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अधिक मात्रा में गोबर बेचने वालों पर प्रशासन की नजर

अधिक मात्रा में गोबर बेचने वालों पर प्रशासन की नजर

धमतरी, 23 फरवरी। राष्ट्र स्तर पर छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना की चर्चा चहुंओर चर्चित है। छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना को राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा 20 जुलाई 2020 को किसानो/पशुपालको को लाभ पहुंचाने के लिए शुरू की गयी है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा गाय पालने वाले पशुपालक किसानो से गाय का गोबर खऱीदा जा रहा है। इसके तहत पशुपालक से खऱीदे गए गोबर का उपयोग सरकार वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए करेगी। इसके अंतर्गत प्राप्त किए गए कॉउ डंग को वर्मी कंपोस्ट फर्टिलाइजर बनाने के लिए प्रयोग किया जाएगा। यह फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से बेचा जाएगा जिससे कि किसान, वन, बागवानी, नगरीय प्रशासन विभाग आदि की फर्टिलाइजर की आवश्यकता पूरी हो सके। गोबर की खरीद का जिम्मा छत्तीसगढ़ राज्य नगरीय प्रशासन का होगा। यह वर्मी कंपोस्ट 10 रूपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। सरकार द्वारा इस योजना के ज़रिये 2 रूपये प्रतिकिलो की दर से गाय का गोबर खऱीदा जायेगा। 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गोधन न्याय योजना की शुरूवात से पशुपालकों के लिये जो योजना लागू की गई है, उसमें देशी गाय के गोबर की खरीदी किया जाना प्रस्तावित किया गया है परंतु देखा जा रहा है कि शहरी क्षेत्र में जो गोबर खरीदी सरकार के आदेश पर निगम अमला कर रहा है उसमें जर्सी गाय, भैंस के गोबर को भी समाहित किया जा रहा है। तुर्रा यह कि उसमें रेत भी मिली रहती है जिसके कारण वर्मी कम्पोस्ट बनाये जाने की विधि में कुछ व्यवधान उत्पन्न होने की संभावना प्रतीत होती है। कहा जाता है कि गोधन न्याय योजना का लाभ शहरी स्तर पर किया जा रहा है क्योंकि गोठान निर्माण में काफी विलंब किया जा रहा है जिसके चलते अनेक ग्रामों के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे लोगों का तर्क है कि जब तक गोठान निर्माण नहीं होगा, तब तक वर्मी कम्पोस्ट बनाये जाने के उद्देश्य से की जा रही गोबर खरीदी में उतना तेजी नहीं आयेगी। अब इस गोधन न्याय योजना का जो लोग लाभ प्राप्त कर रहे हैं, उसमें अब अधिक मात्रा में गोबर बेचने वालों पर प्रशासन की नजर लग चुकी है। वे ये देख रहे हैं कि कौन से क्षेत्र में ज्यादा गोबर किन-किन लोगों द्वारा बेचा जा रहा है और इससे मध्यम श्रेणी के किसान लाभान्वित हो रहे हैं कि नहीं। इसी उद्देश्य से अधिक गोबर बेचने वालों की पतासाजी की जा रही है। निगम अंतर्गत जितने भी गोधन न्याय योजना के सेंटर बनाये गये हैं, उसमें वर्मी कम्पोस्ट के लायक गोबर का संग्रहण नहीं किया जा रहा है। न ही निगम द्वारा इसमें कोई दिलचस्पी दिखाई जा रही है। इस मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ मयंक चतुर्वेदी से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष लिया गया तो उन्होंने बताया कि जिले में कुछ किसानों द्वारा अधिक मात्रा में गोबर बेचने की जानकारी मिली है। ऐसे लोगों पर प्रशासन की नजर है।