गुनाहों से तौबा की रात, आज 'शब-ए-बारात',

गुनाहों से तौबा की रात, आज 'शब-ए-बारात',

रायपुर. शब-ए-बारात मुसलमान समुदाय के लोगों के लिए इबादत और फजीलत की रात होती है. यह दो शब्दों से मिलकर बनी है, जिसमें शब का मतलब रात और बारात का मतलब बरी होता है. इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, इस रात को अगर सच्चे दिल से इबादत की जाए और गुनाहों से तौबा की जाए तो अल्लाह हर गुनाह से पाक कर देता है.

इस बार शब-ए-बारात लॉकडाउन के बीच कल 9 अप्रैल को पड़ी है. इसे फैसले की रात भी कहा जाता है. मिसाल के तौर पर आने वाले एक साल में किस इंसान की मौत कब और कैसे होगी, इसका फैसला इसी रात किया जाता है.  
शब-ए-बारात के अगले दिन रोजा रखा जाता है. माना जाता है कि शब-ए-बारात के अगले दिन रोजा रखने से इंसान के पिछली शब-ए-बारात से इस शब-ए-बारात तक के सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं. हालांकि ये रोजा रखना फर्ज नहीं होता है. मतलब अगर रोजा ना रखा जाए तो गुनाह भी नहीं मिलता है लेकिन रखने पर तमाम गुनाहों से माफी मिल जाती है.