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एनीमिया के कारण भारत में 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की मौत

एनीमिया के कारण भारत में 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की मौत

दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में एनीमिया के मामले विश्व के 85 प्रतिशत

नयी दिल्ली।  भारत में 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की मौत एनीमिया के कारण होती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 (एनएफएचएस-4) के अनुसार देश में 53 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित होती हैं।

विश्व की सौंदर्य प्रसाधश क्षेत्र की प्रमुख द प्रॉक्टर एंड गैम्बल की स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद डिविजन पीएंडजी हेल्थ ने इसकी गंभीरता को देखते हुए सोमवार ‘पीएंडजी ब्लड हेल्थ फोरम’ के शुभारंभ की मेजबानी की। यह चिकित्सा शिक्षा को साझा करने के सत्रों की एक वर्चुअल श्रृंखला है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ शामिल हुए। इसका लक्ष्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की उस चुनौती को दूर करना, जो एनीमिया के कारण पूरी दुनिया के सामने बनी हुई है।

भारत इस मामले में विश्व के उन देशों में शामिल है, जहां एनीमिया सबसे अधिक है। एक आकलन के अनुसार यहां जन्म देने वाली 80 प्रतिशत माताओं की मृत्यु एनीमिया के कारण होती है और एनएफएचएस-4 के अनुसार देश में 53 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।

वर्तमान में लगभग 2.3 अरब लोगों को एनीमिया है, प्रत्येक दो में से एक व्यक्ति को आयरन डेफिशियेंसी एनीमिया (आईडीए) है और वे बार -बार थकान, चक्कर, पीलापन, खराब इम्युनिटी जैसे लक्षणों से पीड़ित रहते हैं। इससे उनके जीवन की गुणवत्ता और उत्पादनशीलता प्रभावित हो रही है। दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में एनीमिया के मामले पूरे विश्व का 85 प्रतिशत है।

इस साल का शुरुआती सत्र एशिया के सात देशों में वर्चुअल तरीके से आयोजित हुआ, जिसका थीम था ‘आयरन और माइक्रोन्यूट्रियेन्ट की कमी का जल्दी पता लगाकर और उसे नियंत्रित कर खून स्वास्थ्य को सही रखना’। चर्चा के सत्रों का नेतृत्व प्रमुख विशेषज्ञों के अंतर्राष्ट्रीय वक्ता फैकल्टी ने किया, जो एनीमिया, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आयरन फिजियोलॉजी और न्यूट्रिशनल हेल्थ जैसे क्षेत्रों के थे। रोगियों में आयरन की कमी और एनीमिया की जांच, संवाद और नियंत्रण पर व्यापक विषयों की चर्चा हुई।

पीएंडजी स्वास्थ्य- एशिया प्रशांत, पश्चिम और अफ्रीका के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कहा, ‘‘आज एनीमिया विश्वभर में सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा है, और यह दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में सबसे अधिक है। इसके अलावा यह स्वास्थ्य का ऐसा जोखिम है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों - महिलाएं और बच्चे को असंगति से प्रभावित करता है।"

 अग्रवाल ने कहा," पीएंडजी ब्लड हेल्थ फोरम में हम एनीमिया, आयरन फिजियोलॉजी और न्यूट्रीशनल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में विश्व के अग्रणी विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए प्रसन्न हैं, ताकि वे जानकारियों का आदान-प्रदान कर सकें और एनीमिया की वैश्विक स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिये मिलकर काम कर सकें। वैज्ञानिक शोध और चिकित्सकीय जानकारियों के लाभदायक आदान-प्रदान के लिये एक मंच प्रदान कर हम एनीमिया से लड़ने में सबसे प्रभावी दृष्टिकोण और टूल्स पर बेहतर जागरूकता उत्पन्न करने की उम्मीद करते हैं।’’

इस पहल के हिस्से के तौर पर पीएंडजी हेल्थ ने ‘एशिया एंड ओशेनिया फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी’ (एओएफओजी) के साथ रणनीतिक भागीदारी की घोषणा भी की, जिसके साथ मिलकर भविष्य की पेशेवर और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों पर काम किया जाएगा। इसमें ‘ब्लड हेल्थ फोरम’ के वर्चुअल सत्रों की एक श्रृंखला शामिल है, जो शिक्षा, जागरूकता और अंततः रोगियों के बेहतर परिणामों के लिये तैयार विषयों पर होगी।

इस फोरम में एशिया के स्वास्थ्यरक्षा क्षेत्र से 2500 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया, जिनमें 1000 देश से थे। इनमें चिकित्सा विशेषज्ञ, जैसे प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन और हीमेटोलॉजिस्ट शामिल थे।

डॉ. रिश्‍मा पई अध्यक्ष मुंबई ऑब्‍स्‍टेट्रिक्‍स एंड गायनेकोलॉजी सोसायटी ने इस सच्‍चाई पर जोर देते हुए कहा, “आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया एक आम पौष्टिक स्थिति है जोकि पूरी दुनिया में बच्‍चों और महिलाओं को प्रभावित करती है। भारत में,अध्‍ययनों में पता चला है कि 53 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं आयरन की कमी से पीड़ित हैं और गर्भावस्था एवं डिलीवरी के दौरान उन्‍हें गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं होने का बड़ा जोखिम होता है। यह एक बड़ी चुनौती है और इसलिए शिक्षा एवं जागरुकता की जरूरत है। मेडिसेज प्‍लेटफॉर्म पर आयोजित पीएंडजी का ब्‍लड हेल्‍थ फोरम सकारात्‍मक बदलाव लाने की दिशा में एक अगला कदम है। इससे समूचे विश्‍व में नई वैज्ञानिक जानकारियों, कौशल निर्माण और टूल्‍स से सीमाओं को खोलने में मदद मिलेगी और हेल्‍थकेयर पेशेवरों में एनीमिया का प्रभावी उपचार करने के लिए जागरुकता बढ़ेगी। साथ ही आयरन की कमी और इससे जुड़ी समस्‍याओं के चक्र को तोड़ने में भी मदद मिलेगी।”

इस वर्ष पीएंडजी ब्लड हेल्थ फोरम आयरन की कमी और एनीमिया पर पीएंडजी हेल्थ के इंटरनेशनल कंवेंशन का दूसरा संस्करण है। यह ज्यादा लंबा, स्वस्थ और जोशीला जीवन जीने के लिये उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के पीएंडजी हेल्थ के लगातार जारी लक्ष्य का हिस्‍सा है।