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नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी को संयुक्त राष्ट्र ने बनाया विकास लक्ष्य का 'एडवोकेट'

नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी को संयुक्त राष्ट्र ने बनाया विकास लक्ष्य का 'एडवोकेट'

 नयी दिल्ली।  संयुक्त राष्ट्र ने नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी को सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के लिये 'एडवोकेट' बनाया है।

‘एसडीजी एडवोकेट’ के रूप में श्री सत्यार्थी संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य को वर्ष 2030 तक हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। श्री सत्‍यार्थी की बाल दासता को समाप्‍त करने और बच्‍चों के गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा के अधिकारों के लिए वैश्विक आंदोलन के निर्माण में अग्रणी भूमिका रही है। उनके इसी योगदान को देखते हुए उन्हें एसडीजी एडवोकेट बनाया गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने इस आशा की घोषणा शुक्रवार देर शाम की। संयुक्त राष्ट्र ने अपने सतत विकास लक्ष्य के एजेंडे में वर्ष 2025 तक समूचे विश्वभर से बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने श्री सत्‍यार्थी को एसडीजी एडवोकेट नियुक्त करते हुए कहा, "मैं दुनियाभर के बच्चों को आवाज देने के लिए श्री सत्यार्थी की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं। यह समय की जरूरत है कि हम एक साथ आएं, सहयोग करें, साझेदारी बनाएं और एसडीजी की दिशा में वैश्विक कार्रवाई को तेज करने में एक दूसरे का समर्थन करें।"
इस अवसर पर श्री सत्यार्थी ने कहा, ‘‘दुनिया के बच्चों की ओर से मैं इस नियुक्ति को स्वीकार करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं। महामारी से पहले के चार वर्षों में पांच से 11 साल की उम्र के 10,000 अतिरिक्त बच्चे हर दिन बाल मजदूर बन गए। यह वृद्धि भी संयुक्त राष्ट्र एसडीजी के पहले चार वर्षों के दौरान हुई। यह एक अन्‍यायपूर्ण विकास है जो 2030 एजेंडा की संभावित विफलता की प्रारंभिक चेतावनी देता है। जो बच्चे बाल श्रम में हैं वे स्कूल में नहीं हैं। उनकी स्वास्थ्य की देखभाल, शुद्ध जल और स्वच्छता तक सीमित या कोई पहुंच नहीं है। वे घोर गरीबी के दुश्‍चक्र में रहते हैं और पीढ़ीगत नस्लीय और सामाजिक भेदभाव का सामना करते हैं।’’