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प्रधानमंत्री को twitt कर वरिष्ठ नागरिकों के सावधि जमा पर न्यूनतम 10% और बचत खाते पर 6% प्रतिशत ब्याज दर का प्रावधान करने की मांग

प्रधानमंत्री को twitt कर वरिष्ठ नागरिकों के सावधि जमा पर न्यूनतम 10% और बचत खाते पर 6% प्रतिशत  ब्याज दर का प्रावधान करने की मांग


देश में सार्वजनिक उपक्रम एवं निजी क्षेत्र रिटायर सीनियर सिटीजन कम ब्याज दर का दर्द झेल रहे है


    भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने प्रधानमंत्री मन्त्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री कार्यालय में ट्यूट कर देश भर के वरिष्ठ नागरिकों के सावधि जमा पर ब्याज दर 10%प्रतिशत करने तथा बचत खाता पर 6%प्रतिशत ब्याजदर लागू करने हेतु वित्त मंत्री को निर्देश देकर कार्यवाही करने की मांग की है।


        जारी विज्ञप्ति में आगे बताया है कि लगभग दस वर्ष पहले पोस्ट ऑफिस, बैंक, को-ऑपरेटिव सोसायटी आदि वित्तीय संस्थाओं में सावधि जमा योजनाओं में जमा राशि पर 10% से अधिक ब्याज मिलती थी।परन्तु गत कुछ वर्षों में, शासन द्वारा तय आर्थिक नीति के कारण, ब्याज दरों में लगातार कमी हो रही है। वर्तमान में सीनियर सिटीजन को पोस्ट आफिस और बैंकों में फिक्स डिपाजिट पर 7.4% लागू दर पर अधिकतम 15 लाख की सीमा है तथा पोस्ट आफिस में मंथली इन्कम प्लान में मात्र 6% व्याज दर है जो महंगाई के बढ़ती दर के हिसाब से बहुत कम है। इसका विपरित असर सीधा वरिष्ठज़नों पर हो रहा है। केन्द्र सरकार अनेक मोर्चों पर प्रशंसनीय कार्य कर रही है, यह निर्विवाद सत्य है। देश में आम जनता की खुशयाली बढ़े, समाज में सबसे निचले तबके की क्रयशक्ति बढ़े।इस  दिशा में भरसक प्रयास हो रहे है इसमे सन्देह नही है,किन्तु ब्याज दरों में कटौती होने के कारण एक बड़े तबके की क्रयशक्ति घट रही है यदि इसकी भनक सरकार को नही है तो यह आश्चर्यजनक है । ज्येष्ठ नागरिकों के अर्थात वृद्धजनों के समुदाय में समाज के सभी वर्गों का समावेश होता है। उसमें सेवानिवृत्त केन्द्र एवं राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, सेवानिवृत्त श्रमिकों का तबका हैं, सेवानिवृत्त  छोटे बड़े व्यावसायिक हैं, वृद्ध किसान आदि सभी हैं,साथ ही इसमें अल्प मात्रा में पेन्शन की सुविधा पानेवाले वालों की संख्या भी शामिल है। 

जारी विज्ञप्ति बताया है कि अपने देश के नागरिकों की मानसिकता है कि कठिन परिश्रम से अर्जित अपना पूरा का पूरा धन तुरन्त खर्च करने की नही होती। भविष्य में उपस्थित होने वाली जिम्मेदारियों का सामना करने के लिए और बुढापे में आत्मनिर्भर रह कर स्वाभिमानपूर्वक जीवन यापन हो सके इसके लिए, हर व्यक्ति उसके अपने कार्यकाल में अर्जित धनराशि का कुछ हिस्सा अलग निकाल कर बचत करने हेतु  वित्तीय संस्थाओं मे जमा रखने का कार्य करते है। इस अपेक्षा से कि सम्पूर्ण जीवनकाल में उसे अपेक्षानुरूप ब्याज मिलती रहेगी और वह निश्चिन्त होकर धनराशि जमा कर्ता वित्तीय संस्थाओं को सौपता देता है। लेकिन गत दस वर्षो से घटते हुए ब्याज दरों के कारण ज्येष्ठ नागरिक काफी चिंतित हैं और जिनका कोई सहारा नही वे बेहाल हैं। जिनके ऊपर घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी है, उनकी अवस्था अत्यधिक शोचनीय होती जा रही है।

       यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक उपक्रमों या निजी संस्थानों रिटायर होने वाले सीनियर सिटीजन का पेंशन न्यूनतम होता है।उनके रिटायरमेंट के बाद जीवन यापन का सहारा बैंकों में फिक्स डिपाजिट में जमा राशि से मिलने वाली आय ही होती है, जो इन दिनों ब्याज दर कम होने का दर्द झेल रहे है।

जारी विज्ञप्ति में उन्होनें अपनी वेदना व्यक्त करते हुये कहा है कि आर्थिक विचारों में जाने अन्जाने में हम पाश्चात्यों का अनुकरण करने का प्रयास कर रहें है, जब कि पाश्चात्यों और भारतीयों की मानसिकता में ही बहुत अन्तर है। पाश्चात्य समुदाय सदियों तक दुनिया को लुटता रहा और लूट का धन जिस गति से आता है उसी गति से उसे खर्च करने की स्वाभाविक मानसिकता होती है। आज़ भी पाश्चात्य देशों की मानसिकता उन्ही संस्कारों से प्रभावित है।जिसमें

  बचत के लिए जादा प्रोत्साहन नही होता। कमाओ खर्च करो, जेब में पैसे नही तो ओव्हरड्राफ्ट की सुविधा लो। इसके विपरित, भारतीयों ने कभी किसी को भी लुटा नही हैं। हम लोग परिश्रम से अर्जित धन को लक्ष्मी के रूप में देखते है इस लिए उसे सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं। हमारी बचत करने की  इस सीधी साधी आदत को आधुनिक आर्थिक रचना के अनुसार ढालने का प्रयास हमें साधनहीन बना रहा है और कष्ट दे रहा है।

उन्होंने जारी विज्ञप्ति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज्येष्ठों के प्रति संवेदनशील निरूपित करते हुए वरिष्ठ नागरिकों को अधिकाधिकआर्थिक सुरक्षा एवं सुविधा प्रदान करने  और उन्हें सभी प्रकार की सावधि योजनाओं में जमा राशि पर न्यूनतम 10% और बचत खाते पर 6% की दर से ब्याज देने का कनूनन प्रावधान करने की मांग की है।