breaking news New

औषधि पौधों का संरक्षण एवं संवर्धन स्वास्थ्य व शिक्षा के दिशा में कारगर - आर सी मेश्राम

औषधि पौधों का संरक्षण एवं संवर्धन स्वास्थ्य व शिक्षा के दिशा में कारगर - आर सी मेश्राम


छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड, कापसी परिक्षेत्र में प्लांटेशन एवं प्रदर्शनी केन्द्र

संजय सोनी

भानुप्रतापपुर, 12 फरवरी। धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे औषधि पौधों का संरक्षण एवं संवर्धन के दिशा में बेहतर कार्य करते हुए आर सी मेश्राम डीएफओ पश्चिम वनमंडल भानुप्रतापपुर का सराहनीय पहल जो भविष्य में लोगो के स्वास्थ्य व शिक्षा के दिशा में कारगर साबित होंगी।

श्री मेश्राम ने कहा कि औषधि पौधे का प्लांटेशन तैयार करने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को वन औषधि के बारे में जागृत करना जो वन औषधि पौधो के संरक्षण व संवर्धन में उपयोगी साबित करना है। साथ ही नई पीढी, स्कूल कालेज के बच्चे शैक्षणिक भ्रमण के दौरान इनऔषधि पौधो का प्लांटेशन देखकर जानेंगे व इसके महत्व को समझेंगे।


छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा होम हर्बल गार्डन का विचार लाया गया है ।

छत्तीसगढ़ प्रदेश में 911 प्रजाति के 196 समूहों में औषधीय पौधों की उपलब्धता हैं । इनमें से 14 किस्में उप प्रजाति वर्ग से हैं । कुल औषधीय पौधों की प्रजातियाँ 1525 हैं जिनमें लताएँ 161 , शाक 808 , झाड़ियाँ 262 और पेड़ 294 सम्मिलित हैं ।


प्लांटेशन में औषधीय पौधे हो रहे तैयार 

विदित हो कि छत्तीसगढ़ राज्य औषधि पादक बोर्ड के द्वारा औषधि पौधों का प्रदर्शन एवं पर्यावरण चेतना केंद्र नारंगी क्षेत्र कापसी स्थापना वर्ष 2016-17 में किया गया है। यहा पर वर्तमान में 36 प्रकार के वन औषधि पौधे लगाए गए है। जिनमे प्रमुख रूप से औषधीय पौधों में निर्गुण्डी, विधारा, एलोविरा, तीखुर, भुई आंवला,  सतावर, सफेद मूसली,  गुड़मार, जंगली प्याज, काली हल्दी, केवुकन्द, गिलोय, कालामेघ, बच, काली मूसली, शिकाकाई, हड़जोड़, अंतत मूल, बिदारी कंद, नीम, हर्रा, बहेडा, आंवला, पीपल, सागोंन, शीशम, लेमनग्रास, महुआ, कदम्बा, कुल्लू, चंदन,साजा, बीज के पौधे तैयार हो गए है। वही इनके अलावा भी सैकड़ो प्रकार के औषधीय पौधा है,यदि इसके लिए अलग से बजट मिले तो आगे भविष्य में प्लांटेशन लगाये जाने की योजना हैं।  


 छात्राओं के लिए बनाया गया प्रदर्शनी केंद्र 

कापसी नारंगी  क्षेत्र में प्लांटेशन के अंदर ही भवन निर्माण कर वहा विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों के सचित्र के साथ ही औषधीय पौधो के उपयोगी फल फूल एवं जड़ को डिब्बे में एकत्रित कर उनके महत्व को समझाने का प्रयास किया गया है।

 औषधीय पौधा हर रोग के लिए कारगर 

पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की अपनी एक विशिष्ट परंपरा रही है । 

देखा जाए तो आज हर एक ब्यक्ति कोई न कोई रोग से पीड़ित है। उपचार चिकित्सा की बात करे तो एलोपद्धति (अंग्रेजी) आयुर्वेदिक, होम्योपैथी पद्धति से किये जा रहे है। तीनो पद्धतियों में आयुर्वेद जड़ी बूटी को आदिकाल से सर्वश्रेष्ठ माना गया है। लेकिन आयुर्वेद जड़ी बूटी के देखरेख की अभाव व इनके प्रति जागरूकता के कमी होने से विलुप्त की कगार में है, जिन्हें संरक्षण व संवर्धन करने की जरूरत है।