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हनीट्रैप पेनड्राइव मामले में कमलनाथ को पुलिस ने जारी किया नोटिस

हनीट्रैप पेनड्राइव मामले में कमलनाथ को पुलिस ने जारी किया नोटिस

इंदौर, 30 मई ।बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को नोटिस जारी कर दो जून को उसके समक्ष बयान और भौतिक साक्ष्य (सीडी/पेनड्राइव) मुहैया कराने के लिए कहा है।

एसआईटी के विवेचना सहायक (निरीक्षक) शशिकांत चौरसिया की ओर से श्री कमलनाथ को एक पेज का नोटिस जारी किया गया है, जो आज मीडिया तक पहुंचा।

नोटिस के मुताबिक श्री कमलनाथ से अपेक्षा की गयी है कि वे दो जून को दोपहर 12़ 30 बजे भोपाल के श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र में स्थित अपने निवास पर उपस्थित होकर अधोहस्ताक्षरकर्ता (श्री चौरसिया) के समक्ष कथन और भौतिक साक्ष्य (सीडी/पेनड्राइव) एसआईटी को देने का कष्ट करें।

पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि कल भेजे गए नोटिस में बहुचर्चित हनीट्रैप मामले की उस कथित पेनड्राइव का जिक्र किया गया है, जिसका जिक्र वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने हाल ही में 21 मई को आयोजित एक ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस में किया था।

नोटिस में इसी पेनड्राइव को जांच के लिये उपलब्ध कराये जाने और इसी पेनड्राइव के संबंध में कथन दर्ज कराये जाने की अपेक्षा की गयी है।

नोटिस के अनुसार श्री कमलनाथ द्वारा ली गयी प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया है कि हनीट्रैप प्रकरण की सीडी/पेनड्राइव उनके पास मौजूद है।

इस प्रेस कांफ्रेंस का प्रसारण सोशल मीडिया पर भी किया गया था और संबंधित खबरें समाचारपत्रों में प्रकाशित हुयीं।नोटिस के अनुसार इंदौर जिले के पलासिया थाने के अपराध क्रमांक 4़05/19 के अनुसंधान में यह सीडी पेनड्राइव अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य है। इस सीडी पेनड्राइव को प्राप्त कर इस अपराध के अनुसंधान को और अधिक प्रभावशाली तथा सुदृढ़ बनाया जा सकता है। अत्यंत महत्वपूर्ण व संवेदनशील हनीट्रैप प्रकरण के संबंध में नवीन तथ्य भी ज्ञात किए जा सकते हैं। हनीट्रैप प्रकरण का अनुसंधान मध्यप्रदेश शासन द्वारा गठित एसआईटी द्वारा किया जा रहा है। इंदौर नगर निगम के एक तत्कालीन इंजीनियर की शिकायत पर लगभग दो वर्ष पहले यहां की पलासिया थाना पुलिस ने एक प्रकरण दर्ज किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ महिलाओं ने उनके निजी पलों का आपत्तिजनक वीडियो बनाया है और वे उन्हें ब्लैकमेल करते हुए बड़ी धनराशि की मांग कर रही हैं। इसकी शिकायत के बाद पुलिस ने इंदौर से कुछ महिलाओं और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद कुछ हाईप्रोफाइल महिलाओं की गिरफ्तारी भोपाल से की गयी थी। ये लगभग छह आरोपी इंदौर जेल में बंद हैं।

मामले के खुलासे के बाद महिलाओं के पास से जब्त मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाइस में कथित तौर पर अनेक प्रभावशाली व्यक्तियों के आपत्तिजनक वीडियो मिलने की खबरें सामने आयी थीं। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस मामले का खुलासा हुआ था और उसी समय मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी की ओर से इस नोटिस को बतौर विवेचना सहायक शशिकांत चौरसिया के दस्तखत से जारी किया गया है, जो इंदौर के किशनगंज थाना के प्रभारी हैं।