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बड़ी खबरः पुलिस की कस्टडी में विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

बड़ी खबरः पुलिस की कस्टडी में विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

हत्या के संदेह में जेई को पुलिस चौकी लाकर कर दी जमकर पिटा, हालत बिगड़ते देख, फिर पहुँचाया अस्पताल, हुई मौत, शरीर में चोट के निशान

सुरजपुर, 25 नवंबर। सूरजपुर जिले के लटोरी पुलिस की कस्टडी में विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर पूनम कतलम की संदिग्ध परिस्थितियों की मौत हो गई। परिजनों ने का शव लेने से इंकार कर दिया, साथ ही भाजपा नेता व परिजनों  द्वारा बिश्रामपुर एनचल शव रखकर जमकर हंगामा किया, परिजनों ने पुलिस पर मारपीट करने का आरोप भी लगाया है। शव में चोट के निशान है। पुलिस कप्तान मौत के  कारण के पीछे अन्य दलीलें दे रहे है। तो वहीं चौकी प्रभारी कांग्रेसी नेताओं का चहेता होने के कारण पुलिस के उच्च अधिकारियों द्वारा निलंबन की कार्यवाही करने में हाथ पांव फूलने लगे है। 

बतादें कि बीते सोमवार को लटोरी चौकी के अंतर्गत करवा विद्युत सर्ब स्टेशन के सामने मुख्य मार्ग पर एक युवक की लाश मिली थी। धरपुर निवासी 24 वर्षीय हरिश्चंद्र पिता धनेश्वर के रूप में हुई थी सूचना पर लटोरी चौकी प्रभारी सुनील सिंह अपने टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे मृतक के शरीर पर चोटों के निशान व अन्य जानकारियों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीक होने पर मामले की विवेचना शुरू की गई जांच में यह तथ्य सामने आई कि मृतक बीते शाम विद्युत वक्त बस स्टेशन में ही मौजूद था वहां शराब को लेकर आपस में ही विवाद हो गया जहां विजय तथा पूनम कतलम भी मौजूद थे इन्हीं इसी हत्या के मामले में मुख्य आरोपी विजय के साथ संदेही और पूनम कतलम को भी पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। परिजनों का आरोप है कि उनके साथ पुलिस चौकी में मारपीट की गई और जब तबीयत बिगड़ी तब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया जहां से उनकी मौत हो गई।

सूत्रों के मुताबिक जेईई पूनम कतलम सुबह 11 बजे को लटोरी चौकी पुलिस ने पहले चौकी में लाकर जमकर पिटाई की जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो शाम 4 उन्हें सीधे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां मंगलवार की रात उसकी मौत हो गई, उसके आंख के नीचे काले दाग, चेहरा में सूजन, पीठ में काफी निशान, पैर का आधा हिस्सा फटा हुआ था। पुलिस अभिरक्षा में मौतों का मामला यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी चंदद्वरा थाना, अंबिकापुर कोतवाली थाने में पंकज बेक का घटना हो चुकी है।

मृतक के चाचा खुलाश राम नेताम ने कहां कि मेरे भतीजे का पुलिस की पिटाई से हुई है मौत..

उसके चाचा खुलाश राम नेताम ने पुलिस कस्टडी में पिटाई करने से मौत हो जाने का आरोप लगाया है उन्होंने कहा कि शरीर का ऐसा कोई अंग नहीं है जहां ऐसा निशान नहीं है। परिजनों व भाजपा नेताओं ने देर शाम बिश्रामपुर बस स्टैंड पर शव को रखकर विरोध प्रदर्शन कर दोषी पुलिसकर्मी पर हत्या का अपराध दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग किये है।

जैसे ही भाजपा के दिग्गज नेता देवेंद्र गुप्ता, ललित गोयल, दुर्गा गुप्ता, अलंकार, फिरोज, अलंकार अनूप जायसवाल, पारश, राजेश यादव को यह जानकारी मिली की पीएम के दौरान वीडियोग्राफी नहीं की गई है नही शव भेजने के लिए किसी प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई है और अन्य किसी प्रकार का मृतक के परिजनों को सहायता नही की गई है। तत्काल पूरी दल बल के साथ परिजनों के पास पहुचे और विश्रामपुर के बस स्टैंड में जमकर हंगामा किया मौके पर पहुचे लगातार 2 घण्टे तक जमकर पुलिस व कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन व नारेबाजी होते रहा। मौके पर पहुचे एसडीएम पुष्पेंद्र शर्मा, एसडीओपी प्रकाश सोनी ने  परिजनों को ₹62000 तत्कालीन सहायता, टीम गठित कर निरपेक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करने का लिखित में आश्वासन दिया तब कहीं प्रदर्शन समाप्त हुआ, फिर मुक्तजली एंबुलेंस में बालोद जिला के लिए शव को लेकर परिजन रवाना हुए।

पूर्व गृहमंत्री ने कहा मामला काफी शर्मनाक, सरकार पुलिस कर्मियों को गुंडा गर्दी के लिए दे रखी है छूट

इस संबंध में छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा से फोन के माध्यम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला मेरे जानकारी पहले ही मिली है, मामला काफी ही शर्मनाक है प्रदेश में जब से काग्रेस सरकार आई है पुलिसकर्मियों की गुंडागर्दी चरम सीमा पर है भूपेश सरकार ने पूरी छूट दे रखी है और यह पहला मामला नहीं है इससे पूर्व भी कई मामले सामने आ चुके हैं लेकिन पीड़ित परिजन के पक्ष में अभी भाजपा खड़ी है दोषी पर सख्त कार्रवाई नहीं होने पर भाजपा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस के दलील पर उठाये सवाल

सरगुजा के सामाजिक कार्यकर्ता अकील अहमद शोशल मीडिया में लिखतें है कि बर्बर पुलिस बेलगाम प्रशासन, एक के बाद एक सिलसिलेवार एक और कस्टोडियल डेथ, सूरजपुर जिले के लटोरी चौकी में हुआ है। पुलिस की माने तो एक हत्या के मामले में बिजली विभाग में पदस्थ संदिग्ध जुनियर इंजीनियर को पुलिस पकड़ने जाती है लेकिन उसकी तबियत खराब देख उसे लटोरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करा देती है जिसकी सुबह तड़के मौत हो जाती है पुलिस का कहना है उन्होंने गिरफ्तार किया ही नहीं था तो कस्टोडियल डेथ कैसे?

- पूछे कुछ सवाल

1. पुलिस जब हत्या जैसे संगीन जुर्म में किसी संदिग्ध को पड़कने जाती है तो क्या उसे ऐसे ही लापरवाही से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छोड़ आती है उसकी सुध नहीं लेती?

2. क्या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर इतना अनाड़ी है कि उसे एक अत्यंत गंभीर बीमार व्यक्ति और एक साधारण बीमारी की समझ नहीं है? यदि मामला गंभीर था तो उसने 15 किलोमीटर दूर जिला मेडिकल अस्पताल या मेडिकल कॉलेज उक्त संदिग्ध को रिफर क्यों नहीं किया?

3. क्या पुलिस किसी भी संदिग्ध को पकड़ने जाती है तो उसे, उसके सहयोगी के साथ अस्पताल में अकेले छोड़ देती है? मरीज ठीक होते फरार हो गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी? पुलिस ने किसी सिपाही को उसके साथ क्यों नहीं छोड़ा? 

4. पुलिस का कहना है जिस व्यक्ति के हत्या के आरोप में उक्त जूनियर इंजीनियर को पुलिस लायी थी उसके कपड़ों में मृतक(जिसकी हत्या का शक उक्त जेई पर था) के खून के छीटें थे तो अब ऐसी स्थिति में हो सकता है बदले की भावना से कोई उक्त संदिग्ध की हत्या कर दे, तो क्या पुलिस ने जब उसे एक स्थान से उठाया तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की नहीं थी?

5. जब पुलिस इसे कस्टोडियल डेथ नहीं मान रही तो मजिस्ट्रेट को पुलिस अधीक्षक ने जांच के लिए क्यों लिखा ? मर्ग कायम करके मामला रफा दफा कर देना था.

आगे कहते है कि यह सब पुलिस की पूरी कहानी को सच मानते हुए प्रश्न उठा रहा हूं जबकि दूसरा पहलू यह है कि उपलब्ध फ़ोटो में उक्त जेई के पीठ में पर्याप्त एवं गंभीर किस्म के कॉनट्यूजन(भीतरी चोट) है पुलिस की कहानी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में पर्याप्त अंतर है.