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ब्रेकिंग : रेमेडीसिवर की कालाबाजारी करते पकड़ाए आरोपी अभी तक फरार..स्वास्थ्य मंत्री बोले, 'कालाबाजारी बर्दाश्त नही, कंपनी के विरूऋ सख्त कार्यवाही के निर्देश..कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने किया था खुलासा..उनके भतीजे से वसूले थे तीन इंजेक्शन के 45 हजार!

ब्रेकिंग : रेमेडीसिवर की कालाबाजारी करते पकड़ाए आरोपी अभी तक फरार..स्वास्थ्य मंत्री बोले, 'कालाबाजारी बर्दाश्त नही, कंपनी के विरूऋ सख्त कार्यवाही के निर्देश..कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने किया था खुलासा..उनके भतीजे से वसूले थे तीन इंजेक्शन के 45 हजार!

जनधारा समाचार

रायपुर. कोरोना संक्रमित मरीज को राहत देने वाले रेमेडीसिवर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते पकड़ाए फरार आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफत से बाहर हैं. दूसरी ओर इस पूरे मामले में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि कालाबाजारी बर्दाश्त नही होगी. कंपनी के विरूद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं'

इस पूरे मामले का भांडाफोड़ करने वाले कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि जब मैंने वीडियो जारी कर दिया है और ड्रग इंसपेक्टर को पूरे मामले से अवगत करा दिया है तो अब लिखित शिकायत की क्या जरूरत है! ड्रग कंट्रोलर विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नही की है. उसका कहना है कि इसकी कोई लिखित शिकायत नही हुई है.

रेमेडीसिवर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते पकड़ाए दो आरोपी

जानते चलें कि रेमेडीसिवर इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोकने और जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने विशेष यत्न करते हुए 8800 रेमेडीसिवर इंजेक्शन राज्य में उपलब्ध करवाए हैं तथा उन्हें अस्पतालों के मार्फत जरूरतमंदों को बांटने के लिए उपलब्ध करवाए हैं. इसी दौरान कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी के भतीजे को इन इंजेक्शन की जरूरत पड़ी तो उन्होंने एक अस्पताल में संपर्क किया. मालूम चला कि वहां पर मौजूद दो कर्मचारियों ने भतीजे को रेमेडीसिवर इंजेक्शन उपलब्ध कराने का वादा किया और इसके लिये प्रति इंजेक्शन 15 हजार यानि तीन इंजेक्शन के 45 हजार रूपये मांगे. आरोपियों ने उससे रूपये लेकर इंजेक्शन भी दे दिए लेकिन अचानक विकास तिवारी पहुंच गए और उन्होंने कालाबाजारी कर रहे कर्मियों को रंगे हाथों पकड़ लिया.

मौखिक शिकायत और वीडियो जारी होने के बाद भी ड्रग कंट्रोलर चुप्पी साधे बैठा

हालांकि वाद विवाद के दौरान दोनों डरके मारे भाग निकले लेकिन विकास तिवारी ने इसकी मौखिक शिकायत ड्रग इंसपेक्टर पाटले से कर दी. उसके बाद मीडिया में भी यह मामला हाईलाईट हो गया. इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और सरकार की खासी किरकिरी भी हुई है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि जब सरकार से जुड़ नेता ही कालाबाजारी का शिकार हो रहे हैं तो आम आदमी की बिसात ही क्या.

स्वास्थ्य अफसरों की मंशा पर भी सवाल उठे

चूंकि मामले का खुलासा खुद पार्टी के प्रवक्ता ने किया है इसलिए उम्मीद की जा रही है कि कालाबाजारी करते पकड़ाए आरोपियों की जल्द गिरफतारी होगी और कड़ी कार्यवाही की जाएगी लेकिन अफसरों ने इस मामले में चुप्पी साध ली है. भाजपा नेताओं का आरोप है कि जिस अस्पताल के कर्मचारी कालाबाजारी करते पकड़ाए हैं, उसका सत्ता से नजदीकी संबंध है इसलिए कार्यवाही नही की जा रही है.