breaking news New

साहित्यकारों का दीवाली मिलन कार्यक्रम : तो क्यों न जलायें दीप अपनी माटी का।

साहित्यकारों का दीवाली मिलन कार्यक्रम :  तो क्यों न जलायें दीप अपनी माटी का।


जगदलपुर।  रविवार 7 तारिख को साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर ने बड़े हर्षोल्लास के साथ साहित्यकारों का दीवाली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया। जगदलपुर के वरिष्ठ और कनिष्क साहित्यकारों अपनी रंगीन फुलझड़ी और बम की कविताओं से खूब आनंद उठाया। 

कारगिल में तैनात सेवानिवृत्त फौजी  ललित जोशी के मुख्य आतिथ्य में साहित्यकारों ने देशभक्ति की ढेरों रचनायें प्रस्तुत की। सोनी गली सुभाष वार्ड में आयोजित इस कार्यक्रम में वहां के रहवासियों ने भी बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया।  प्रसिद्ध समाजसेवी एवं योग शिक्षिका श्रीमती शोभा शर्मा एवं समाजसेविका एवं साहित्यकार श्रीमती शैल दुबे ने मां सरस्वती की आराधना कर कार्यक्रम का आरम्भ किया गया।

लोककवि एवं गजल गायक विपिन बिहारी दाश ने अपनी मोहक गजलों ने सबका मन मोह लिया। इस मौके पर उन्होंने अपने दूसरे काव्य संग्रह ’तन्हाई’ का उपस्थित साहित्यकारों एवं सोनी गली के रहवासियों के बीच वितरण किया। 


शैल दुबे ने रामायण एवं ग्राम जीवन पर आधारित रचना का पाठ किया। 

दिल में संजोये यादों को, चलो फिर से सजाएं

जहां बिताया बचपन अपना, उसी गांव की सैर कराएं।

भानपुरी से आयी कवयित्री श्रीमती अलका पाण्डे ने दीपावली पर अपनी कविता सुनायी।

हम मना रहे दीपावली त्योहार अपनी परिपाटी का

तो क्यों न जलायें दीप अपनी माटी का।

राष्ट्रीय मंचों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाली श्रीमती अंजली तिवारी ने मां पर केन्द्रीत रचना से सबका मन मोह लिया।

तुझे भूल गया हूं मां मगर तेरी याद नहीं भूला,

तुझे छोड़ गया हूं मां मगर तेरा साथ नहीं छोड़ा।

बस्तर क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाकार शशांक श्रीधर ने मां और मिट्टी को लेकर अपनी श्रेष्ठ रचनाएं प्रस्तुत की।

ममता जैन मधु ने अपनी प्रसिद्ध रचना ’हां मैं एक चिन्गारी हूं’ का पाठ किया।

बस्तर से आयी सरिता ओझा ने प्रथम बार मंच साझा किया। उन्होंने पढ़ा-आओ अब हम तुम दोनों लौअ चले घर की ओर। 

कोण्डागांव के कलम के धनी विश्वनाथ देवांगन ने अपनी छत्तीसगढ़ी और हल्बी रचनाओं का पाठ किया।

सरगी फूल कितरो सुंदर, गंदेसे रसुम रसुम फूल

दिनेर बस्तर इहा दादा, बलून दखवां सरगीफूल।

कोण्डागांव से ही पधारे श्रवण मानिकपुरी ने अपनी हल्बी रचनाओं का किया।

हामचो देश के गुलामी चो सिकरा बांधाले

छंडातो काजे किसिम किसिम चो जतन करला,

कोनी गेला जईल कोनी गोली खाउन मरला।

वरिष्ठ साहित्यकार जयचंद जैन ने एक संसमरण सुनाया और बताया कि मां के प्रति समाज का नजरिया किस तरह से बदलता जा रहा है।

लोककवि नरेन्द्र पाढ़ी ने अपनी हल्बी रचनाओं से हास्यरस की बौछार कर दी।

ऋषि शर्मा ऋषि जी ने तरन्नुम में गजल सुना कर सभा को भाव विभोर कर दिया।

सतरूपा मिश्रा जी ने नारी शक्ति पर केन्द्रित अपनी रचनाओं का पाठ किया।

युवा कवि किशोर मनवानी जी ने अपनी देशभक्ति की रचनाओं का पाठ किया।

डॉ कौशलेन्द्र मिश्र ने देशभक्ति पर केन्द्रित अपनी रचनाओं में संदेश दिया कि झूठे स्थापित सत्य को बदलना समय की जरूरत है।

इस कार्यक्रम में साहित्यकार एवं बैडमिंटन खिलाड़ी डॉ प्रकाश मूर्ति का राष्ट्रीय बैडमिंटन स्पर्धा में डबल्स में प्रथम आने व सिंगल्स में तीसरा स्थान पाने पर उनका साहित्य एवं कला समाज द्वारा सम्मान किया गया।

कोण्डागांव से आये गणेश मानिकपुरी एवं अनिल यादव अपनी हल्बी हिन्दी रचनाओं से सभी को आनंदित किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुये सनत सागर अपनी हास्य रचनाओं से उपस्थित जनसमूह को गुदगुदाते रहे। नशेबाजों पर व्यंग्य करते हुये कहा कि उनको हिम्मत की दुनिया में जाते देखा है, चुपके से गालों के बीच गुटका दबाते देखा है।

अंत में मास्टर देव जैन ने अपनी ढोलक बजाने की प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध समाजसेवीका सुश्री अनिता राज एवं नारी सशक्तिकरण की कवयित्री डॉ सुषमा झा, बस्तर के जाने माने चित्रकार श्री बी एल विश्वकर्मा, सुश्री चमेली कुर्रे, बाबू बैरागी, साहित्य प्रेमी राजेश लाल, श्याम सुंदर तिवारी, आचार्य जी, तिवारी परिवार, सोनी परिवार श्रीवास्तव परिवार आदि शुरू से अंत तक जमे रहे। इस कार्यक्रम के प्रायोजक सन्मति इलेक्ट्रीकल्स का सभी ने आभार व्यक्त किया।