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व्यंग्यः पुस्तक - वाहन और आदमी - अखतर अली

व्यंग्यः पुस्तक - वाहन और आदमी - अखतर अली


 नामवर सिंह जी से संबंधित एक किताब में इतेफ़ाकन कुछ गड़बड़ हुई तो प्रकाशक ने पुस्तक बाज़ार से वापस मंगा लिया और कहां इसमें सुधार कर वापस भेजेगे | कुछ वर्षों पूर्व एक वाहन के साथ भी ऐसा ही वाकया हुआ था | उसमें कुछ तकनीकि गड़बड़ थी जिसके चलते कम्पनी ने त्रुटिपूर्ण कार बाज़ार से वापस मंगवा ली थी और कहा था इसमें ज़रूरी सुधार करने बाद फिर बाज़ार में भेजेगे । हे प्रभु . हे सर्वशक्तिमान , ए कुल कायनात के मालिक जब प्रकाशक और कार निर्माता अपने प्रोडक्ट की खामी को स्वीकार कर अपनी साख की चिंता कर रहे है तो आप पीछे क्यों हो ? आपके मानव निर्माण के कारखाने से भी कुछ त्रुटिपूर्ण प्रोडक्ट ओ.के. टेस्टेड की मुहर लग दुनियां के बाज़ार में आ गये है | इनकी ठीक से फिटिंग नहीं हुई है | दिमाग़ की वायरिंग में गड़बड़ी है | लूज कनेक्शन जैसा मामला है । प्रभु जी मेरे को ऐसे प्रोडक्ट आपकी साख के अनुकूल नहीं लगते है | उनका चेहरा भी पुस्तक के मुख्य पृष्ठ की तरह आकर्षक है , पुस्तक की उत्कृष्ट छपाई की तरह इनके भी शरीर की सुंदर बनावट है | लेकिन पुस्तक की सामग्री की तरह इनकी अंदरूनी सामग्री त्रुटिपूर्ण है | कार की बाड़ी की तरह इनका शरीर सुडौल और सुंदर है | स्पेस इनके भीतर भी व्यापक है । गति और एवरेज भी बढ़िया है | प्रति घंटा सौ कि.मी. की गति से काम करते है लेकिन इनकी बुद्धि में कार्बन बहुत जल्दी जम जाता है | गति तेज है लेकिन ब्रेक फेल है । प्रभु किताब और गाड़ी की तरह टेक्नीकल फाल्ट वाला आदमी भी समाज के लिये घातक होता है | प्रभु मै आप को मशविरा नहीं दे रहा हूं इतनी मेरी औकात कहां ? मैं तो बस एक बात कह रहा हूं कि आप भी अपने त्रुटिपूर्ण प्रोडक्ट की मरम्मत के लिये कुछ जुगाड़ कीजिये न ।


रिपेयरिंग कर के फिर दुनियां में जगमगाने के लिये दुनियां की भीड़ में शामिल कर लेना | फिर ये भी बांये से चलेगे | इंसान को देख कर मुस्कुरायेगे | दो और दो चार कहेगे | अच्छी कविता को ही अच्छी और अच्छे व्यंग्य को ही अच्छा व्यंग्य कहेगे | पुरुषो की पोस्ट भी पढेगे | खेमेबाज़ी से दूर रहेगे | न रिश्वत देगे न रिश्वत लेगे | पत्नी के प्रति वफादार रहेगे । जनसंख्या नियंत्रण में सहयोग करेगे । ए मेरे अल्लाह मेरी इल्तेजा है कि सब से महत्वपूर्ण होता है बैलेंस बना कर रखना | त्रुटिपूर्ण आदमी संबंधो का बैलेंस बिगाड़ देता है । इसके लिये निहायत ज़रूरी है कि जब भी लक्ष्मीकांत बनाओ तो साथ में प्यारेलाल भी बनाना | हर अमृता प्रीतम के साथ एक इमरोज़ होना चाहिये प्रभु जैसे हर कंपनी शहर शहर में अपने डिपो और रिपेरिंग याई खोलती है वैसे ही आपने में भी अपना डिपो खोला हुआ है जिसका नाम अस्पताल है । वहाँ आपके फ़रिश्ते डाक्टर के रूप में सेवाए देते आ रहे है । मेरा निवेदन है पहले अस्पताल नामक अपने रिपेरिंग सेंटर को निरस्त करिये और नया सर्विस सेंटर स्थापित कीजिये | फिर मरम्मत के लिये कुछ डाक्टर नामक फरिश्तो को वापस बुलाइये । इन में कुछ फ़रिश्तो का पेट ज्यादा बड़ा हो गया है । इनकी सर्जरी जरूरी हो गई है । हे ईश्वर ऐसा सुधार कार्य आरंभ कीजिये जिससे शंकालु । ईर्ष्यालु , झगडालू , अहंकारी और चिडचिडे लोगो की बुद्धि में लगे वायरस क्लीन हो जाये | इनकी अक्ल के साफ्टवेयर को प्रभु अपडेट कर दो | मन से हिंसा , नफरत और भेदभाव का डाटा डिलीट कर प्रेम को स्टाल कर दीजिये | अब देखिये न आपका आदमी खुद तो राम नहीं है लेकिन पत्नी सीता जैसी चाहता है | आदमी उछल बहुत रहा है पर सरक नहीं रहा है । प्रभु प्रकाशक ने पुस्तक सुधार दिया और आपने इंसान को नहीं सुधारा तो ये इंसान पुस्तक जलाएगा , वाहन जलाएगा । बस्ती जलाएगा , इंसानों को जलाएगा | अगर जो आपने इसके ढीले स्क्रू टाईट कर दिये तो ये दिया जलाएगा , अगरबत्ती जलाएगा , चूल्हा जलाएगा , होली जलाएगा । 

इंसान के होठो पर मुस्कान न होना वाहन में ब्रेक न होने के समान है | आदमी के दिमाग में क्रोध का जाम होना स्टेयरिंग जाम होने की तरह है । पुस्तक की मज़बूत बाइंडिंग और मानव का गठीला शरीर किसी काम का नहीं अगर अंदर उत्तम विचार न हो | प्रभु मानव की सोच को समझ की क्रीम दीजिये हमे त्वचा नहीं विचारधारा को चमकाना है । ए परवर दिगार लगता है तुझको मेरी भी रिपेरिंग करनी होगी | देख न मैंने तेरी क्षमता को ढंग से आंका नहीं और तेरे निर्माण कार्य की तुलना सड़क निर्माण कार्य से करने लगा | हे सर्वशक्तिमान आपको अला अपना प्रोडक्ट के सुधार के लिए जुगाड़ की क्या ज़रूरत है आप तो क्षण भर में बिगड़े को ठीक कर सकते हो । बिना चीर फाड़ के उसके भीतर के लालच और इर्ष्या के ट्यूमर को निकाल सकते हो | हे सर्वव्यापी आपको कौन सा सुधार के पहले एक्सरे और सीटी स्कैन करवाना है ? आप तो बस एक नज़र अपनी सब से प्यारी कृति मानव पर डाल दे तो दुनियां चकाचक हो जाये | आदमी दुनिया में रह कर भी यह समझ नहीं पा रहा है कि वह दुनियां में नींद में ख्वाब की तरह है | जिंदगी में पहले इतनी परेशानी नहीं | आदमी गरीब था गलीच नहीं था | दिक्कत मूर्ख से नहीं धूर्त से है | आज आदमी घटिया साहित्य और खराब वाहन से भी गया गुजरा हो गया है , वरना वह ऐसी पुस्तक और ऐसा वाहन कभी निर्मित नहीं करता । प्रभु आपने जब मानव को बनाया तो उसके भीतर जीने के तत्व भी तो डाले होगे | मैं कहता हूं प्रभु आप किसी भी दस आदमी को एक तरफ़ कर के उनके सीने की खुदाई कीजिये | अगर आपने पी.डब्ल्यू.डी . से खुदाई नहीं कराई तो आपको तुरंत परिणाम मिल जाएगा कि दस में चार के सीने में से सिवाय मलमे के और कुछ नहीं निकला | इनके सीने में जो हया , दया , उमंग , उत्साह , ईमानदारी और प्रेम के तत्व थे वो कहा गए ? अगर आप इस मामले की जांच करायेगे और जांच अवकाश प्राप्त न्यायधीश की टीम ने नहीं की तो आपको इसकी रिपोर्ट भी मिल जायेगी कि कही न कही कुछ तो गड़बड़ है । प्रभु मैं पूरी आबादी की बात नहीं कर रहा हूं , यहां अच्छे इंसान की मात्रा बुरे इंसानों से बहुत ज्यादा है | यह दुनियां अच्छे लोगो के कारण ही बची हुई है | बुरे डाक्टर , वकील , नेता , अफसर तो चुटकी भर है , लेकिन इतू से बुरे लोग इत्ते सारे अच्छे लोगो को परेशान कर रहे है । बुरे लोग अपने बुरे होने के कारण आक्रमक हो रहे है और अच्छे लोग अच्छे होने के कारण शांत है , या फिर अच्छे आदमी उतने अच्छे नहीं है जितने खराब आदमी खराब है । प्रभु जो कम होशियार है उनकी होशियारी जरा बढ़ा दो और जो डेढ़ होशियार है उनकी थोड़ी कम कर दीजिये | जो है तो मूर्ख लेकिन समझते है खुद को होशियार उन्हें उल्टा कर दो और जो होशियार है लेकिन ज़ाहिर मूर्ख होने का करते है उन्हें सीधा कर दिया जाये । प्रभु मेरी यह अरज सुन लो . तुम को सुनना ही होगा । तुम से न कहे तो किस से कहे ? तुम्हारे पास अरबो खरबों बंदे है लेकिन हमारे पास तो तुम एक अकेले खुदा हो । अगर कहन कथन में कुछ अशोभनीय हुआ हो तो उपर वाले और नीचे वालो से क्षमाप्रार्थी हूँ ।