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AIIMS में स्ट्रेन की जांच करने वाली मशीन का ट्रायल शुरू

AIIMS में स्ट्रेन की जांच करने वाली मशीन का ट्रायल शुरू

रायपुर, 9 जनवरी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के वीआरडी लैब में किसी भी वायरस का जीनोम सीक्वेंसिंग का पता करने वाली नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसी मशीन के इंस्टॉलेशन का काम पूरा हो गया है, और अब कोरोना व अन्य बीमारियों के वायरस का स्ट्रेन पता करने के लिए अब सैंपल एनआईवीए पुणे नहीं भेजना पड़ेगा। 

मशीन का ट्रायल चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 26 जनवरी से पहले वायरस के स्ट्रेन की जांच शुरू हो जाएगी। एक करोड़ से ज्यादा की लागत की मशीन है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वायरस के स्ट्रेन का पता करने के लिए फिलहाल सैंपल पुणे भेजा जाता है। कोरोना के शुरुआती दौर में आरटी-पीसीआर मशीन नहीं होने पर सैंपल जांच के लिए पुणे भेजा जाता था, जिसकी रिपोर्ट आने में एक-दो दिन लग जाते थे। कोरोना के स्ट्रेन-2 की जांच के लिए भी सैंपल भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट का करीब एक सप्ताह से ज्यादा समय से इंतजार किया जा रहा है। नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसी मशीन न सिर्फ कोरोना वायरस बल्कि टीबी, पोलियो व अन्य वायरस के जीनोम स्टडी में काफी कारगर सिद्ध होगी। 

एम्स के माइक्रोबॉयोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. अनुदिता भार्गव के मुताबिक, जीनोम सीक्वेंसिंग से किसी भी बीमारी के वायसर की कौन सी स्ट्रेम है, हमारे यहां किस प्रकार का वायरस फैला हुआ है आदि की जानकारी तुरंत मिल जाएगी, जिससे इलाज में डॉक्टरों को आसानी होगी।

एम्स के पीआरओ शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि मशीन के इंस्टॉलेशन का काम पूरा हो गया है। ट्रायल चल रहा है। उम्मीद है 26 जनवरी से पहले जांच प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मशीन शुरू होने के बाद सैंपल जांच के लिए पुणे नहीं भेजना पड़ेगा।