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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - छत्तीसगढ़ को कोरोना ने डाला चिंता में

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - छत्तीसगढ़ को कोरोना ने डाला चिंता में

-सुभाष मिश्र
छत्तीसगढ़ का बस्तर जहां नक्सली हिंसा के कारण चिंता में है वहीं समूचे छत्तीसगढ़ को कोरोना ने चिंता में डाल दिया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय टीम भेजी गई है। छत्तीसगढ़ के 11 जिलों बालोद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, बिलासपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा, महासमुंद, रायपुर, राजनांदगांव, सरगुजा को कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित बताया गया है। कोरोना महामारी का प्रभाव यूं तो समूचे देश में बढ़ रहा है किन्तु सर्वाधिक प्रभावित महाराष्ट्र है, जहां से 6 प्रतिशत औसत बढ़ोत्तरी देखी गई है। देशभर में तीन प्रतिशत मामले पंजाब से आ रहे हैं। गुजरात, दिल्ली, केरल में भी कोरोना के मामले बढ़े हैं। अभी तक 8.31 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन भी लगाया जा चुका है जिनमें सर्वाधिक 81 लाख से ज्यादा महाराष्ट्र में है। छत्तीसगढ़ टीकाकरण के मामले में भी पिछड़ा हुआ है। गुजरात में 76 लाख, राजस्थान में 72 लाख, उत्तरप्रदेश में 72 लाख, कर्नाटक में 48 लाख, मध्य प्रदेश में 44 लाख और केरल में 40 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। वहीं अब तक छत्तीसगढ़ में भी लगभग पांच लाख 82 हजार कोविड-19 वैक्सीन की खुराक दी गई है। राज्य में अब तक चार लाख आठ हजार से अधिक स्वास्थ्य और फ्रंटलाईन श्रमिकों को सीओवीआईडी-19 वैक्सीन की पहली खुराक दी गई है। एक लाख तीन हजार से अधिक स्वास्थ्य और सीमावर्ती कार्यकर्ताओं ने दूसरी खुराक ली है। छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 274 नए पुष्ट मामले सामने आए। इसके साथ छत्तीसगढ़ में अब तक पाए गए कोविड-19 मामलों की कुल संख्या 3 लाख 13 हजार 808 तक पहुंच गई है। टेस्ट, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट को आधार बनाकर केन्द्र सरकार इस बार कोरोना से निपटना चाहती है।

हमारे देश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने हमें पहले नम्बर पर रहे अमेरिका और ब्राजील से आगे लाकर खड़ा कर दिया है। हमारे देश में प्रतिदिन एक लाख से अधिक नये मामले कोरोना के आ रहे हैं। कोरोना के पहले चरण में हमने बहुत हद तक इसे सावधानी बरत कर नियंत्रित किया था किन्तु दूसरी लहर के आते-आते हम मास्क पहनने, शारीरिक दूरी बरतने और सैनेटाइजेशन के निर्देशों की अनदेखी करने लगे। हमारी उत्सवधर्मिता और भीड़तंत्र में शामिल होने की आदत ने कोरोना की रफ्तार को बढ़ाने में आग में घी का काम किया। पहले चरण में जहां कोरोना शहरों तक सीमित था अब उसका विस्तार गांव-गांव तक होने लगा है, जो सर्वाधिक चिंता की बात है। स्थानीय प्रशासन चाहकर भी उस तरह की पाबंदी नहीं लगा पा रहा है, जो अपेक्षित है जबकि पाबंदियों का कड़ाई के साथ पालन के अलावा और विकल्प हमें दिखाई नहीं देता। बढ़ते हुए संक्रमण की वजह से आमजनों द्वारा बरती जा रही लापरवाही है। इस लापरवाही को बढ़ाने में हमारे राजनैतिक दल, नेताओं प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को नहीं नकारा जा सकता।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वैक्सीनेशन को बढ़ाने के लिए 24 घंटे की सुविधा उपलब्ध कराई है। धीरे-धीरे कभी राज्यों को ये समझ में आ रहा है कि हमें कोरोना वैक्सीन की रफ्तार बढ़ाकर अपने नागरिकों को मरने से बचाना होगा। अभी भी अधिकांश स्थानों पर महामारी स्थिति से निपटने के ना तो संसाधन हैं, ना ही सुविधाएं। यदि कोरोना संक्रमण की गति यूं ही बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में बहुत ही भयावह दृश्य उपस्थित होगा। अभी हाल ही में ब्रिटेन की सरकार ने बिना लक्षण वाले कोरोना विषाणु संक्रमितों का पता लगाने के लिए इंग्लैंड रहने वाले सभी लोगों को सप्ताह में दो बार कोरोना की मुफ्त जांच होगी। सरकार ने अभी इस परिवार सहित सप्ताह में दो बार जांच की अपील की है।

जब हम कोरोना संक्रमण के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ रहे हैं तो हमें पता होना चाहिए कि अमेरिका में वैक्सीन प्रशासन की दैनिक औसत 30.53 लाख खुराक है, जबकि भारत में प्रतिदिन 26.53 लाख वैक्सीन खुराक, अमेरिका ने 112 दिनों में 16 करोड़ खुराकें दी हैं। भारत ने 79 दिनों में 7.9 करोड़ खुराकें दी हैं। छत्तीसगढ़ आबादी की दृष्टि से छोटा राज्य होने के बावजूद यहां कुल कोविड मामलों का 6 प्रतिशत और देश में कुल मौतों का 3 प्रतिशत रिपोर्ट करता है। संक्रमण की दूसरी लहर में छत्तीसगढ़ की हालत बिगड़ गई है। कोरोना की दूसरी लहर में रविवार रात तक 24 घंटों के दौरान मिले संक्रमण के मामले 1,03,764 तक पहुंच गए। प्रतिदिन के कुल मामलों में करीब दस-दस हजार की वृद्धि हो रही है, इससे संक्रमण के बढ़ते खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। महामारी की शुरुआत के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब देश में एक दिन के अंदर कोरोना के एक लाख से ज्यादा मामले आए हैं। दुनिया में इसके पहले केवल अमेरिका ही एक ऐसा देश है, जहां एक दिन में एक लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे। अब अमेरिका में जहां प्रतिदिन 70 हजार के करीब मामले आ रहे हैं, वहीं भारत एक लाख के पार पहुंच गया है। अगर यही रफ्तार रही, तो अप्रैल घातक सिद्ध होगा। भारत चूंकि अमेरिका की तुलना में चार गुना से ज्यादा आबादी वाला देश है, इसलिए आंकड़े कहां जाकर दम लेंगे, सोचना भी भयावह है।  

दुनिया को अभी कोरोना के बारे में पूरे जवाब नहीं मिले हैं। आखिर कोरोना कैसे पैदा हुआ? विश्व स्वास्थ्य संगठन की जो टीम चीन दौरे पर गई थी, वह भी पुख्ता जवाब के साथ नहीं लौटी है। उस टीम के पास कुछ आंकड़े भर हैं और इस टीम के सदस्यों को भी लगता है, कोरोना-खोज की यह शुरुआत भर है। कोरोना का जवाब खोजना इसलिए भी जरूरी है, ताकि हमारी आने वाली पीढिय़ों को ऐसी किसी महामारी से बचाया जा सके।  दिल्ली में भी कुछ निजी अस्पतालों में आईसीयू  कम पडऩे लगे हैं। यह स्थिति तब है, जब केंद्र समेत तमाम राज्य सरकारें कोरोना संक्रमण की नई लहर की आशंकाओं से वाकिफ थीं और वे इसे नियंत्रित करने को लेकर निरंतर सक्रिय भी रही हैं।