध्यान से सुना बल्कि कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये इस अवसर पर आयोग की ओर से एक रिपोर्ट भी सौंपी गई। आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने तीन महिने के कार्यकाल के विषय में किये गये कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि  आयोग के द्वारा कवर्धा जिले के झलमला थाना अंतर्गत फर्जी नक्सली मुटभेड़ में मारे गये आदिवासी परिवार के झामसिंग धुर्वे की मौत की जांच, बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिला के आलनार में फर्जी ग्राम सभा के सहारे आयरन ओर की लीज आरती स्पंज कंपनी को दिये जाने एवं श्यामगिरी में आदिवासियों पर बरबरतापूर्वक पुलिस द्वारा किये गये लाठी चार्ज के विषय में आयोग संज्ञान लेकर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होने कहा कि तीन महिनें के कार्यकाल में निरंतर कार्य करने से आदिवासी वर्ग के लोगों में आयोग के प्रति विश्वास बढ़ा है। राजभवन संरक्षण मिलने से आदिवासियों के हित में और भी बेहतर ढंग से कार्य हो पायेगा।