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जहां चाह वहां राह : लाकडाउन के दौरान मास्क बनाकर महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर

जहां चाह वहां राह : लाकडाउन के दौरान मास्क बनाकर महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर

 जांजगीर-चांपा।  कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में जिले की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने फाइटर की तरह काम करते हुए कॉटन के मास्क तैयार किए। लाकडाउन के दौरान जब लोंगों का घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध था। ऐसे समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने ‘‘जहां चाह वहां राह‘‘ का रास्ता अपनातें हुए अपनी आजीविका का साधन ढुंढ लिया। घर में रहकर कपड़े का मास्क सिलने लगी। जब बाजार में मास्क की किल्लत थी ऐसे समय में दिन-रात काम करते हुए लोगों को यह डबल लेयर के मास्क कम कीमत पर मुहैया कराए।

      जिले की 134 समूह की 213 महिलाओं ने लॉकडाउन के दौरान घर पर रहते हुए कॉटन के कपड़े की डबल लेयर सिलाई करते हुए मास्क तैयार किए। विभिन्न रंगों में तैयार किए गए यह मास्क लोगों को बहुत पसंद आया। लॉकडाउन के दौरान बाजार में मास्क कम मात्रा में उपलब्ध थी । ऐसे में समूह के द्वारा बनाए गए यह मास्क गांव में ही आसानी से बहुत सस्ती दर पर उपलब्ध कराया गया। सरकारी दफ्तरों, मनरेगा के मजदूरों, वन विभाग के कर्मचारियों के द्वारा भी इनका उपयोग किया गया।

सिलाई का काम जानने के कारण मास्क बनाने का काम हुआ आसान-

     जिले की सक्ती जनपद पंचायत की कलस्टर नगरदा के स्व सहायता समूह की सदस्य शारदा सुमन, जागो बहना समूह की संतोषी चैहान, जेठा कलस्टर के समूह लक्ष्मी की मीना साहू का कहना है कि से कर सकें। कोरोना वायरस महामारी की इस मुश्किल घड़ी में समूह की महिलाओं द्वारा मास्क बनाकर ग्रामीणों को वितरित किया गया है। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किया गया मास्क 10 रूपए प्रतिनग बेचा गया। साथ ही कुछ मास्क को फ्री में भी वितरण किया गया। कपड़े से बना यह मास्क फिर से धोकर प्रयोग किये जा सकते है। इस कार्य से घर बैठे ही आमदनी होने लगी।  जिससे लाकडाउन के दौरान भी परिवार का गुजर-बसर आसानी से हुआ।

मास्क बनाने से हुई आमदनी-

    शासन के निर्देशानुसार लॉकडाउन के दौरान घर से बाहर निकलते समय सभी को मास्क लगाना अनिवार्य किया गया। इसको देखते हुए एनआरएलएम बिहान से जुड़ी समूह की महिलाओं को मास्क बनाने के लिए प्रेरित किया गया। समूह की महिलाओं को इससे आर्थिक रूप से मदद भी मिली। वन विभाग के माध्यम से भी 20 हजार कॉटन के मास्क बनाने का एनआरएलएम शाखा को आर्डर प्राप्त हुआ। इसके अलावा महात्मा गांधी नरेगा के तहत चल रहे कार्यों में भी मजदूरों को भी इन मास्क का वितरण किया गया। जिले में समूहों के माध्यम से लगातार कपड़े के मास्क बनाने का काम किया जा रहा है।

नरवा गरवा घुरवा और बारी योजना से भी हो रही आमदनी-

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए शासन की योजना की तहत अन्य व्यवसायों से भी आमदनी प्राप्त कर रही है। राज्य सरकार की महत्वकाक्षी योजना नरवा गरवा घुरवा और बारी योजना में भी अपना योगदान दे रही है। गौठानों से जुड़े स्व-सहायता समूह सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन, मछली पालन, वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करने के काम सहयोग कर अपनी आमदनी का जरिया बना रही है।